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पहाड़ों में बा रिश से यमुना में आया पानी, फ्लड बचाव के कार्य अभी भी जारी

Mon, 26 Jun 2017 10:55 PM IST
Updated Mon, 26 Jun 2017 10:55 PM IST
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पहाड़ों में बा रिश से यमुना में आया पानी, फ्लड बचाव के कार्य अभी भी जारी
पहाड़ों में बारिश से यमुना में आया पानी, फ्लड बचाव के कार्य अभी भी जारी
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अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा। यमुना में बाढ़ से बचाव के लिए गांव लालुपुरा के पास फ्लड वक्र्स शुरू का कार्य शुरू हो चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से यमुना में स्टड निर्माण व रिवेटमेंट का कार्य किया जायेगा। गांव लालुपुरा के ग्रामीणों ने का कहना है कि यमुना में पानी आना शुरू हो गया है, ऐसे में फ्लड वर्क्स देरी से शुरू किये गए हैं। जहां ग्रामीण कई स्थानों पर यमुना का तटबंध के जर्जर होने के आरोप लगा रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो पत्थरों की इंस्पेक्शन हो चुकी है जल्द ही स्टड निर्माण व तटबंध का कार्य शुरू हो जायेगा। प्री-मानसून की दस्तक के साथ ही यमुना में करीब पांच सौ क्यूसिक पानी छोड़ा जा चुका है। यमुना में पानी आने के बाद सरकार और सिंचाई विभाग ने बाढ़ से निपटने के लिए फ्लड वर्क्स भी शुरू कर दिया है। यमुना के तटबंध मजबूत करने व भूमि कटाव को रोकने के लिए स्टड के निर्माण के लिए पत्थर नदी किनारे पहुंच चुका है। करीब 1.65 करोड़ रुपये की लागत से गांव लालुपुरा के पास यमुना में स्टड का निर्माण व छह सौ फुट रिवेटमेंट का काम किया जाएगा। विभिन्न सरकारी महकमों के निरीक्षण के बाद आगामी चार पांच दिनों में पत्थरों के जरिये बाढ़ से बचाव का कार्य शुरू होगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ढाकवाला गांव के पास यमुना में स्टड बनाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में आई बाढ़ के दौरान हुए भूमि कटाव को देखते हुए अब लालुपुरा गांव के पास स्टड बनाया जायेगा। इसके इलावा, पानी के बहाव पर रोक लगाने के लिए नदी के तट पर करीब 600 फुट रिव्टिंग की जायेगी।
बाक्स
बाढ़ की आड़ में मोटी कमाई
सरकार की ओर से बाढ़ बचाव के लिए किये जा रहे कार्यों को यमुना तट पर बसे ग्रामीणों ने महज फोर्मेलटी करार दिया है। लालुपुरा गाँव के ग्रामीण अशोक कुमार, परमवीर व बलवान ने आरोप लगाया कि बाढ़ की आड़ में मोटी कमाई की जाती है। बाढ़ रोकने के नाम हर साल करोड़ों रुपये के पत्थर यमुना में बहा दिए जाते है। ग्रामीणों के मुताबिक, स्टड निर्माण और तटबंध का काम यमुना में पानी आने से पहले किया जाना था, लेकिन अब ऐन वक्त पर काम शुरू होगा। ऐसे में जहां से पानी भूमि का कटाव करेगा ठेकेदार के कर्मचारी इस पत्थर को पानी में बहा देंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकार यमुना में मजबूती से स्टड निर्माण का कार्य क्यों नहीं करती।
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इन गांवों को है बाढ़ का खतरा
यमुना के तटबंध जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में आस-पास बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण इस्तिकार, गयूर, इमराना, अशोक, परमवीर, बलवान व अन्य ने बताया कि वर्ष 2013 में आई बाढ़ ने लालुपुरा, सदरपुर, मुंडीगढ़ी और बल्हेडा में भयंकर तबाही मचाई थी। बाढ़ के कारण हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हुई थी और दर्जनों परिवार बाढ़ के कारण उजड़ गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के कारण यमुना का कड़ा कई स्थानों पर जर्जर हो चुका है। ऐसे में यदि इस बार उनके लिए खतरा बढ़ सकता है।
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यूपी ने की मजबूती, हरियाणा में खानापूर्ति
यमुना के दूसरे किनारे पर यूपी सरकार द्वारा किये गए पुख्ता प्रबंधों से हरियाणा की तरफ बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। किसानों के मुताबिक यूपी कीतरफ स्टड निर्माण व तटबंध का काम बेहद मजबूती से किया गया है, जबकि हरियाणा की तरफ महज खानापूर्ति की जा रही है। किसानों को डर है कि बाढ़ की स्थिति में यमुना का पानी यूपी की बजाए हरियाणा की तरफ ज्यादा असर दिखा सकता है। सिंचाई विभाग के अधिकारी खुद स्वीकार करते हैं कि उतर प्रदेश ने यमुना तट को लेकर तेजी से कार्य किया है, जबकि हरियाणा में कार्य शुरू होने में कुछ देरी हुई है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच डर बना हुआ है कि कहीं विभाग की देरी उन पर भारी न पड़ जाये। हालांकि, विभाग का दावा है कि मानसून से पहले यमुना में स्टड निर्माण व तटबंध का कार्य पूरा कर लिए जायेगा।बाक्स
बाढ़ बचाव के लिए हो चुका है कार्य शुरू : एसडीएम
एसडीएम वर्षा खांगवाल ने बताया कि मानसून को देखते हुए यमुना में बाढ़ से बचाव के कार्य शुरू हो चुके है। लालुपुरा गाँव के पास करीब 1.65 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण व रिवेटमेंट का कार्य शुरू हो चुका है। सिंचाई विभाग की टीम के साथ अन्य गांवों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।बाक्स

अलग होता है बजट
सिंचाई विभाग के एसडीओ महेंद्र अरोड़ा का कहना है कि फ्लड वर्क्स का बजट बिल्कुल अलग होता है। कभी-कभी डिपार्टमेंटल प्रोसेस की वजह से देरी हो जाती है। फिलहाल यमुना में पांच सौ क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। इस पानी से ज्यादा असर नहीं होगा और स्टड निर्माण का कार्य समय से पहले कर दिया जायेगा।----सोम
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