{"_id":"684237e8de8cf1bbab0aa4a8","slug":"242-children-became-victims-of-violence-in-three-months-karnal-news-c-18-knl1008-662835-2025-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: तीन माह में 242 बच्चे हुए हिंसा के शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: तीन माह में 242 बच्चे हुए हिंसा के शिकार
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। तीन महीने में जिले के 242 बच्चे अपराध के शिकार हुए जो अलग-अलग मामलों में रेस्क्यू किया गए। इनमें घरेलू हिंसा, यौन शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम जैसे मामले शामिल हैं।
आक्रामकता के शिकार हुए बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया तो जाता है, इस दिन बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की बात भी होती है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे हिंसा का शिकार हो रहे हैं।
घरेलू हिंसा के अंतर्गत बच्चों के साथ घर में ही मारपीट, गाली-गलौज, मानसिक प्रताड़ना और उपेक्षा की जाती है। कई बार माता-पिता के आपसी तनाव का असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विज्ञापन
इसमें अधिकतर आरोपी बच्चे के जान-पहचान के होते हैं। बाल कल्याण समिति में आए 54 बच्चे घर से भागे हुए, 11 यौन शोषण और पॉक्सो के, 42 बच्चे बाल मजदूरी के, 29 भीख मांगने वाले, तीन मामले बाल विवाह, आठ गुमशुदा, पांच अनाथ, सात हिंसा का शिकार हुए, 47 अकेले पाए गए और पांच अन्य कारणों से रेस्क्यू किए गए।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश चानना ने बताया कि अधिकतर मामलों में हिंसा की जड़ें बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी होती हैं। जब माता-पिता खुद तनाव में होते हैं या बच्चों की जरूरत की अनदेखी करते हैं तब बच्चे भावनात्मक रूप से टूटने लगते हैं। उन्हें सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और प्रेमपूर्ण वातावरण देना जरूरी है।
कई बार माता-पिता या अभिभावक अपना क्रोध बच्चों पर निकालते हैं जो उनमें तनाव और हिंसा का रूप ले रही है। इस कारण बच्चे घरों से भाग रहे हैं या फिर गलत कदम तक उठा लेते हैं।
बाल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हवा सिंह ने बताया कि आज बच्चे तनाव में सबसे अधिक जा रहे हैं जिनमें 18 वर्ष से कम उम्र के शामिल हैं। इसमें बच्चा कई तरह से परेशान रहता है जैसे यदि बच्चे के साथ समाज में कुछ गलत हो रहा है तो वह अपने माता-पिता को बताने में डर रहा है। जिस कारण वह हिंसा का शिकार हो रहा है।
विज्ञापन
करनाल। तीन महीने में जिले के 242 बच्चे अपराध के शिकार हुए जो अलग-अलग मामलों में रेस्क्यू किया गए। इनमें घरेलू हिंसा, यौन शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम जैसे मामले शामिल हैं।
आक्रामकता के शिकार हुए बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया तो जाता है, इस दिन बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की बात भी होती है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे हिंसा का शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन
घरेलू हिंसा के अंतर्गत बच्चों के साथ घर में ही मारपीट, गाली-गलौज, मानसिक प्रताड़ना और उपेक्षा की जाती है। कई बार माता-पिता के आपसी तनाव का असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विज्ञापन
इसमें अधिकतर आरोपी बच्चे के जान-पहचान के होते हैं। बाल कल्याण समिति में आए 54 बच्चे घर से भागे हुए, 11 यौन शोषण और पॉक्सो के, 42 बच्चे बाल मजदूरी के, 29 भीख मांगने वाले, तीन मामले बाल विवाह, आठ गुमशुदा, पांच अनाथ, सात हिंसा का शिकार हुए, 47 अकेले पाए गए और पांच अन्य कारणों से रेस्क्यू किए गए।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश चानना ने बताया कि अधिकतर मामलों में हिंसा की जड़ें बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी होती हैं। जब माता-पिता खुद तनाव में होते हैं या बच्चों की जरूरत की अनदेखी करते हैं तब बच्चे भावनात्मक रूप से टूटने लगते हैं। उन्हें सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और प्रेमपूर्ण वातावरण देना जरूरी है।
कई बार माता-पिता या अभिभावक अपना क्रोध बच्चों पर निकालते हैं जो उनमें तनाव और हिंसा का रूप ले रही है। इस कारण बच्चे घरों से भाग रहे हैं या फिर गलत कदम तक उठा लेते हैं।
बाल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हवा सिंह ने बताया कि आज बच्चे तनाव में सबसे अधिक जा रहे हैं जिनमें 18 वर्ष से कम उम्र के शामिल हैं। इसमें बच्चा कई तरह से परेशान रहता है जैसे यदि बच्चे के साथ समाज में कुछ गलत हो रहा है तो वह अपने माता-पिता को बताने में डर रहा है। जिस कारण वह हिंसा का शिकार हो रहा है।