{"_id":"5ba53a6d867a557f59299ff9","slug":"201537555053-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वार्डबंदी को हाईकोर्ट में किया चैलेंज, बदल सकते हैं समीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वार्डबंदी को हाईकोर्ट में किया चैलेंज, बदल सकते हैं समीकरण
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। पहले दिन से ही विवादों में रही नगर निगम की वार्डबंदी सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। गांव कैलाश निवासी एडवोकेट प्रवीण कुमार ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका डाल कर इसको चैलेंज किया है। साथ ही सवाल किया कि वार्ड एक में इंदिरा कालोनी क्यों जोड़ी गई। यह कॉलोनी वार्ड का हिस्सा ही नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसा होने से बीसी से यह वार्ड एससी श्रेणी में आ गया। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रशासन याचिकाकर्ता को संतुष्ट करे। यदि ऐसा नहीं होता तो वह दोबारा अपील कर सकता है। ऐसे में अगर प्रशासन वार्डबंदी में कुछ दखल देता है तो कई वार्डों में उधल पुथल मच सकती है। एडवोकेट प्रवीन कुमार ने बताया कि वार्ड एक में गलत तरी से इंदिरा कॉलोनी को जोड़ दिया गया है, इससे उनका वार्ड बीसी से एससी के लिए आरक्षित हो गया है। एडवोकेट का कहना है कि अगर प्रशासन ने उनकी सुनवाई नहीं की तो वे दोबारा से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
विज्ञापन
करनाल। पहले दिन से ही विवादों में रही नगर निगम की वार्डबंदी सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। गांव कैलाश निवासी एडवोकेट प्रवीण कुमार ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका डाल कर इसको चैलेंज किया है। साथ ही सवाल किया कि वार्ड एक में इंदिरा कालोनी क्यों जोड़ी गई। यह कॉलोनी वार्ड का हिस्सा ही नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसा होने से बीसी से यह वार्ड एससी श्रेणी में आ गया। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रशासन याचिकाकर्ता को संतुष्ट करे। यदि ऐसा नहीं होता तो वह दोबारा अपील कर सकता है। ऐसे में अगर प्रशासन वार्डबंदी में कुछ दखल देता है तो कई वार्डों में उधल पुथल मच सकती है। एडवोकेट प्रवीन कुमार ने बताया कि वार्ड एक में गलत तरी से इंदिरा कॉलोनी को जोड़ दिया गया है, इससे उनका वार्ड बीसी से एससी के लिए आरक्षित हो गया है। एडवोकेट का कहना है कि अगर प्रशासन ने उनकी सुनवाई नहीं की तो वे दोबारा से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।