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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का जिले में नहीं रहा कोई खास असर
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:00 AM IST
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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का जिले में नहीं रहा कोई खास असर
फोटो संख्या-2
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट की द्वारा की गई हड़ताल का पहले दिन जिले में कोई खास असर नहीं रहा। इस हड़ताल में छोटे ट्रांसपोर्टरों ने भी समर्थन दिया हुआ है। इस कारण कुछ ही ट्रकों की पहिये थमे दिखाई दिए। आने वाले दो दिनों तक अगर यह हड़ताल जारी रही तो यह सरकार व आम लोगों के लिए एक चिंता का विषय बन सकती है।इस हड़ताल से सब्जियों से लेकर फल व अन्य सामग्री लोगों तक नहीं पहुंच पाएगी। इस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ट्रक यूनियन के प्रधान नरेंद्र सिंह ने बताया कि 60 प्रतिशत डीजल खर्च होता है व 22 प्रतिशत ट्रकों पर टोल टैक्स पर खर्च हो जाता है। इस कारण ट्रांसपोर्टर घाटे में जा रहा है। उन्होंने मांग की कि डीजल की कीमतें कम की जाए ओर राष्ट्रीय स्तर पर सामान मूल्य निर्धारित किया जाए। पूरे भारत को टोल टैक्स मुक्त किया जाए। टीपीपी निर्धारण में पारदर्शिता, जीएसटी में छूट, कॉम्प्रेहेंसिवे पालिसी के माध्यम से एजेंटों को भुगतान किए जा रहे अतिरिक्त कमीशन को समाप्त किया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट की द्वारा की गई हड़ताल का पहले दिन जिले में कोई खास असर नहीं रहा। इस हड़ताल में छोटे ट्रांसपोर्टरों ने भी समर्थन दिया हुआ है। इस कारण कुछ ही ट्रकों की पहिये थमे दिखाई दिए। आने वाले दो दिनों तक अगर यह हड़ताल जारी रही तो यह सरकार व आम लोगों के लिए एक चिंता का विषय बन सकती है।इस हड़ताल से सब्जियों से लेकर फल व अन्य सामग्री लोगों तक नहीं पहुंच पाएगी। इस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ट्रक यूनियन के प्रधान नरेंद्र सिंह ने बताया कि 60 प्रतिशत डीजल खर्च होता है व 22 प्रतिशत ट्रकों पर टोल टैक्स पर खर्च हो जाता है। इस कारण ट्रांसपोर्टर घाटे में जा रहा है। उन्होंने मांग की कि डीजल की कीमतें कम की जाए ओर राष्ट्रीय स्तर पर सामान मूल्य निर्धारित किया जाए। पूरे भारत को टोल टैक्स मुक्त किया जाए। टीपीपी निर्धारण में पारदर्शिता, जीएसटी में छूट, कॉम्प्रेहेंसिवे पालिसी के माध्यम से एजेंटों को भुगतान किए जा रहे अतिरिक्त कमीशन को समाप्त किया जाए।