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Karnal News: स्टेशनों से 144 बाल सहायता केंद्र बंद, 10 हजार लोग बेरोजगार
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रेलवे स्टेशन पर बंद बाल सहायता केंद्र। संवाद
हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। देश के 144 रेलवे स्टेशनों पर खुले बाल सहायता केंद्रों पर ताला लग गया है। इस कारण इन केंद्रों पर तैनात 10 हजार से अधिक सदस्य बेरोजगार हो गए।
कई सालों तक चाइल्ड लाइन सदस्य के तौर पर कार्यरत कर्मचारियों को अब खाने के लाले पड़ गए हैं, क्योंकि महिला और बाल विकास और रेल मंत्रालय के सहयोग से जनहित फाउंडेशन के साथ किया समझौता 31 अगस्त को खत्म हो गया है। इसलिए रेलवे ने स्टेशनों पर खुले बाल सहायता केंद्रों को बंद करने का फैसला लिया है।
इसका असर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। यहां प्लेटफार्म एक पर खोले गए बाल सहायता केंद्र को बंद करने के निर्देश स्टेशन अधीक्षक की तरफ से मिल चुके हैं। वहीं चाइल्ड लाइन सदस्यों ने सामान को समेटना शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी यह बाल सहायता केंद्र देश के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बनाए गए थे जोकि आरपीएफ व जीआरपी को मिले बच्चों की भी सहायता करते थे।
ये सदस्य थे कार्यरत
लावारिस बच्चों की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करने वाले चाइल्ड टीम के सदस्य अब मानसिक तनाव में हैं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें कौन नौकरी देगा। ऐसे में अब लावारिस बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है कि उनकी देखभाल कौन करेगा।
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पांच साल में बचाए थे इतने बच्चे
अगस्त 2018 में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर बाल सहायता केंद्र खोला गया था। पांच साल के अंतराल में रेलवे चाइल्ड टीम के सदस्यों ने एक हजार से अधिक बच्चों को रेलवे स्टेशन और ट्रेनों से संरक्षण में लिया। इनमें से 990 बच्चे सुरक्षित परिजनों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं 10 के करीब बच्चे ओपन शेल्टर होम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अभी नहीं कोई भविष्य
31 अगस्त को टीम का कार्यकाल खत्म हो गया था। अब स्टेशन पर मिले कमरे को खाली कर रहे हैं। आगामी क्या कार्रवाई होगी, अभी इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। कोर्ट केस के कारण पुराने सदस्यों की भर्ती पर भी संशय बरकरार है। शायद अब राज्य की गठित टीम का वो हिस्सा हो सकते हैं। यह तो पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद सामने आ पाएगा।
नेहा, चाइल्ड टीम समन्वयक, स्टेशन।
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अंबाला। देश के 144 रेलवे स्टेशनों पर खुले बाल सहायता केंद्रों पर ताला लग गया है। इस कारण इन केंद्रों पर तैनात 10 हजार से अधिक सदस्य बेरोजगार हो गए।
कई सालों तक चाइल्ड लाइन सदस्य के तौर पर कार्यरत कर्मचारियों को अब खाने के लाले पड़ गए हैं, क्योंकि महिला और बाल विकास और रेल मंत्रालय के सहयोग से जनहित फाउंडेशन के साथ किया समझौता 31 अगस्त को खत्म हो गया है। इसलिए रेलवे ने स्टेशनों पर खुले बाल सहायता केंद्रों को बंद करने का फैसला लिया है।
इसका असर अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। यहां प्लेटफार्म एक पर खोले गए बाल सहायता केंद्र को बंद करने के निर्देश स्टेशन अधीक्षक की तरफ से मिल चुके हैं। वहीं चाइल्ड लाइन सदस्यों ने सामान को समेटना शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी यह बाल सहायता केंद्र देश के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बनाए गए थे जोकि आरपीएफ व जीआरपी को मिले बच्चों की भी सहायता करते थे।
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ये सदस्य थे कार्यरत
लावारिस बच्चों की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करने वाले चाइल्ड टीम के सदस्य अब मानसिक तनाव में हैं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें कौन नौकरी देगा। ऐसे में अब लावारिस बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है कि उनकी देखभाल कौन करेगा।
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पांच साल में बचाए थे इतने बच्चे
अगस्त 2018 में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर बाल सहायता केंद्र खोला गया था। पांच साल के अंतराल में रेलवे चाइल्ड टीम के सदस्यों ने एक हजार से अधिक बच्चों को रेलवे स्टेशन और ट्रेनों से संरक्षण में लिया। इनमें से 990 बच्चे सुरक्षित परिजनों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं 10 के करीब बच्चे ओपन शेल्टर होम में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अभी नहीं कोई भविष्य
31 अगस्त को टीम का कार्यकाल खत्म हो गया था। अब स्टेशन पर मिले कमरे को खाली कर रहे हैं। आगामी क्या कार्रवाई होगी, अभी इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। कोर्ट केस के कारण पुराने सदस्यों की भर्ती पर भी संशय बरकरार है। शायद अब राज्य की गठित टीम का वो हिस्सा हो सकते हैं। यह तो पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद सामने आ पाएगा।
नेहा, चाइल्ड टीम समन्वयक, स्टेशन।