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वेस्ट ्े बना रही कंपोस्ट, घर में ही उगाई आर्गेनिक सब्जियां
Updated Tue, 16 Jan 2018 01:30 AM IST
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वेस्ट से बना रहीं बेस्ट : घर में तैयार हो रही कंपोस्ट खाद और आर्गेनिक सब्जियां
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
शहर की कई महिलाएं घरों से निकलने वाले वेस्ट यानि सब्जी-फलों के पत्ते-छिलके से कंपोस्ट खाद बनाकर ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार कर रही है। इस खाद को किचन गार्डन, गमलों और पौधों मेें डाल दी जाती है, जिससे पौष्टिकता से भरपूर ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार हो रही हैं।
सेक्टर-13 निवासी शशि पसरीचा पिछले 30 सालों से ऐसा कर रही हैं। सेना में ब्रिगेडियर पद से रिटायर डॉ. ओपी पसरीचा की पत्नी शशि पसरीचा ने बताया कि उसने घर के बैकसाइड में उपलब्ध स्पेस में तीन फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें हॉर्टीकल्चर वेस्ट को डालकर जब पहली बार कंपोस्ट बनाई तो वे वेस्ट को खाद में परिवर्तित देख हैरान भी थी और खुश भी। तैयार खाद को किचन गार्डन में ही डाल दिया। बस तब से लेकर अब तक यही काम कर रही हैं। पसरीचा ने बताया कि गड्ढे में हॉर्टिकल्चर, फल और सब्जियों के वेस्ट डालकर एक पतली मिट्टी की लेयर बनाकर और फिर उसके ऊपर इसी तरह का वेस्ट डालकर भर दिया जाता है और बीच-बीच में जरूरत अनुसार पानी भी डाला जाता है। इस प्रक्रिया से बस कुछ महीनों बाद एक बेहतर तैयार कंपोस्ट खाद प्राप्त होती है।
मनौती देवी घड़ों में बनाती हैं खाद
सेक्टर-13 के मकान नंबर-683 में मनौती देवी का कंपोस्ट खाद बनाने का तरीका ही अलग मिला। छत पर रखे दो बड़े घड़े, घर से निकले सब्जियों और फलों के वेस्ट से भरे दिखाई दिए। पूछने पर बताया कि घड़ों में पहले वेस्ट डाला जाता है, फिर कुछ मिट्टी और पानी डालकर उसे ढक दिया जाता है। कुछ समय बाद वेस्ट अपने-आप कंपोस्ट में परिवर्तित हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसा वह पिछले 15 सालों से कर रही हैं और यह तरीका उसने अपनी मां से सीखा था। मनौती देवी ने बताया कि तैयार खाद को वे अपने घर में लगे पौधों और गमलों में डालती रहती हैं, जो हरे-भरे और स्वस्थ रहते हैं। कंपोस्ट खाद बनाना कोई मुश्किल नहीं है, इसे कोई भी गृहणी बना सकती है।
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कमलेश कंपोस्ट बनाने को कर रही प्रेरित
‘चार चमन’ में रहने वाली कमलेश ने बताया कि वेस्ट से कंपोस्ट बनाने के लिए उसने टेलीविजन पर एक मोटिवेशनल कार्यक्रम देखा। अपने किचन गार्डन में इसका प्रयोग किया तो बड़ी खुशी हुई और कंपोस्ट तैयार करके उसे किचन गार्डन में डालकर देखा, तो सब्जियों का टेस्ट ही अलग था। कमलेश ने बताया कि उसके कंपोस्ट बनाने के तरीके से कई परिवार प्रेरित होकर ऐसा कर रही हैं।
महिलाओं में इस तरह के परिवर्तन को लेकर निगम आयुक्त डॉ. प्रियंका सोनी का कहना है कि कुछ भी हो महिलाओं में आई जागरूकता को लेकर यह बड़ा कदम है। वेस्ट डस्टबिन में न डालकर घर में ही यूज कर लिया जाता है और उससे मिलती है एक बेहतरीन खाद। जो व्यक्ति उपलब्ध स्पेस के अनुसार इसे बड़े स्तर पर करना चाहे, तो वे तैयार खाद को बेचकर उससे अपनी आय का साधन भी बना सकते हैं। इसमें कुछ खर्च भी नहीं होता।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
शहर की कई महिलाएं घरों से निकलने वाले वेस्ट यानि सब्जी-फलों के पत्ते-छिलके से कंपोस्ट खाद बनाकर ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार कर रही है। इस खाद को किचन गार्डन, गमलों और पौधों मेें डाल दी जाती है, जिससे पौष्टिकता से भरपूर ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार हो रही हैं।
सेक्टर-13 निवासी शशि पसरीचा पिछले 30 सालों से ऐसा कर रही हैं। सेना में ब्रिगेडियर पद से रिटायर डॉ. ओपी पसरीचा की पत्नी शशि पसरीचा ने बताया कि उसने घर के बैकसाइड में उपलब्ध स्पेस में तीन फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें हॉर्टीकल्चर वेस्ट को डालकर जब पहली बार कंपोस्ट बनाई तो वे वेस्ट को खाद में परिवर्तित देख हैरान भी थी और खुश भी। तैयार खाद को किचन गार्डन में ही डाल दिया। बस तब से लेकर अब तक यही काम कर रही हैं। पसरीचा ने बताया कि गड्ढे में हॉर्टिकल्चर, फल और सब्जियों के वेस्ट डालकर एक पतली मिट्टी की लेयर बनाकर और फिर उसके ऊपर इसी तरह का वेस्ट डालकर भर दिया जाता है और बीच-बीच में जरूरत अनुसार पानी भी डाला जाता है। इस प्रक्रिया से बस कुछ महीनों बाद एक बेहतर तैयार कंपोस्ट खाद प्राप्त होती है।
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मनौती देवी घड़ों में बनाती हैं खाद
सेक्टर-13 के मकान नंबर-683 में मनौती देवी का कंपोस्ट खाद बनाने का तरीका ही अलग मिला। छत पर रखे दो बड़े घड़े, घर से निकले सब्जियों और फलों के वेस्ट से भरे दिखाई दिए। पूछने पर बताया कि घड़ों में पहले वेस्ट डाला जाता है, फिर कुछ मिट्टी और पानी डालकर उसे ढक दिया जाता है। कुछ समय बाद वेस्ट अपने-आप कंपोस्ट में परिवर्तित हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसा वह पिछले 15 सालों से कर रही हैं और यह तरीका उसने अपनी मां से सीखा था। मनौती देवी ने बताया कि तैयार खाद को वे अपने घर में लगे पौधों और गमलों में डालती रहती हैं, जो हरे-भरे और स्वस्थ रहते हैं। कंपोस्ट खाद बनाना कोई मुश्किल नहीं है, इसे कोई भी गृहणी बना सकती है।
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कमलेश कंपोस्ट बनाने को कर रही प्रेरित
‘चार चमन’ में रहने वाली कमलेश ने बताया कि वेस्ट से कंपोस्ट बनाने के लिए उसने टेलीविजन पर एक मोटिवेशनल कार्यक्रम देखा। अपने किचन गार्डन में इसका प्रयोग किया तो बड़ी खुशी हुई और कंपोस्ट तैयार करके उसे किचन गार्डन में डालकर देखा, तो सब्जियों का टेस्ट ही अलग था। कमलेश ने बताया कि उसके कंपोस्ट बनाने के तरीके से कई परिवार प्रेरित होकर ऐसा कर रही हैं।
महिलाओं में इस तरह के परिवर्तन को लेकर निगम आयुक्त डॉ. प्रियंका सोनी का कहना है कि कुछ भी हो महिलाओं में आई जागरूकता को लेकर यह बड़ा कदम है। वेस्ट डस्टबिन में न डालकर घर में ही यूज कर लिया जाता है और उससे मिलती है एक बेहतरीन खाद। जो व्यक्ति उपलब्ध स्पेस के अनुसार इसे बड़े स्तर पर करना चाहे, तो वे तैयार खाद को बेचकर उससे अपनी आय का साधन भी बना सकते हैं। इसमें कुछ खर्च भी नहीं होता।