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250 निजी स्कूल बंद, 2.5 लाख विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित

Sat, 07 May 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Sat, 07 May 2016 12:21 AM IST
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250 private schools closed, affecting 2.5 million pupils' education
शिक्षा नियम 134-ए - फोटो : अमर उजाला

शिक्षा नियम 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दस प्रतिशत सीटों पर दाखिलों के विरोध में शुक्रवार को जिलेभर के करीब 250 निजी स्कूल बंद रहे। इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब ढाई लाख बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। निजी स्कूल संचालकों ने उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सरकार से शिक्षा नियम 134-ए को समाप्त कर उसकी जगह पर आरटीई एक्ट लागू करने की मांग की है।

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इसके अलावा, स्कूली बसों की लाइफ को 10 साल से बढ़ाकर 20 वर्ष करने व बसों की पासिंग की राशि को कम करने की मांग की है। दूसरी ओर स्कूल संचालकों ने जिले में 134-ए को लेकर अभिभावकों व स्कू लों के बीच बने तनाव के माहौल के लिए अभिभावक संघ को जिम्मेदार ठहराया तथा उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की। उधर, अभिभावक संघ ने भी निजी स्कूल संचालकों पर कड़ा हमला बोला है।   
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सुबह प्राइवेट स्कूल संचालक काफी संख्या में एकजुट होकर लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ रोष भी जाहिर किया। इसके बाद उन्होंने डीसी मनदीप सिंह बराड़ को मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला प्रधान आरएस विर्क ने कहा कि सरकार प्राइवेट स्कूलों पर शिक्षा नियम 134-ए बोझ डालकर उन्हें बंद करना चाहती है। इसलिए लिए प्राइवेट स्कूलों पर गलत कानून बनाकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी स्कूलों की 10 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन दिलाने की जबरदस्ती कर रही है। आरटीई एक्ट के तहत राजकीय स्कूलों की दशा में सुधार करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।
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उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी राजकीय स्कूलों की दशा में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? सरकार को इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राजन लांबा ने कहा कि सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की बसों लाइफ 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी है, जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि रोडवेज की बस तो प्रतिदिन सैकड़ों किलोमीटर का सफर करती हैं। जो अपने दस साल की लाइफ में करीब आठ लाख किलोमीटर का सफर तय करती हैं। जबकि प्राइवेट स्कूलों की बस इस अवधि में सिर्फ सवा लाख से डेढ़ लाख किलोमीटर चलती है।

बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होने देंगे?
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पीआरओ राजन लांबा ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करेगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे हड़ताल से बच्चों के शिक्षा प्रभावित नहीं होने देंगे। इसके लिए भले ही उन्हें रविवार को स्कूल क्यों न खोलने पड़े। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है। लेकिन अब जो नीतियां बनी है, इससे आने वाले समय में प्रदेश में बेहतर शिक्षा का सपना धूमिल हो जाएगा। जो प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी।

अभिभावकों ने कहा गैर कानूनी हड़ताल, स्कूलों के खिलाफ हो कार्रवाई
हजारों रुपये की फीस की अदायगी कर अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे अभिभावक रमेश कुमार, संदीप, अशोक, मितलेश, रीना आदि ने बताया कि प्राइवेट स्कूल की हड़ताल गैर कानूनी है। इससे उनके बच्चों के शिक्षा प्रभावित हो रही है। इसलिए सरकार को इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए तथा उनकी दो दिनों की फीस रिफंड करवाई जाए। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल गलत तरीके की मांग कर रहे हैं, सरकार को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक गरीबी रेखा से नीचे
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जो लोग करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, वो भी दो दिन में तहसील से गरीबी रेखा से नीचे का प्रमाणपत्र लेकर दाखिला करवाने पहुंच गए हैं। आखिर सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे के मानदंड क्या निर्धारित किए हैं तथा उनकी पालना भी हो रही है या नहीं इस पर ध्यान देने की जरूरत है। यदि सभी अभिभावक गरीब हो जाएंगे तो स्कूल कैसे चलेंगे?

निजी स्कूलों की धांधली से प्रदेश का बच्चा बच्चा वाकिफ : संघ
अभिभावक एकता संघ के जिला प्रधान दिनेश नरूला व नवीन अग्रवाल ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा आरोप लगाने के बाद कड़ा हमला बोला। अग्रवाल ने कहा कि निजी स्कूलों में जो लूट मची है, उससे प्रदेश का हर बच्चा बच्चा वाकिफ है। गत दिनों एक स्कूल में धांधली सामने आने पर शिक्षा निदेशालय ने उसकी एनओसी विद ड्रा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन बाद में निदेशालय द्वारा बच्चों के भविष्य को देखते हुए कुछ सख्त हिदायतों के साथ एनओसी विद ड्रा करने का फैसला वापस ले लिया था।


इसके बाद विभाग द्वारा सभी स्कूलों को नियमों के विरुद्ध फीस वसूली के फंडे पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन निजी स्कूलों ने इस बार अपनी मर्जी से उस फीस की रिकवरी के लिए ट्यूशन फीस बढ़ाकर अभिभावकों की जेब काटी है। जब अभिभावकों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो निजी स्कूल संचालक उन्हें उपद्रवी बता रहे हैं। जनता सब जानती है।

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