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चेले ने बाबा की गर्दन में कैंचीनुमा हथियार किया आरपार, इलाज के लिए 5 घंटे करता रहा इंतजार

Sat, 12 Aug 2017 11:20 PM IST
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:20 PM IST
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चेले ने बाबा की गर्दन में कैंचीनुमा हथियार किया आरपार, इलाज के लिए 5 घंटे करता रहा इंतजार
चेले ने बाबा की गर्दन में कैंचीनुमा हथियार किया आरपार , इलाज के लिए 5 घंटे करता रहा इंतजार
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। यूपी के सीएम के गृह क्षेत्र गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन समाप्त होने के बाद जहां पूरे देश में सनसनी फैली हुई है, वहीं हरियाणा के सीएम मनोहर लाल के विधानसभा क्षेत्र के मेडिकल कालेज के हालात भी अच्छे नहीं हैं। यहां पर एक बाबा की गर्दन के आरपास किए गए नुकेले हथियार को निकालने के लिए बाबा को पांच घंटे तक का इंतजार करना पड़ा, इतना ही नहीं उसको चेकअप के नाम पर कभी नए भवन को तो कभी पुराने भवन में भेजा गया। आखिरकार 10 घंटे बाद बाबा ऑपरेशन हो सका और हथियार को बाहर निकाला गया। फिलहाल बाबा की हालत में सुधार है। उधर, मेडिकल कालेज के द्वारा बरती गई लापरवाही ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि यहां पर जिंदगी का कोई मोल नहीं है।
जानकारी के मुताबिक बाबा आत्मनाथ गिरी जनकपुरी के एक अखाड़े में रह रहा है और वहीं पूूजा पाठ करता है। सुबह जब बाबा उठा तो उसके एक चेले ने बाबा पर कैंचीनुमा नुकीले हथियार से हमला बोल दिया और हथियार बाबा के गर्दन के आरपार कर दिया। बाबा की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और बाबा को इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेेंटर में लेकर पहुंचेे। बाबा सुबह 6 बजे मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर पहुंच गया था, लेकिन 11 बजे तक वह इलाज के लिए इधर-उधर भटकता रहा। डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार तक भी नहीं दिया। जब इस मामले को मीडिया ने उठाया तो करीब 11 बजे सिटी थाना पुलिस अस्पताल में पहुंची और बाबा के ब्यान दर्ज कर उसका इलाज शुरू करवाया। शाम को चार बजे डॉक्टरों की टीम ने बाबा आत्मानाथ पूरी का ऑपरेशन शुरू किया, जोकि डेढ़ घंटे तक चला। शाम को करीब साढ़े पांच बजे बाबा की गर्दन से कैंचीनुमा हथियार को ऑपरेशन द्वारा निकाला गया और बाबा को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। फिलहाल बाबा की हालात ठीक है। पुलिस जांच अधिकारी गुरुपाल ने बताया कि मामले में आरोपी चेले के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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इलाज के लिए बाबा पैदल लगाता रहा चक्कर, नहीं मिला स्ट्रेचर
सुबह छह बजे से इलाज के लिए अस्पताल में पहुंचा बाबा आत्मानाथ पुरी 11 बजे तक तो अस्पताल में इधर उधर पैदल ही चक्कर लगाता रहा। बाद में 11 बजे जब इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई तो बाबा को स्ट्रेचर भी नहीं मिला। बाबा को एक्सरे करवाने के लिए ट्रामा सेंटर से करीब 600 मीटर की दूरी पर पुरानी बिल्डिंग में एक्सरे और सीटी स्केन करवाने के लिए पैदल ही जाना पड़ा। क्योंकि ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचरों की बहुत कमी है। इस कारण गंभीर रूप से घायल अधिकतर मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ही ट्रामा सेंटर में पहुंचाते है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज में देरी के कारण मौत भी हो जाती है।
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हथियार निकालने में लगा 11 घंटे का समय
बाबा सुबह 6 बजे मेडिकल कॉलेज में आया था। 11 बजे तक तो बाबा को एक गोली भी नहीं दी गई। इसके बाद इलाज शुरू हुआ और बाबा का एक्सरे और सीटी स्केन करवाया गया। सीटी स्केन की रिपोर्ट आने तक बाबा ऐसे ही दर्द से तड़पता रहा।
मेडिकल कॉलेज के पास भी नहीं स्थायी ऑक्सीजन सप्लाई कंपनी, पक्का टेंडर देना बाकी
गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से हुई 30 मासूमों सहित 48 लोगों की मौत को लेकर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी दिनभर हड़कंप मचा रहा। बार-बार कॉलेज प्रबंधन सदस्य ऑक्सीजन और टैंक को जांचते रहे। ताकि यहां इस प्रकार की कोई भी दिक्कत न आए। बता दें कि मेडिकल कॉलेज के पास ऑक्सीजन के लिए कोई स्थायी प्रबंध नहीं है। फिलहाल एक लॉकल कंपनी के सहारे ऑक्सीजन का काम चलाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक है। जिसका संचालन एक लोकल कंपनी कर रही है। फिलहाल प्रबंधन इसका स्थायी ठेका देगा।

बाबा की गर्दन में कैंचीनुमा हथियार आरपार था। गर्दन में खाने और सांस लेने की अलग-अलग नलियों होती है और इसी के साथ रीढ़ की हड्डी भी होती है। गर्दन से हथियार को लेकर बहुत सर्तकता से ऑपरेशन किया जाता है, क्योंकि अलग-अलग नलियों में अगर थोड़ा सा भी कुछ लग जाए तो मरीज की जान जा सकती है और रीढ़ की हड्डी होने के कारण विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए बाबा के इलाज में काफी समय लगा। साढेेे़ पांच बजे बाबा की गर्दन से हथियार निकाल दिया गया था और अब बाबा स्वस्थ है।
-डॉ. जगदीश दुरेजा
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल
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