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Kaithal News: पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना

Fri, 04 Oct 2024 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 04 Oct 2024 02:27 AM IST
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Worship of Mother Shailputri on the first day
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल, सीवन, राजौंद। जिलेभर में वीरवार को नवरात्र पर्व की शुरुआत मां शैलपुत्री की आराधना से हुई। पहले दिन सुबह से ही माता के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। प्राचीन बड़ी देवी, कोठी देवी स्थित छोटी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। इस दौरान नवरात्र पर्व पर श्रद्धालु मंदिरों से अखंड ज्योत लाए। इसके साथ ही पर्व को लेकर महिला सहित अन्य श्रद्धालुओं ने उपवास की भी शुरुआत की। अब यह उपवास अष्टमी पर्व पर खुलेंगे।

सीवन के प्रमुख महंत लक्ष्मी नारायण पुरी ने बताया पहले नवरात्र पर्व पर मां शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। कहा कि मां शैलपुत्री का स्वरूप शुद्धता और सरलता का प्रतीक है, और उनके पूजन से व्यक्ति को शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के समय मां के समक्ष फूल, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित किए
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जाते हैं।

मां शैलपुत्री को विशेष रूप से सफेद रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं, जो पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं। नवरात्र के पहले दिन की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पूरे नौ दिनों की आराधना की नींव रखता है। श्रद्धालु इस दिन मां दुर्गा से शक्ति और साहस की प्रार्थना करते हैं, ताकि वे जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकें। शारदीय नवरात्र की शुरुआत में कई श्रद्धालु अपने घरों में अखंड ज्योत जलाते हैं, जो मां दुर्गा की कृपा और उनके निरंतर आशीर्वाद का प्रतीक होती है।
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अखंड ज्योत को जलाना एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है, जिसमें ज्योत को नौ दिनों तक बिना बुझाए जलाए रखा जाता है। इस दौरान घरों में शुद्धता और पवित्रता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस अवसर पर शालिनी, उषा, रानी, वीना, ममता, सन्नी, जीवन व माता के अन्य भक्त उपस्थित रहे।

उधर, राजौंद में वीरवार को शुरू हुए प्रथम नवरात्र पर नगर के मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए जयघोषों से नगर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सुबह चार बजे से ही दुर्गा मंदिर, भद्रकाली मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, गांव में स्थित बाबा बहादुर बण मंदिर में भक्तों ने पहुंचकर पूजा-अर्चना कर मां जगदंबे भवानी से मंगल कामना की प्रार्थना की। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है।


नवरात्र के प्रथम दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा व मंदिर में चल रहे भक्ति गीत माहौल को ओर भी भक्तिमय करने में सहायक सिद्ध हो रहे थे। श्रद्धालुओं की ओर से नवरात्र के प्रथम दिन नवदुर्गा में प्रथम रूप मेंं शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्रों में माता रानी की पूजा का अपना विशेष महत्व है। माता रानी अपने भक्तों के सभी दुखों को हरती है और उनकी सभी मनोकामना पूर्ण करती है। नवरात्रों में दुर्गा स्तुति का पाठ करने से घर में शांति आती है तथा मानसिक चिंताओं का हनन होता है। सुख समृद्धि आती है और हर प्रकार के कष्टों का निवारण मां दुर्गा की पूजा अर्चना से होता है।
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