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डीएफएससी ने पेश किया शिकायतकर्ता का संतुष्टी पत्र, मंत्री ने फोन किया तो पीड़ित बोला, दबाव में करवाए हस्ताक्षर
Updated Thu, 26 Apr 2018 12:28 AM IST
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डीएफएससी ने पेश किया शिकायतकर्ता का संतुष्टी पत्र, मंत्री ने फोन किया तो पीड़ित बोला, दबाव और लालच में करवाए हस्ताक्षर
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। प्रदेश में अफसरशाही किस कद्र हावी है और किस प्रकार से वह शिकायत कर्ताओं पर दबाव बनाकर उन्हें कष्ट निवारण समिति की बैठक तक में नहीं पहुंचने देते। ऐसा ही एक मामला करनाल के पंचायत भवन में हुई जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में सामने आया। इसमें डीएफएससी विभाग के खिलाफ शिकायत देने वाले को बैठक में ही नहीं पहुंचने दिया। इतना ही नहीं विभाग के अधिकारियों ने शिकायत के जवाब में विभाग ने शिकायतकर्ता का संतुष्टि पत्र दरबार में पेश कर दिया। हालांकि, जब मंत्री नायब सैनी ने फोन पर शिकायतकर्ता से बात की तो मामला कुछ और ही नहीं निकला। पीड़ित ने बताया कि उस पर विभाग के अधिकारियों ने दबाव बनाया और लालच भी दिया कि उसे आगे से रुटीन में राशन मिलेगा। सरकार को भ्रमित करने के इस मामले से मंत्री खासे नाराज हुए और इस मामले की दोबारा से जांच के आदेश दिये। साथ ही ये भी कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को पंचायत भवन में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक हरियाणा के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में दस मामले रखे गए, जिनमें से मंत्री ने आठ के निपटारे का दावा किया। बैठक में एक खास मामला घरौंडा के मुलखराज का रहा। मुलखराज ने शिकायत दी थी कि उसे पिछले दो साल से डीएफएससी विभाग की ओर से राशन नहीं मिल रहा है। इस मामले की जब सुनवाई हुई तो बैठक में शिकायतकर्ता नहीं पहुंचा। शिकायत के जवाब में डीएफएससी कुशल बूरा ने बताया कि अब शिकायतकर्ता को किसी प्रकार की शिकायत नहीं है और वह संतुष्ट है, बकायदा उसने हमें संतुष्टि पत्र दिया है। मंत्री को मामले में गड़बड़ी लगी तो उन्होंने शिकायतकर्ता मुलखराज से फोन पर बात कराने को कहा। मंत्री ने जैसे ही मुलखराज से बात की तो उसने बताया कि उसने कोई संतुष्टि पत्र नहीं लिखा, खुद विभाग के अधिकारियों ने इसे लिखा है और उस पर दबाव बनाकर व आगे से राशन दे देंगे का लालच देकर हस्ताक्षर करा लिये। यह सुनते ही मंत्री ने इस मामले की जांच के निर्देश देते हुए कहा कि उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, जिसने यह जबरदस्ती यह संतुष्टी पत्र लिखवाया है।
शिकायतकर्ता का कार्ड एपीएल है : डीएफएससी
हमने इसकी जांच आईएसफ घरौंडा से कराई है। इसमें सामने आया कि शिकायतकर्ता का राशन कार्ड एपीएल है। जिस राशन का लाभ नहीं मिल सकता। शिकायतकर्ता ने शिकायत दी हुई थी कि उसे दो साल से राशन नहीं मिल रहा है, जब वह राशन के बारे में डिपो होल्डर मंगतराम से पूछने गया तो उसने बताया कि उसका राशन कार्ड कट चुका है।
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-कुशल बूरा, डीएफएससी।
अधिकारियों ने बैठक में आने से रोका : मुलखराज
अमर उजाला से बातचीत में शिकायतकर्ता मुलखराज ने बताया कि उस पर संतुष्टि पत्र पर साइन करने के लिए विभाग के अधिकारियों ने दबाव बनाया था, साथ ही उसे लालच दिया था कि उसे राशन दे दें और हर प्रकार से उसे संतुष्ट कर देंगे। फिलहाल न तो मुझे राशन मिला है और न ही कोई विभाग की तरफ से कोई जवाब। बैठक में पेश नहीं होने के सवाल पर मुलखराज ने कहा कि वह पेश होना चाहता था, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने उससे कहा कि आपकी जरूरत नहीं है, हम खुद ही पेश हो जाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। प्रदेश में अफसरशाही किस कद्र हावी है और किस प्रकार से वह शिकायत कर्ताओं पर दबाव बनाकर उन्हें कष्ट निवारण समिति की बैठक तक में नहीं पहुंचने देते। ऐसा ही एक मामला करनाल के पंचायत भवन में हुई जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में सामने आया। इसमें डीएफएससी विभाग के खिलाफ शिकायत देने वाले को बैठक में ही नहीं पहुंचने दिया। इतना ही नहीं विभाग के अधिकारियों ने शिकायत के जवाब में विभाग ने शिकायतकर्ता का संतुष्टि पत्र दरबार में पेश कर दिया। हालांकि, जब मंत्री नायब सैनी ने फोन पर शिकायतकर्ता से बात की तो मामला कुछ और ही नहीं निकला। पीड़ित ने बताया कि उस पर विभाग के अधिकारियों ने दबाव बनाया और लालच भी दिया कि उसे आगे से रुटीन में राशन मिलेगा। सरकार को भ्रमित करने के इस मामले से मंत्री खासे नाराज हुए और इस मामले की दोबारा से जांच के आदेश दिये। साथ ही ये भी कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को पंचायत भवन में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक हरियाणा के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में दस मामले रखे गए, जिनमें से मंत्री ने आठ के निपटारे का दावा किया। बैठक में एक खास मामला घरौंडा के मुलखराज का रहा। मुलखराज ने शिकायत दी थी कि उसे पिछले दो साल से डीएफएससी विभाग की ओर से राशन नहीं मिल रहा है। इस मामले की जब सुनवाई हुई तो बैठक में शिकायतकर्ता नहीं पहुंचा। शिकायत के जवाब में डीएफएससी कुशल बूरा ने बताया कि अब शिकायतकर्ता को किसी प्रकार की शिकायत नहीं है और वह संतुष्ट है, बकायदा उसने हमें संतुष्टि पत्र दिया है। मंत्री को मामले में गड़बड़ी लगी तो उन्होंने शिकायतकर्ता मुलखराज से फोन पर बात कराने को कहा। मंत्री ने जैसे ही मुलखराज से बात की तो उसने बताया कि उसने कोई संतुष्टि पत्र नहीं लिखा, खुद विभाग के अधिकारियों ने इसे लिखा है और उस पर दबाव बनाकर व आगे से राशन दे देंगे का लालच देकर हस्ताक्षर करा लिये। यह सुनते ही मंत्री ने इस मामले की जांच के निर्देश देते हुए कहा कि उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, जिसने यह जबरदस्ती यह संतुष्टी पत्र लिखवाया है।
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शिकायतकर्ता का कार्ड एपीएल है : डीएफएससी
हमने इसकी जांच आईएसफ घरौंडा से कराई है। इसमें सामने आया कि शिकायतकर्ता का राशन कार्ड एपीएल है। जिस राशन का लाभ नहीं मिल सकता। शिकायतकर्ता ने शिकायत दी हुई थी कि उसे दो साल से राशन नहीं मिल रहा है, जब वह राशन के बारे में डिपो होल्डर मंगतराम से पूछने गया तो उसने बताया कि उसका राशन कार्ड कट चुका है।
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अधिकारियों ने बैठक में आने से रोका : मुलखराज
अमर उजाला से बातचीत में शिकायतकर्ता मुलखराज ने बताया कि उस पर संतुष्टि पत्र पर साइन करने के लिए विभाग के अधिकारियों ने दबाव बनाया था, साथ ही उसे लालच दिया था कि उसे राशन दे दें और हर प्रकार से उसे संतुष्ट कर देंगे। फिलहाल न तो मुझे राशन मिला है और न ही कोई विभाग की तरफ से कोई जवाब। बैठक में पेश नहीं होने के सवाल पर मुलखराज ने कहा कि वह पेश होना चाहता था, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने उससे कहा कि आपकी जरूरत नहीं है, हम खुद ही पेश हो जाएंगे।