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Haryana: लापरवाही की भेंट चढ़ा 5.85 करोड़ का 30 हजार क्विंटल गेहूं, रखे-रखे सड़ गया अनाज
Sat, 11 Mar 2023 03:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
Updated Sat, 11 Mar 2023 03:14 AM IST
सार
अब एक दूसरे को जिममेदार बता रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर बोले- समय पर नहीं किया गया उठान। एफसीआई के मैनेजर का कहना है कि मेरे कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही गेहूं खराब घोषित हो चुका था। करनाल के डीएफएससी बोले कि नीलामी के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा है, अनुमति मिलते ही कार्रवाई होगी।
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जुंडला गोदाम में सड़ रहा गेहूं।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से करनाल के जुंडला में निजी भूमि पर रखा गया करीब 30 हजार क्विंटल गेहूं लापरवाही की भेंट चढ़ गया। इसकी कीमत करीब पांच करोड़ 85 लाख बताई जा रही है। दो साल पहले 2020-21 में लगे इस स्टॉक की आज तक नीलामी नहीं हो सकी है, जबकि इससे पहले और बाद के स्टॉक का उठान करा लिया गया।
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दो साल पहले 2020-2021 में गरीबों के लिए आवंटित गेहूं का जुंडला में भाटिया ओपन प्लिंथ पर स्टॉक किया गया था, ताकि यहां से जिले के डिपो में इसकी आपूर्ति की जा सके, लेकिन जरूरतमंदों के हिस्से का यह गेहूं अव्यवस्था और लापरवाही के कारण सड़ गया।
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गुणवत्ता अच्छी न होने के कारण डिपो ने इसका उठान नहीं किया और विभाग की ओर से इसकी देखरेख के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। नतीजतन खुले में रखा 30 हजार क्विंटल गेहूं सड़ गया, लेकिन आज तक इसकी नीलामी नहीं की जा सकी। गेहूं की देखरेख के लिए विभाग की ओर से यहां कोई कर्मचारी भी नहीं रखा गया। अब स्थिति यह है कि स्टॉक पर जो तिरपाल ढका गया था वह फट गया है। ज्यादातर स्टॉक में गेहूं के स्थान पर आटा निकल रहा है। कट्टों में सिर्फ छिलका नजर आ रहा है।
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दूसरी ओर डीएफएससी विभाग एफसीआई को इसके लिए जिम्मेदार बता रहा है। उसका कहना है कि एफसीआई ने समय रहते गेहूं का उठान नहीं किया, जबकि 2019-20 और 2021-22 के गेहूं का उठान कर लिया गया। इस संबंध में एफसीआई का कहना है कि जब उन्होंने गेहूं की जांच की तो वह खाने लायक नहीं था। संयुक्त कमेटी ने भी इसकी जांच के बाद इसे नॉन इश्यूबल घोषित कर दिया। अब दो साल से डीएफएससी विभाग इसकी ऑक्शन कराने के लिए चंडीगढ़ ऑफिस का दरवाजा खटखटा रहा है, लेकिन अभी तक वहां से कोई रिपोर्ट नहीं आई।
डिपो पर खराब अनाज का भी उठा था मामला
कोविड के समय में गरीबों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के दौरान भी यह भाटिया प्लिंथ सुर्खियों में रही थी। गरीबों के लिए जो अनाज यहां से दिया गया था वह पूरी तरह से खराब था। मामले में उस समय के इंस्पेक्टर नवीन कालीरमन को कुछ माह के लिए सस्पेंड भी किया गया था। बाद में बहाल हाेने के बाद उन्हें फिर से चार्ज मिल गया। तब से वो ही यहां का कामकाज देख रहे हैं।
एफसीआई ने समय पर नहीं किया उठान : नवीन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर नवीन कालीरमन का कहना है कि एफसीआई ने समय पर गेहूं का उठान नहीं किया जिस कारण स्टॉक में लगा गेहूं खराब हो गया। इस सेंटर को छोड़कर बाकी सभी सेंटरों से एफसीआई ने गेहूं का समय पर उठान करवा लिया था।
पहले से ही नॉन इश्यूबल हो चुका था घोषित : परमजीत
एफसीआई मैनेजर परमजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने अक्टूबर 2021 में यहां का चार्ज लिया था। जब उन्होंने भाटिया प्लिंथ पर लगे गेहूं की जांच की तो वह पहले से ही नॉन इश्यूबल घोषित हो चुका था। एफसीआई और डीएफएससी की संयुक्त कमेटी ने ही स्टॉक की जांच की थी।
नीलामी के लिए हेड ऑफिस चडीगढ़ को लिखा है पत्र : कालड़ा
करनाल के डीएफएससी अनिल कालड़ा का कहना है कि जुंडला स्थित भाटिया प्लिंथ पर लगे गेहूं को नॉन इश्यूबल घोषित किया गया है, जिसकी नीलामी के लिए हेड ऑफिस चंडीगढ़ को पत्र लिखा गया है। जैसे ही नीलामी के आदेश मिलते हैं कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कैथल में 22 करोड़ और यमुनानगर में 80 लाख का गेहूं सड़ चुका
कैथल जिले में करीब एक साल पहले 22 करोड़ का गेहूं सड़ गया था। इसकी अभी जांच चल रही है।
यमुनानगर की बिलासपुर अनाज मंडी में नवंबर 2021 में करीब 1560 मीट्रिक टन गेहूं खुले में रखा होने के कारण सड़ गया था। यह गेहूं हरियाणा वेयर हाउस कॉर्पोरेशन का था। खराब हुए गेहूं की कीमत 80 लाख रुपये थी।