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अनिश्चिकालीन हड़ताल पर जिले के 510 लैब संचालक, 12 हजार से ज्यादा के नहीं हो सके टेस्ट

Wed, 06 Jun 2018 12:12 AM IST
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:12 AM IST
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अनिश्चिकालीन हड़ताल पर जिले के 510 लैब संचालक, 12 हजार से ज्यादा के नहीं हो सके टेस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। मांगें मनवाने के लिए लैब एसोसिएशन करनाल के आह्वान पर जिलेभर के 510 लैब संचालक मंगलवार सुबह से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। एसो सिएशन के सदस्य बुधवार को पंचकूला में प्रदेशभर के लैब संचालक धरना देकर मांग सरकार के सामने रखेंगे।
वहीं, हड़ताल के कारण पहले दिन ही मरीजों को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ा। ब्लड व यूरिन टेस्ट के लिए मरीज इधर-उधर भटकते रहे। हालांकि, कुछ अस्पतालों में स्थित लैब में जरूर टेस्ट हुए। इसके अलावा, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की लैब में अन्य दिनों की अपेक्षा दो गुणा मरीज पहुंचे और उनके सैंपल लिए गए।
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मंगलवार सुबह काफी संख्या में लैब संचालक लघु सचिवालय के सामने एकत्रित हुए और प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पूर्व विधायक सुमिता सिंह ने मौके पर पहुंचकर लैब एसोसिएशन के कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया और उनकी समस्याओं को सुना। अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर संघर्षरत लैब कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकार नारेबाजी कर रोष जताया। साथ ही लैब कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पूरी नहीं की जाती, तब तक वे हड़ताल पर डटे रहेंगे।
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लैब एसोसिएशन जिला प्रधान अंकुर शर्मा ने कर्मचारियों को कहा कि जब तक सरकार हमारा काम और हमारे हस्ताक्षर को अनुमति नहीं देगी, तब तक कोई भी लैब काम नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि 6 जून को समस्त हरियाणा के साथ पूरा करनाल के कर्मचारी जिला पंचकूला के सेक्टर-5 में धरना में शामिल होंगे और बुधवार से पूरे भारत में लैब कर्मचारियों के समर्थन में हड़ताल होगी।

एक्ट में संशोधन के खिलाफ हैं संचालक
जिला प्रधान अंकुर ने आगे कहा कि सरकार द्वारा करवाए गए कोर्स के मुताबिक, संबंधित काम करने पर जबरन रोक लगाई जा रही है। कार्पोरेट की शह पर अपने-अपने स्तर पर जीविका चलाने वाले एक बहुत बड़े वर्ग को उजाड़ने का काम किया जा रहा है। जांच संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं को साजिश के तहत बड़े घरानों को सौंपा जा रहा है और इससे इलाज बहुत ही महंगा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 1956 के बने पुराने कानून को बिना अमेंडमेंट किए साजिशन निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नये क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट की आड़ में स्वास्थ्य सेवाओं को जानबूझ कर खोखला किया जा रहा है, ताकि बड़े कार्पोरेट के लिए जमीन तैयार की जा सके। नये एक्ट के तहत लैब की रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर के हस्ताक्षर होने चाहिए, जबकि इस समय लैब संचालक के हस्ताक्षर ही मान्य हैं। प्रदर्शन में गौरव कुमार इंद्री, राजेश कुमार, अमित, वेदपाल, विनीत, अमित बत्रा, मोहित सिक्का आदि शामिल हुए।


मरीज रहे परेशान, सरकारी लैब कर्मियों ने भी दिया समर्थन
प्राइवेट लैब बंद होने के कारण मरीजों को टेस्ट के लिए धक्के खाने पड़े। राजकुमार, प्रियंका और बिमला देवी ने बताया कि उन्हें ब्लड चेक कराना था, लेकिन लैब बंद होने के कारण उन्हें मेडिकल कॉलेज जाना पड़ा, जहां भीड़ के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। उधर, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की लैब एसोसिएशन के प्रधान पदम सिंह ने भी निजी लैब संचालकों की हड़ताल का समर्थन किया है और मांग की है कि उनकी मांगों को पूरा किया जाए।
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