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खाना खाते समय निगल लिया नकली जबड़ा, सांस ना आने पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बचाई जान
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने आधे घंटे में ऑपरेशन कर एक व्यक्ति की जान बचाई है। मेडिकल कॉलेज के डीएमएस डॉ. गुलशन ने बताया कि गांव रांवर निवसी 35 वर्षीय सज्जन के तीन दांत टूटे हुए थे उसने नकली दांत बनवाये हुए थे। तीन जनवरी को जब वह खाना खा रहा था तो खाना खाते समय वह जबड़ा उसके गले में फंस गया और उसे सांस आना बंद हो गई। इसके बाद वह तुरंत मेडिकल कॉलेज में पहुंचा। ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. अशोक ने बताया कि जब सज्जन उनके पास आया था तो उसे सांस नहीं आ रही थी। ओपीडी में ही उन्होंने दूरबीन से उसके गले में देखा तो दांत दिखाई दिए। उन्होंने सज्जन को तुरंत ऑपरेशन थियेटर में दाखिल कराया। इसके बाद उसके गले में पाइप डालकर उसे सांस दी गई। इसके बाद उनकी टीम डॉ. अशोक, डॉ. विकास ढिल्लो व डॉ. रितेश ने सज्जन के गले से वह नकली दांत निकाले। इसे बाद ऑपरेशन थियेटर में जो उपकरण थे उनकी सहायता से उसके गले से आधे घंटे में वह जबड़ा निकाला गया। जो तीन दांतों का था। अब सज्जन की तबीयत ठीक है।
फिक्स जबड़ा ही लगवाएं
ईएनटी विभाग के इंचार्ज डॉ. अशोक ने बताया कि दांत टूट जाने पर व्यक्ति फिक्स जबड़ा लगाने के बजाये उतारने वाला जबड़ा लगवा लेते हैं, जिस कारण अक्सर खाना खाते समय यह जबड़ा उतर जाता है। इस लिए फिक्स जबड़ा ही लगवाएं।
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने आधे घंटे में ऑपरेशन कर एक व्यक्ति की जान बचाई है। मेडिकल कॉलेज के डीएमएस डॉ. गुलशन ने बताया कि गांव रांवर निवसी 35 वर्षीय सज्जन के तीन दांत टूटे हुए थे उसने नकली दांत बनवाये हुए थे। तीन जनवरी को जब वह खाना खा रहा था तो खाना खाते समय वह जबड़ा उसके गले में फंस गया और उसे सांस आना बंद हो गई। इसके बाद वह तुरंत मेडिकल कॉलेज में पहुंचा। ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. अशोक ने बताया कि जब सज्जन उनके पास आया था तो उसे सांस नहीं आ रही थी। ओपीडी में ही उन्होंने दूरबीन से उसके गले में देखा तो दांत दिखाई दिए। उन्होंने सज्जन को तुरंत ऑपरेशन थियेटर में दाखिल कराया। इसके बाद उसके गले में पाइप डालकर उसे सांस दी गई। इसके बाद उनकी टीम डॉ. अशोक, डॉ. विकास ढिल्लो व डॉ. रितेश ने सज्जन के गले से वह नकली दांत निकाले। इसे बाद ऑपरेशन थियेटर में जो उपकरण थे उनकी सहायता से उसके गले से आधे घंटे में वह जबड़ा निकाला गया। जो तीन दांतों का था। अब सज्जन की तबीयत ठीक है।
फिक्स जबड़ा ही लगवाएं
ईएनटी विभाग के इंचार्ज डॉ. अशोक ने बताया कि दांत टूट जाने पर व्यक्ति फिक्स जबड़ा लगाने के बजाये उतारने वाला जबड़ा लगवा लेते हैं, जिस कारण अक्सर खाना खाते समय यह जबड़ा उतर जाता है। इस लिए फिक्स जबड़ा ही लगवाएं।
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