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ये सीएम सिटी है, थाना प्रभारी की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं, अधिकारियों के पास नहीं कोई जवाब
Updated Wed, 14 Feb 2018 10:44 PM IST
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ये सीएम सिटी है, थाना प्रभारी की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं, अधिकारियों के पास नहीं कोई जवाब
-एसपी बोले, जांच डीएसपी को सौंपी, डीएसपी के पास कोई जवाब नहीं, मुंह खोलने से बच रहे
-पुलिस विभाग में मामले को लेकर चर्चा, शहर में पुलिस की हो रही किरकिरी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी और स्मार्ट पुलिस का दावा। मित्र कक्ष तक खोले गए, लोगों को न्याय दिलाने के लिए। सच्चाई ये है कि यहां पर आम जनता तो क्या यहां खुद थाना प्रभारी अपने थाने में सुरक्षित नहीं है और वो भी पुलिस से ही। इससे भी बड़ी बात ये है कि हंगामा, मारपीट और गाड़ी तोड़ने के मामले में बाकायदा शिकायत देने पर भी दो दिन बीतने पर भी कोई कार्रवाई नहीं। ऐसे में पुलिस के आला अधिकारियों पर सवाल तो उठेंगे ही? इस मामले में एसपी जेएस रंधावा कह रहे हैं कि जांच डीएसपी राजीव कुमार को सौंप दी है, जबकि डीएसपी बिना जांच के ही मामले को ही नकार रहे हैं। दो दिन होने के बाद भी मीडिया द्वारा फोन करने पर भी उनके पास कोई जवाब नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस मामले को जांच के नाम पर दबाया जा रहा है या फिर समझौते की तरफ बढ़ाया जा रहा है।
बता दें कि सोमवार रात को गैंगरेप के प्रयास से जुड़े एक मामले में मधुबन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव और सदर थाना प्रभारी मनोज कुमार की फोन पर कहासुनी हो गई। मनचाहे जांच अधिकारी को केस नहीं देने पर इंस्पेक्टर राजीव सदर थाने पहुंच गया और सरेआम थाने के अंदर ही थाना प्रभारी का गिरेबान पकड़ लिया और जमकर गाली गलौच किया। इतना ही नहीं इंस्पेक्टर ने थाना प्रभारी की गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम का पूरा थाना प्रत्यक्षदर्शी रहा और बाहर से जाने वाले राहगीर भी। हंगामा काटने के बाद आखिरकार पुलिस कर्मचारियों ने इंस्पेक्टर राजीव को काबू किया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी एसपी जेएस रंधावा व डीएसपी राजीव कुमार को दी गई। देर रात ही इस मामले की थाना सिविल लाइन में रपट लिखी गई। हालांकि, शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन घर का मामला होने के कारण पुलिस ने केवल खानापूर्ति करते हुए मामले में रपट दर्ज कर ली। अब मामले को दो दिन बीत चुके हैं, खुद मधुबन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार ऐसी किसी भी घटना से इंकार कर चुके हैं और डीएसपी राजीव भी। अब सवाल यह है कि जब दोनों अधिकारी कह रहे हैं तो सदर थाना प्रभारी ने शिकायत क्यों दी? शिकायत के बाद एसपी ने मामले की जांच डीएसपी को क्यों सौंपी? ऐसे कई सवाल हैं जो शहरवासी जानना चाहते हैं कि आखिरकार इस मामले की सच्चाई क्या है और दोषी कौन है?
डीएसपी को सौंपी जांच : एसपी
इस बारे में एसपी जेएस रंधावा ने बताया कि शिकायत आई थी, इसकी जांच डीएसपी करनाल को सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। बिना जांच के कोई फैसला लेना जल्दबाजी होगा। उधर, जब डीएसपी राजीव कुमार को फोन किये गए तो पहले तो उन्होंने कई फोन करने पर भी फोन नहीं उठाया, बाद में उनके गनमैन ने फोन उठाया और बताया कि साहब सीएम ड्यूटी पर हैं।
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ऐसा क्या है भूसली विवाद में
अब सबसे बड़ा मामला ये है कि आखिरकार गांव भूषली में महिला के साथ गैंगरेप के प्रयास के मामले में ऐसा क्या है, कि मधुबन थाना प्रभारी इतना आवेश में आ गया कि वो सदर थाना प्रभारी के साथ ही मारपीट करने लगा? बता दें कि इस मामले में पीड़ित महिला मधुबन पुलिस पर पहले दिन से सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाती रही हैं। मधुबन पुलिस द्वारा महिलाओं की सुनवाई नहीं करने पर आखिरकार महिला आयोग की सदस्य करनाल पहुंची और मामले की आईओ के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये थे। अब जांच का विषय ये भी है कि आखिर इस मामले में थाना प्रभारी इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं?।
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-एसपी बोले, जांच डीएसपी को सौंपी, डीएसपी के पास कोई जवाब नहीं, मुंह खोलने से बच रहे
-पुलिस विभाग में मामले को लेकर चर्चा, शहर में पुलिस की हो रही किरकिरी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी और स्मार्ट पुलिस का दावा। मित्र कक्ष तक खोले गए, लोगों को न्याय दिलाने के लिए। सच्चाई ये है कि यहां पर आम जनता तो क्या यहां खुद थाना प्रभारी अपने थाने में सुरक्षित नहीं है और वो भी पुलिस से ही। इससे भी बड़ी बात ये है कि हंगामा, मारपीट और गाड़ी तोड़ने के मामले में बाकायदा शिकायत देने पर भी दो दिन बीतने पर भी कोई कार्रवाई नहीं। ऐसे में पुलिस के आला अधिकारियों पर सवाल तो उठेंगे ही? इस मामले में एसपी जेएस रंधावा कह रहे हैं कि जांच डीएसपी राजीव कुमार को सौंप दी है, जबकि डीएसपी बिना जांच के ही मामले को ही नकार रहे हैं। दो दिन होने के बाद भी मीडिया द्वारा फोन करने पर भी उनके पास कोई जवाब नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस मामले को जांच के नाम पर दबाया जा रहा है या फिर समझौते की तरफ बढ़ाया जा रहा है।
बता दें कि सोमवार रात को गैंगरेप के प्रयास से जुड़े एक मामले में मधुबन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव और सदर थाना प्रभारी मनोज कुमार की फोन पर कहासुनी हो गई। मनचाहे जांच अधिकारी को केस नहीं देने पर इंस्पेक्टर राजीव सदर थाने पहुंच गया और सरेआम थाने के अंदर ही थाना प्रभारी का गिरेबान पकड़ लिया और जमकर गाली गलौच किया। इतना ही नहीं इंस्पेक्टर ने थाना प्रभारी की गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम का पूरा थाना प्रत्यक्षदर्शी रहा और बाहर से जाने वाले राहगीर भी। हंगामा काटने के बाद आखिरकार पुलिस कर्मचारियों ने इंस्पेक्टर राजीव को काबू किया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी एसपी जेएस रंधावा व डीएसपी राजीव कुमार को दी गई। देर रात ही इस मामले की थाना सिविल लाइन में रपट लिखी गई। हालांकि, शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन घर का मामला होने के कारण पुलिस ने केवल खानापूर्ति करते हुए मामले में रपट दर्ज कर ली। अब मामले को दो दिन बीत चुके हैं, खुद मधुबन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार ऐसी किसी भी घटना से इंकार कर चुके हैं और डीएसपी राजीव भी। अब सवाल यह है कि जब दोनों अधिकारी कह रहे हैं तो सदर थाना प्रभारी ने शिकायत क्यों दी? शिकायत के बाद एसपी ने मामले की जांच डीएसपी को क्यों सौंपी? ऐसे कई सवाल हैं जो शहरवासी जानना चाहते हैं कि आखिरकार इस मामले की सच्चाई क्या है और दोषी कौन है?
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डीएसपी को सौंपी जांच : एसपी
इस बारे में एसपी जेएस रंधावा ने बताया कि शिकायत आई थी, इसकी जांच डीएसपी करनाल को सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। बिना जांच के कोई फैसला लेना जल्दबाजी होगा। उधर, जब डीएसपी राजीव कुमार को फोन किये गए तो पहले तो उन्होंने कई फोन करने पर भी फोन नहीं उठाया, बाद में उनके गनमैन ने फोन उठाया और बताया कि साहब सीएम ड्यूटी पर हैं।
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ऐसा क्या है भूसली विवाद में
अब सबसे बड़ा मामला ये है कि आखिरकार गांव भूषली में महिला के साथ गैंगरेप के प्रयास के मामले में ऐसा क्या है, कि मधुबन थाना प्रभारी इतना आवेश में आ गया कि वो सदर थाना प्रभारी के साथ ही मारपीट करने लगा? बता दें कि इस मामले में पीड़ित महिला मधुबन पुलिस पर पहले दिन से सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाती रही हैं। मधुबन पुलिस द्वारा महिलाओं की सुनवाई नहीं करने पर आखिरकार महिला आयोग की सदस्य करनाल पहुंची और मामले की आईओ के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिये थे। अब जांच का विषय ये भी है कि आखिर इस मामले में थाना प्रभारी इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं?।