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बराबरी की भाषा में बात करना सबसे मुश्किल कार्य है : राय

Fri, 18 Jan 2019 01:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jan 2019 01:02 AM IST
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बराबरी की भाषा में बात करना सबसे मुश्किल कार्य है : राय
अमर उजाला ब्यूरो
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घरौंडा (करनाल)। पुलिसकर्मियों में संवेदीकरण के माध्यम से मानसिकता में परिवर्तन लाने के लिए माने जाने वाले राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के पूर्व निदेशक वीएन राय ने कहा कि बराबरी की भाषा में बात करना सबसे मुश्किल कार्य है, क्योंकि इसके लिए परिवार में हमें तैयार नहीं किया जाता है।
राय वीरवार को हरियाणा पुलिस अकादमी में जेंडर सेंसीटाइजेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। वीएन राय ने कहा कि जेंडर कम्युनिकेशन समाज में एक बड़ा फासला है। जेंडर कम्युनिकेशन ऐसा कम्युनिकेशन है, जिसमें बराबरी के स्तर पर बात की जाती है, सामने वाले का आश्वस्त किया जाता है कि सब ठीक है। इसे करना इसलिए मुश्किल है कि परिवार में भी बराबरी की भाषा का अभाव होता है। इसे परखना है तो अपनी पत्नी या अपनी श्रद्धेय मां के साथ अपनी बातचीत पर ध्यान दें। आपको अंदर से चुभन होने लगेगी। इसमें आपका दोष नहीं है, हमें सिखाया ही नहीं जाता कि जेंडर कम्यूनिकेशन यानी बराबरी की भाषा में कैसे बात करें। उन्होंने कहा कि सही जेंडर कम्युनिकेशन को सीखा जा सकता है, इसके लिए व्यक्ति को सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा की यह एक चुनौती है।
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जो इसे मान लेंगे वे पाएंगे की वे जेंडर सेंसीटाइज व्यक्ति के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला के खिलाफ होने वाले मामलों में दोषी को सजा दिलवाने से ही पुलिस की भूमिका पूरी नहीं हो जाती। पुलिस की भूमिका सार्थक होगी यदि वह समाज में महिलाओं में सुरक्षा की भावना का अनुभव करा सकें। एक जेंडर सेंसीटाइज व्यक्ति बहुत सी विकलांगताओं से बच जाता है और वह अपने आप के लिए, अपने संगठन के लिए और समाज लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बनने में सफल होता है।
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जेंडर समाज ने पैदा किए हैं : राय
जेंडर की अवधाराणा से परिचित कराते हुए वीएन राय ने कहा कि कुदरत ने नर और मादा पैदा किए हैं लेकिन जेंडर समाज ने पैदा किया है। बहुत से मां-बाप ये कहते हुए सुने जा सकते हैं कि उन्होंने अपनी लड़की को लड़कों की तरह बढ़ा किया है परंतु क्या किसी लड़की को लड़की की तरह बढ़ा करने की बात सुनी है। इसी से पता चलता है कि वे आज भी लड़की को लड़के से कमतर मानते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि महिलाओं के प्रति होने वाली छोटी से छोटी घटना को सहानुभूतिपूर्वक सुनें और कार्यवाही करें। ऐसा करने से न केवल अपना कर्तव्य पूरा करेंगे बल्कि एक महिला को भी सशक्त बनाते हैं।
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