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एमआईएस पोर्टल खाली देख निदेशालय ने डीईईओ से मांगी रिपोर्ट, पूछा- क्यों नहीं हुए दाखिले?
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नियम 134ए के तहत प्राइवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी करते हुए बच्चों को दाखिले नहीं दिए हैं। इस पर अब निदेशालय भी सख्त हो गया है। निदेशालय ने एमआईएस पोर्टल पर बच्चों के दाखिले की जानकारी न मिलने पर डीईईओ राजपाल से इसकी रिपोर्ट मांगी है और पूछा कि कितने बच्चों के दाखिले हुए हैं? अगर दाखिले हो रहे हैं तो उनकी रिपोर्ट एमआईएस पोर्टल पर क्यों नहीं अपडेट की जा रही।
उधर, निदेशालय के संज्ञान के बाद से डीईईओ ने सभी बीईओ के माध्यम से प्राइवेट स्कूल संचालकों को बच्चों के दाखिलों की सूची पोर्टल पर जल्द अपडेट करने के निर्देश जारी किए हैं। ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दाखिले दिए होते तो पोर्टल पर करते अपडेट
उधर, अभिभावकों का आरोप है कि प्राइवेट स्कूलों ने बच्चों को नियम 134ए के तहत दाखिले दिए ही नहीं हैं। अगर दिए होते तभी तो एमआईएस पोर्टल पर दाखिलों की जानकारी अपडेट करते। एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि स्कूूूलों की मनमानी के कारण ही तो अभिभावक भटक रहे हैं। तरह-तरह के दस्तावेज मांगे गए। तो कभी सरकार से पैसा न मिलने का बहाना लगाया गया। निदेशालय ने भी सख्ती करने में देरी की है। अब रिपोर्ट मांगी गई है, तो बच्चों के दाखिले शुरू हुए हैं। लोगों की परेशानी में स्थानीय अधिकारी भी जिम्मेवार हैं।
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जिले में 3650 में से महज 962 के हुए दाखिले
30 अप्रैल को जारी हुए पहले ड्रॉ में करनाल जिले के छह खंडों में कुल 3650 बच्चों को स्कूल अलॉट हुए थे। लेकिन 22 मई तक महज 962 बच्चों के ही दाखिले हो पाए हैं। स्कूलों ने इन बच्चों के एडमिशन की जानकारी अब एमआईएस पोर्टल पर अपडेट की है। तो वहीं 274 बच्चों के दाखिले रिजेक्ट हो चुके हैं, जबकि 2414 बच्चों को अभी भी दाखिले का इंतजार है।
नियम 134ए के तहत कितने बच्चों के दाखिले हुए हैं। इसकी जानकारी स्कूलों को एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी है। इसके लिए निदेशालय से निर्देश आए हैं। सभी स्कूलों को भी पोर्टल पर जानकारी देने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। -राजपाल चौधरी, डीईईओ करनाल।
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करनाल। नियम 134ए के तहत प्राइवेट स्कूल संचालकों ने मनमानी करते हुए बच्चों को दाखिले नहीं दिए हैं। इस पर अब निदेशालय भी सख्त हो गया है। निदेशालय ने एमआईएस पोर्टल पर बच्चों के दाखिले की जानकारी न मिलने पर डीईईओ राजपाल से इसकी रिपोर्ट मांगी है और पूछा कि कितने बच्चों के दाखिले हुए हैं? अगर दाखिले हो रहे हैं तो उनकी रिपोर्ट एमआईएस पोर्टल पर क्यों नहीं अपडेट की जा रही।
उधर, निदेशालय के संज्ञान के बाद से डीईईओ ने सभी बीईओ के माध्यम से प्राइवेट स्कूल संचालकों को बच्चों के दाखिलों की सूची पोर्टल पर जल्द अपडेट करने के निर्देश जारी किए हैं। ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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दाखिले दिए होते तो पोर्टल पर करते अपडेट
उधर, अभिभावकों का आरोप है कि प्राइवेट स्कूलों ने बच्चों को नियम 134ए के तहत दाखिले दिए ही नहीं हैं। अगर दिए होते तभी तो एमआईएस पोर्टल पर दाखिलों की जानकारी अपडेट करते। एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि स्कूूूलों की मनमानी के कारण ही तो अभिभावक भटक रहे हैं। तरह-तरह के दस्तावेज मांगे गए। तो कभी सरकार से पैसा न मिलने का बहाना लगाया गया। निदेशालय ने भी सख्ती करने में देरी की है। अब रिपोर्ट मांगी गई है, तो बच्चों के दाखिले शुरू हुए हैं। लोगों की परेशानी में स्थानीय अधिकारी भी जिम्मेवार हैं।
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जिले में 3650 में से महज 962 के हुए दाखिले
30 अप्रैल को जारी हुए पहले ड्रॉ में करनाल जिले के छह खंडों में कुल 3650 बच्चों को स्कूल अलॉट हुए थे। लेकिन 22 मई तक महज 962 बच्चों के ही दाखिले हो पाए हैं। स्कूलों ने इन बच्चों के एडमिशन की जानकारी अब एमआईएस पोर्टल पर अपडेट की है। तो वहीं 274 बच्चों के दाखिले रिजेक्ट हो चुके हैं, जबकि 2414 बच्चों को अभी भी दाखिले का इंतजार है।
नियम 134ए के तहत कितने बच्चों के दाखिले हुए हैं। इसकी जानकारी स्कूलों को एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी है। इसके लिए निदेशालय से निर्देश आए हैं। सभी स्कूलों को भी पोर्टल पर जानकारी देने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। -राजपाल चौधरी, डीईईओ करनाल।