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प्रदेश के उत्कृष्ट केंद्रों पर खोले जाएंगे 14 बागवानी विज्ञान केंद्र : कृषि मंत्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:59 AM IST
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14 Horticulture Science Centres will be opened at the Centres of Excellence in the state: Agriculture Minister
सीएसएसआईआर में आयोजित कार्यक्रम में  किसान एवं कृषि कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा को सम्मानित क
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। किसान एवं कृषि कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश के किसान फसल विविधीकरण अपनाकर बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदेश करीब 4 लाख 18 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलों का उत्पादन कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के फल एवं सब्जी के उत्कृष्ट केंद्रों पर 14 बागवानी विज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
वहीं, मंत्री ने कहा कि प्रदेश में हुए धान घोटाले में किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ जबकि घोटाले में लिप्त लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। वे वीरवार को सीएसएसआईआर में बागवानी अधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे।
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मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 में राज्य में फलों के अंतर्गत 73153 और सब्जियों के अंतर्गत 334281 हेक्टेयर क्षेत्रफल था। इस अवधि में सब्जियों का उत्पादन 5856938 मीट्रिक रहा। आलू उत्पादन में कुरुक्षेत्र जिला सबसे आगे है। फूलों की फसल के अंतर्गत क्षेत्रफल 1584 हेक्टेयर है जिसमें मुख्य रूप से गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब, गुलदाउदी, ग्लाडिओलस की खेती की जाती है। गुरुग्राम में गेंदे का क्षेत्रफल सबसे अधिक है लेकिन उत्पादन में सोनीपत जिला अग्रणी है। राज्य के किसान औषधीय व मसाला फसलों की ओर भी अग्रसर हैं। इस दौरान कृषि मंत्री ने बागवानी पत्रिका, वार्षिक केलेंडरी और विभाग के योजनाओं से संबंधित तीन ब्रोशर का विमोचन भी किया। प्रदेश सरकार ने 24 फसलों के लिए एमएसपी घोषित किया है। किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए भावांतर योजना शुरू कर रखी है।
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बागवानी उत्पादों की खपत अधिक
कृषि मंत्री ने कहा कि दिल्ली के तीन ओर हरियाणा की सीमाएं लगती हैं। इसी कारण यहां बागवानी उत्पादों की खपत अधिक है और कीमत भी अच्छी मिलती है। लेकिन विकास के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। कृषि विश्वविद्यालय मुख्य रूप से खाद्यान्न फसलों पर केंद्रित रहे हैं जबकि बागवानी में फल-सब्जियों, फूल, मसाले, मशरूम, औषधीय पौधों के लिए अलग-अलग वैज्ञानिक समाधान चाहिए। बागवानी फसलों से पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक आय होती है। राज्य में बागवानी वैज्ञानिकों, नर्सरी मैनेजरों, पोस्ट-हार्वेस्ट विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। माइक्रो-सिंचाई व संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए शोध एवं तकनीकी मार्गदर्शन जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय और प्रदेश के बागवानी अधिकारियों के उचित तालमेल और साझे प्रयासों से प्रदेश में फसल विविधीकरण की गति तेज होगी। मौके पर महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय के कुलपति एसके मल्होत्रा, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान के निदेशक डाॅ. राजवीर गर्ग मौजूद रहे।
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