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बाढ़ आई तो गांव और शहर डूबेंगे, ड्रेनों की नहीं हुई सफाई, पानी निकासी के नहीं पुख्ता प्रबंध

Sun, 29 Jul 2018 12:38 AM IST
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:38 AM IST
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बाढ़ आई तो गांव और शहर डूबेंगे, ड्रेनों की नहीं हुई सफाई, पानी निकासी के नहीं पुख्ता प्रबंध
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। एक तरफ यमुना अपने उफान पर है, अगर और बारिश हुई तो यमुना के साथ लगते गांवों में पानी घुसने की आशंका है। वहीं, गांवों की बात करें या फिर शहर की, प्रशासन निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं कर पाया है। असंध, निसिंग के कई गांवों के खेतों से पानी दो दिन बाद भी नहीं निकाला गया है, जबकि सुबह फिर से हुई 102 एमएम बारिश ने और परेशानी बढ़ा दी है। गांवों से लगातार सिंचाई विभाग के पास निकासी पंप की डिमांड आ रही है, हालांकि, विभाग जरूरत के हिसाब से पंप लगा रहा है, लेकिन डिमांड ज्यादा हो रही है, जबकि विभाग के पास सीमित मात्रा में निकासी पंप हैं। सबसे ज्यादा परेशानी निकासी को लेकर आ रही है, लेकिन ड्रेनों की प्रापर सफाई नहीं होने के कारण पानी निकल नहीं रहा है। बता दें पिछले तीन दिन से करनाल में बारिश जारी है। अब तक 200 एमएम से ज्यादा बारिश हो चुकी है। शनिवार सुबह तीन घंटे तक चली बारिश के कारण शहर समेत गांवों में पानी जमा हो गया। आईटीआई चौक, बस स्टैंड, ठंडी सड़क व सेक्टरों की सड़कों पर पानी भराव हो गया। हालांकि, शहर की सड़कों से दोपहर तक पानी निकल गया, वहीं जिले के कई गांवों में अब भी यही हालात हैं। खेतों में फसलें डूब चुकी हैं और किसान खेतों में फसल बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं, लेकिन पानी निकासी का रास्ता नहीं बन रहा है, क्योंकि ड्रेनों में घास व जलकुंभी खड़ी है, जिससे पानी आगे नहीं जा पा रहा है। इसके साथ ही इंद्री, घरौंडा, नीलोखेड़ी, तरावड़ी समेत अन्य कस्बों में अच्छी बारिश के कारण पानी जमा है।


निसिंग में पानी निकासी को सड़क तक काटने की नौबत
निसिंग। बीते दिनों से लगातार हो रही बरसात किसानों की फसलों के लिए आफत बन गई है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए सड़कों तक को काट रहे हैं। ऐसे हालात एक ही गांव में नहीं, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बने हुए हैं। सिंचाई विभाग की ओर से अभी तक पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। शुक्रवार रात्रि गुनियाणा से निसिंग की ओर आने वाली व गुनियाणा से गोंदर की ओर जाने वाली सड़क 33 केवीए के पास काट दी गई, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोग कई कई किलो मीटर तक घूमकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। कई गांवों में तो किसानों के पानी को लेकर आपसी झगड़े के आसार बने हुए है। गांव गुनियाणा, बस्तली, बरास, अमुपुर, माजरा, चकदा सिंघड़ा, बालू सहित अन्य गांवों के खेतों में बाढ़ जैसे हालत बन गए है। किसान गुनियाणा निवासी शाक्ति सिंह, सुशील कुमार, रामफल,बीरा राम, बाग्गा सिंह, सिंद्र सिंह, बीरा राम, महल सिंह, जसवीर, संजीव, जयकुमार, राजबीर बस्तली, सुभाष, व बलजीत सिंह सहित अन्य का कहना है कि गांव में अधिक पानी आने से किसानों की फसलें डूब गई है व आने जाने वाले रास्ते बंद हो गए है।
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असंध के गांवों में बाढ़ जैसे हालात, फसलें डूबीं
असंध। पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के कारण कस्बे के गांव सालवन में बाढ़ जैसे हालत बन गए हैं। इस कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। गांव सालवन में बरसात के पानी की निकासी न होने से सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो रही हैं। गांव के खेतों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। गांव के किसान जगबीर, रामबीर, शेरपाल, सतीश, राकेश, श्योपाल, रूप सिंह, हसनी, बबली, मोनू आदि ने कहा कि जिन लोगो को हलके की जनता ने वोट देकर चुनाव में विजय हासिल कराई आज वो ही लोग किसानों की अनदेखी कर रहे है। पशुपालकों ने कहा कि ड्रेन में जल कुंभी की मात्रा ज्यादा है, जिससे पानी भराव की स्थिति उत्पन्न हो गई और सारे एरिये में जल भराव हो गया। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने पशुओं के चारे की भी समस्या आ गई है। जिससे निपटने के लिए बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों के लिए यह बरसात आफत बनकर आई है जिसने सब कुछ तहस नहस कर दिया है। ड्रेनों की सफाई नहीं होने केे कारण ही आसपास के गांवों के खेतों से पानी निकासी नहीं हो पा रही है।
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यमुना के घाटों पर नहीं कोई प्रबंध
इंद्री। यमुना नदी पार करने वाले लोगों के लिए यमुना नदी पर बने घाट चौगावां, कलसौरा व नगली घाट के ठेकेदारों द्वारा यमुना नदी मं बाढ आने की आशंका पर भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। नाव पर प्रशिक्षित नाव चालक तक नहीं है। इतना ही नहीं यमुनापार करने वाले यात्रियों के लिए बचाव जाकेट व फस्टऐड बाक्स तक नहीं है। जब इस मामले में घाट संचालक एक ठेकेदार से बात की गई तो उसने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। जब इस मामले में बीडीपीओ अंग्रेज सिंह मोर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह सारी जिम्मेवारी घाट संचालक ठेकेदार की होती है।


निकासी पंप के लिए घड़घड़ा रहे फोन
सिंचाई विभाग की मैकेनिकल ब्रांच के पास गांवों से पानी निकासी को लेकर पंप लेने के लिए लगातार फोन बज रहे हैं। मेकेनिकल ब्रांच के एसई बीएस नारा ने बताया कि उनके अंतर्गत करनाल, पानीपत व जींद का इलाका आता है। करनाल में बिजली के पंप 24 व डीजल के 45 पंप हैं। मांग के अनुसार, पंप गांवों में भेजे जा रहे हैं। इस समय करीब दो दर्जनों गांवों में पानी निकासी को लेकर एक से लेकर दो पंप लगाए गए हैं। फिलहाल असंध व निसिंग के गांवों में पंप लगाए गए हैं, जबकि यमुना में आए ज्यादा पानी के चलते शेष को इंद्री के गांवों के लिए तैयार रखा गया है।
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