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सम्मान समारोह में रोते हुए बोली शहीद की मां, मेरी आत्मा रोती है, जब मैं बेटे के स्मारक पर गंदगी देखती हूं

Tue, 13 Mar 2018 11:45 PM IST
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:45 PM IST
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सम्मान समारोह में रोते हुए बोली शहीद की मां, मेरी आत्मा रोती है, जब मैं बेटे के स्मारक पर गंदगी देखती हूं
सम्मान समारोह में बिलखते हुए बोली शहीद की मां, मेरी आत्मा रोती है जब बेटे के स्मारक पर गंदगी देखती हूं
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अमर उजाला ब्यूरो
नीलोखेड़ी। वर्ष 2009 में नक्सली हमले में शहीद हुए गांव कलसी के सर्बजीत सिंह की शहादत पर सीआईएसएफ पानीपत यूनिट की ने सम्मान समारोह आयोजित किया। इसमें शहीद की मां गुलजारी देवी को जब सम्मानित किया गया तो वह रो पड़ीं। मंच से शहीद की मां ने अपना दर्द व्यक्त किया। कहा कि वह गांव में स्थापित उनके शहीद बेटे के स्मारक पर रोज जाती हैं। वह मानती है कि उसका बेटा आज भी यहीं रहता है। कहा कि ‘मुझे दर्द तब होता है, जब रोजाना उसके आसपास गंदगी पड़ी मिलती है। कितना दुखद है कि शहीद के स्मारक पर सफाई तक करने वाला कोई नहीं है। न पंचायत और न ही प्रशासन। नम आंखों से मां ने सीआईएसएफ के अधिकारियों से गुहार लगाई कि शहीद के स्मारक पर सफाई की व्यवस्था की जाए। क्योंकि मैं मानती हूं कि मेरे बेटा आज भी यहीं है मेरे पास। मां और बेटे के बीच में गंदगी नहीं होनी चाहिए।’
इससे पहले, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शहीद सर्बजीत सिंह कलसी के नाम पर केंद्र सरकार के आदेशानुसार सीआईएसएफ पानीपत यूनिट के सौजन्य से एक समारोह आयोजित कर लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया। मुख्य अतिथि कमांडर एचएस उप्पल, सहायक कमांडर विजय कुमार, खंडशिक्षा अधिकारी और प्रधानाचार्य धर्मपाल ने समारोह में शहीद सर्बजीत की माता गुलजारी देवी और पिता बलाराम को सम्मानित किया। गुलजारी देवी ने रोते हुए बताया कि शहीद के स्मारक के चारों तरफ गंदगी है। उसकी सफाई करने वाला कोई नहीं है। इसके बाद अधिकारियों ने शहीद की मां को संभाला और कहा कि वे स्मारक पर रोजाना सफाई की व्यवस्था कराएंगे। इस बारे में जिला प्रशासन से भी बात करेंगे। गांव के सरपंच अनिल कुमार ने आश्वासन दिया कि शहीद स्मारक पर रोजाना सफाई की जाएगी।
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नक्सली हमले में शहीद हुए थे सर्बजीत सिंह
कमांडर एचएस उप्पल ने बताया कि सर्बजीत की पोस्टिंग सीआईएसएफ उड़ीसा के नालकोदारमन जोड़ी में थी। यह एशिया की सबसे बडी मैग्जीन थी। इसमें असलेह का जखीरा रखा जाता है। सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की टुकड़ी को तैनात किया गया था। 12 अप्रैल, 2009 में 200 से 300 नक्लसियों ने इस पोस्ट पर हमला बोल दिया। वहां पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने नक्सलियों का डट कर सामना किया। इस हमले में सीआईएफ के 11 जवान शहीद हो गए, जबकि जवान बुरी तरह से घायल हो गए। भारत के इतिहास में आज तक की यह एकमात्र घटना है, जिसमें नक्सलियों को अपने साथियों के शवों को छोड़कर भागना पड़ा था। नक्सलियों से लड़ते हुए कलसी गांव के सर्बजीत शहीद हो गए थे। उसकी याद में केंद्र सरकार के निर्देश पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शहीद सर्बजीत सिंह पुस्तकालय शुरू किया है।
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देश की धरोहर हैं सैनिक : प्रिंसिपल
प्रिंसिपल ने कहा कि सैनिक देश की धरोहर होते हैं, उनकी शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने स्कूली विद्यार्थियों से भी कहा कि वह शिक्षा के साथ देश सेवा के कार्य में भी जुट जाएं। इस अवसर पर सहायक कमांडो विजय कुमार, कलसी गांव के सरपंच अनिल कुमार, गुरमीत सिंह, दयाराम, अध्यापक रामफल, अरुण शर्मा, मीनाक्षी चौधरी, गरीश आनंतराम, अंजू मान, पुरुषोत्तम शर्मा, जय भगवान अत्री, राजपाल प्रेमी उपस्थित थे।
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