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शहर की प्रथम नागरिक मेयर के लिए नगर निगम भवन में कार्यालय तक नहीं, पुराने पुर आयुक्त ने जमाया डेरा

Sat, 22 Dec 2018 12:59 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 22 Dec 2018 12:59 AM IST
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शहर की प्रथम नागरिक मेयर के लिए नगर निगम भवन में कार्यालय तक नहीं, पुराने पुर आयुक्त ने जमाया डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। गत एक जुलाई से खत्म हुए पिछले नगर निगम हाउस के कार्यकाल के बाद से अधिकारियों ने अपनी मनमानी की। इतना ही नहीं अधिकारियों ने मनमर्जी से मेयर के लिए बनाए गए ऑफिस तक पर डेरा जमा लिया। हालांकि, अब चुनाव के बाद दूसरी बार रेणू बाला गुप्ता मेयर चुनी गईं हैं और 20 पार्षदों का हाउस कार्यभार संभालने को तैयार है। बावजूद इसके आज भी मेयर के ऑफिस पर आयुक्त कब्जा जमाए हुए हैं। इधर, सरकार की तरफ से मेयर और पार्षदों के लिए शपथ ग्रहण के बाद से कार्यालय शुरू हो जाएंगे, लेकिन निगम प्रशासन की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
बता दें कि नगर निगम का ऑफिस अभी डीएवी कालेज के सामने वर्किंग वूमेन हॉस्टल के भवन में चल रहा है। यहां पर राइट हैंड में निगम आयुक्त का ऑफिस था, जबकि लेफ्ट में मेयर के लिए। इसके साथ ही ईओ और सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए ऑफिस हैं। एक जुलाई के बाद कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेयर रेणू बाला ने सरकारी गाड़ी समेत ऑफिस छोड़ दिया था। इसके बाद निगम के अधिकारियों ने आनन-फानन में अपने-अपने कार्यालय बदल दिए। सबसे पहले निगम आयुक्त राजीव मेहता ने अपना कार्यालय छोड़कर मेयर के ऑफिस पर डेरा जमाया। फाइलों समेत अन्य तामझाम चेंज किया गया। इसके बाद निगम आयुक्त के कार्यालय में तत्कालीन ईओ धीरज कुमार से भी नहीं रहा गया और उन्होंने कार्यालय छोड़ आयुक्त कार्यालय ले लिया। ईओ के कार्यालय में अन्य अधिकारी बैठने लगे हैं। बता दें कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के बनाए गए ऑफिस अभी भी वैसे ही हैं और ये खाली हैं।
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दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है 33 करोड़ी निगम भवन
नगर निगम की ओर से सेक्टर-12 में निगम का नया भवन बनाया जा रहा है। इस पर करीब 33 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। हालांकि, पिछले दो साल से इसका निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अब भी अधूरा पड़ा है। कायदे से यह भवन जनवरी-2018 में कंप्लीट हो जाना चाहिए था। गौरतलब है कि निगम के नए भवन की 15 जनवरी, 2016 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शिलान्यास किया था। तब दावा किया गया था कि दो साल में दो मंजिला भवन बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन इसका केवल सिविल वर्क ही अभी तक पूरा हो पाया है। विभाग द्वारा लिए गए इसके सैंपलों में भी खामियां पाई हैं। ऐसे में कार्य बंद पड़ा है। इसको लेकर भी निगम के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
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इसके लिए जिम्मेदार कौन है...
नए हाउस के चयन के बाद अधिकारी कह रहे हैं कि वे मेयर के कार्यालय को खाली कर देंगे, लेकिन सवाल यह है कि आखिर जब कार्यालय छोड़ना ही था तो फिर चेंज क्यों किए गए थे। जब कार्यालय बदले गए थे तो तमाम तरह के फर्नीचर से लेकर स्टाफ तक और फाइलों को इधर-उधर करना पड़ा था। इसमें न केवल कर्मचारियों का समय खराब हुआ, बल्कि सामान इधर से उधर करने में निगम का पैसा खर्च हुआ अलग है। सवाल यह है कि इसके पीछे जिम्मेदार कौन है?

सुविधा के लिए किया बदलाव : डीएमसी धीरज
इस बारे में नगर निगम के डीएमसी धीरज कुमार ने कहा कि किसी भी अधिकारी ने किसी कार्यालय पर कब्जा नहीं जमाया है। उस समय कार्यालय खाली था, निगम की बेहतरी के लिए कार्यालय चेंज किए गए थे। नए मेयर और हाउस के कार्यभार संभालने से पहले ही उनके लिए कार्यालय तैयार कर लिया जाएगा। कार्यालय बदलने में किसी की भी मंशा गलत नहीं है।


कार्र्यकाल समापन के बाद मैंने अपनी सरकारी गाड़ी और ऑफिस छोड़ दिया था। एक बार फिर करनाल की जनता ने मुझे सेवा का मौका दिया है। मुझे ऑफिस चेंज करने के बारे में जानकारी नहीं है। अभी शपथ ग्रहण के बाद ही निगम कार्यालय जाऊंगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-रेणू बाला गुप्ता, मेयर।
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