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डिप्रेशन से बढ़ रही आत्महत्याएं, समय पर पहचाना जाए तो इलाज संभव : डा.कश्यप
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:41 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस के संदर्भ में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल के आईपीडी ब्लॉक में संस्थान की जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के तौर पर संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप ने शिरकत की, जबकि अधिष्ठाता, डॉ. हिमांशु मदान और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगदीश दुरेजा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते हुए डिप्रेशन (अवसाद) के कारण आत्महत्या जैसी प्रवृति में इजाफा हुआ है और अगर इसके लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए और सही इलाज दिया जाए तो इसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय को अमूमन नजरंदाज किया जाता है और इस बारे में बातचीत करते हुए ज्यादातर लोग कतराते भी हैं, इसीलिए इस विषय पर खुलकर बातचीत होना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस कार्यक्रम के संयुक्त आयोजन के लिए मनोरोग विभाग और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की सराहना की। डॉ. दुरेजा ने कहा कि कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का मनोरोग विभाग इस समस्या के निराकरण के लिए कृतसंकल्प है और लोग खुद और अपने परिवारजनों या मित्रों में अगर आत्महत्या के लक्षणों को पहचान पाते हैं तो संस्थान में उचित इलाज और मार्गदर्शन हेतू सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. सविता चहल ने विस्तार पूर्वक आत्महत्या और डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में बात की, कैसे इन लक्षणों को आमजन पहचान सकते हैं, किस तरह से इस किस्म की मनोदशा के व्यक्तियों से बातचीत और व्यवहार करना चाहिए और कैसे व कहां इनके इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। मनोरोग विभाग के ही डॉ. मितेश ने इस मुद्दे से जुड़ी कई भ्रांतियों और अंधविश्वासों पर गहराई से चर्चा की और बताया कि कैसे आम जनता खुद को जागरूक बनाकर अपने आसपास के लोगों को आत्महत्या करने से रोक सकती हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई दैवीय बीमारी नहीं है और सही समय पर इलाज से उपचार संभव है। इस मौके पर क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट प्रियंका डांग और मनोरोग सोशल वर्कर प्रशांत श्रीवास्तव ने भी इस विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डॉ. रमणिका अग्रवाल, डॉ. मुनीष परूथी आदि उपस्थित रहे।
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देश में हर एक घंटे में 15 लोग करते हैं आत्महत्या
कम्युनिटी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर और जन स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश गर्ग ने आत्महत्या संबंधित अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आंकड़ों को बताते हुए कहा कि हिन्दुस्तान में हर एक घंटे में 15 व्यक्ति आत्महत्या करते हैं। विश्व के आत्महत्या से हुई मौतों में से कुल 17 प्रतिशत हिंदुस्तान में होती हैं। हरियाणा में आत्महत्या करने वालों की दर 11.9 व्यक्ति प्रति एक लाख जनसंख्या है जो की राष्ट्रीय औसत 10.6 व्यक्ति से ज्यादा है। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों से अनावश्यक उम्मीदें ना पालें और उनपर ज्यादा बोझ ना डालें। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को समझें, उन्हें उनकी रुचि और क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ने में मदद करें, ताकि वो तनाव और आत्महत्या जैसी बातों से दूर रहें।
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करनाल। विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस के संदर्भ में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल के आईपीडी ब्लॉक में संस्थान की जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के तौर पर संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप ने शिरकत की, जबकि अधिष्ठाता, डॉ. हिमांशु मदान और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगदीश दुरेजा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते हुए डिप्रेशन (अवसाद) के कारण आत्महत्या जैसी प्रवृति में इजाफा हुआ है और अगर इसके लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए और सही इलाज दिया जाए तो इसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय को अमूमन नजरंदाज किया जाता है और इस बारे में बातचीत करते हुए ज्यादातर लोग कतराते भी हैं, इसीलिए इस विषय पर खुलकर बातचीत होना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस कार्यक्रम के संयुक्त आयोजन के लिए मनोरोग विभाग और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की सराहना की। डॉ. दुरेजा ने कहा कि कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का मनोरोग विभाग इस समस्या के निराकरण के लिए कृतसंकल्प है और लोग खुद और अपने परिवारजनों या मित्रों में अगर आत्महत्या के लक्षणों को पहचान पाते हैं तो संस्थान में उचित इलाज और मार्गदर्शन हेतू सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
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मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. सविता चहल ने विस्तार पूर्वक आत्महत्या और डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में बात की, कैसे इन लक्षणों को आमजन पहचान सकते हैं, किस तरह से इस किस्म की मनोदशा के व्यक्तियों से बातचीत और व्यवहार करना चाहिए और कैसे व कहां इनके इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। मनोरोग विभाग के ही डॉ. मितेश ने इस मुद्दे से जुड़ी कई भ्रांतियों और अंधविश्वासों पर गहराई से चर्चा की और बताया कि कैसे आम जनता खुद को जागरूक बनाकर अपने आसपास के लोगों को आत्महत्या करने से रोक सकती हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई दैवीय बीमारी नहीं है और सही समय पर इलाज से उपचार संभव है। इस मौके पर क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट प्रियंका डांग और मनोरोग सोशल वर्कर प्रशांत श्रीवास्तव ने भी इस विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डॉ. रमणिका अग्रवाल, डॉ. मुनीष परूथी आदि उपस्थित रहे।
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देश में हर एक घंटे में 15 लोग करते हैं आत्महत्या
कम्युनिटी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर और जन स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश गर्ग ने आत्महत्या संबंधित अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आंकड़ों को बताते हुए कहा कि हिन्दुस्तान में हर एक घंटे में 15 व्यक्ति आत्महत्या करते हैं। विश्व के आत्महत्या से हुई मौतों में से कुल 17 प्रतिशत हिंदुस्तान में होती हैं। हरियाणा में आत्महत्या करने वालों की दर 11.9 व्यक्ति प्रति एक लाख जनसंख्या है जो की राष्ट्रीय औसत 10.6 व्यक्ति से ज्यादा है। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों से अनावश्यक उम्मीदें ना पालें और उनपर ज्यादा बोझ ना डालें। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को समझें, उन्हें उनकी रुचि और क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ने में मदद करें, ताकि वो तनाव और आत्महत्या जैसी बातों से दूर रहें।