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Kaithal News: महिलाएं बोलीं- कुछ भी हो, गांव नहीं छोड़ेंगे
Thu, 22 May 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 22 May 2025 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन/कैथल। पोलड़ गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से गांव खाली करने के नोटिस देने का मामले के बाद ग्रामीण एकजुट हैं। गांव में ग्रामीणों को नोटिस के बाद गांव की महिलाओं में भी भय का माहौल है। उन्हें यह भय है कि कहीं पाई-पाई की कमाई से खड़े किए गए उनके आशियाना को कहीं गिरा न दिया जाए।
वहीं, नोटिस में अभी तक गांव खाली करने के लिए समय सीमा की जानकारी नहीं दी गई है। गांव की महिलाओं का कहना है कि वे किसी भी हालत में गांव को नहीं छोड़ेंगी। वहीं, विधायक की ओर से भी सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया गया है। नोटिस से मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है।
गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिस के बाद से गांव में परेशानी का माहौल बना हुआ है। विभाग ने गांव को जल्द खाली करने का निर्देश दिया है, ताकि क्षेत्र में पुरातात्विक खुदाई की जा सके। हालांकि अभी इसमें समय सीमा तय हीं की है। वहीं, गांव के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर और ज़मीन नहीं छोड़ेंगे।
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गांव के पूर्व सरपंच श्रवण ने बताया कि इस संकट के समाधान के लिए गांव के सभी लोग एकजुट होकर बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। सभी ने यह निर्णय लिया है कि इस मुद्दे को लेकर वे सीधे सांसद नवीन जिंदल से मिलेंगे। इसके लिए श्रवण खुद कैथल स्थित कार्यालय में प्रभारी से मिल चुके हैं। साथ ही मुख्यमंत्री से भी समय लेकर मुलाकात की योजना है।
एकत्रित किया जाएगा चंदा ः पूर्व सरपंच ने बताया कि गांव की बैठक में यह भी तय किया है कि यदि प्रशासन गांव खाली कराने पर अड़ा रहा तो वे कोर्ट की शरण लेंगे। इसके लिए गांव के हर घर से चंदा एकत्र किया जाएगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया में आर्थिक अड़चन न आए। ग्रामीणों ने वकीलों से राय लेना शुरू कर दिया है।
गांव के युवा सुनील, कुलदीप, सुशील कुमार, राकेश, अर्जुन, जगीर राम, अनिल व अन्य ने भी पुरजोर विरोध जताया है। उनका कहना है कि वे इसी गांव में पले-बढ़े हैं, गांव की गलियों में उनकी यादें हैं। वे अपने आशियाने छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। यदि सरकार ने हमें हटाया तो हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लेंगे और समाधान निकालेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि संविधान ने उन्हें जीने का अधिकार दिया है। इसलिए वे पोलड़ गांव को नहीं छोड़ेंगे। वे इस समय अपने संघर्ष की राह पर हैं। वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी ज़मीन, अपना घर और अपना गांव बचाने की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
महिलाओं की जुबानी, उनकी परेशानी
यह गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य है। ऐसे में ग्रामीणों की गुहार है कि उनका भी जीने का अधिकार है। गांव की अधिकतर आबादी जो दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती है, घर छिनने पर उनका भविष्य क्या होगा, यह सरकार को सोचना चाहिए। -लच्छो रानी, गांव निवासी
प्रदेश सरकार को उनके हालात को समझना चाहिए। प्राचीन अवशेषों के नाम पर उन्हें घरों से उजाड़ना न केवल अन्याय है, बल्कि संविधान के मूल अधिकारों का भी हनन है। नोटिस मिलने बाद ग्रामीणों की नींद हराम हो गई है। -वीजरा रानी, गांव निवासी
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सीवन/कैथल। पोलड़ गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से गांव खाली करने के नोटिस देने का मामले के बाद ग्रामीण एकजुट हैं। गांव में ग्रामीणों को नोटिस के बाद गांव की महिलाओं में भी भय का माहौल है। उन्हें यह भय है कि कहीं पाई-पाई की कमाई से खड़े किए गए उनके आशियाना को कहीं गिरा न दिया जाए।
वहीं, नोटिस में अभी तक गांव खाली करने के लिए समय सीमा की जानकारी नहीं दी गई है। गांव की महिलाओं का कहना है कि वे किसी भी हालत में गांव को नहीं छोड़ेंगी। वहीं, विधायक की ओर से भी सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया गया है। नोटिस से मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है।
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गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिस के बाद से गांव में परेशानी का माहौल बना हुआ है। विभाग ने गांव को जल्द खाली करने का निर्देश दिया है, ताकि क्षेत्र में पुरातात्विक खुदाई की जा सके। हालांकि अभी इसमें समय सीमा तय हीं की है। वहीं, गांव के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर और ज़मीन नहीं छोड़ेंगे।
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गांव के पूर्व सरपंच श्रवण ने बताया कि इस संकट के समाधान के लिए गांव के सभी लोग एकजुट होकर बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। सभी ने यह निर्णय लिया है कि इस मुद्दे को लेकर वे सीधे सांसद नवीन जिंदल से मिलेंगे। इसके लिए श्रवण खुद कैथल स्थित कार्यालय में प्रभारी से मिल चुके हैं। साथ ही मुख्यमंत्री से भी समय लेकर मुलाकात की योजना है।
एकत्रित किया जाएगा चंदा ः पूर्व सरपंच ने बताया कि गांव की बैठक में यह भी तय किया है कि यदि प्रशासन गांव खाली कराने पर अड़ा रहा तो वे कोर्ट की शरण लेंगे। इसके लिए गांव के हर घर से चंदा एकत्र किया जाएगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया में आर्थिक अड़चन न आए। ग्रामीणों ने वकीलों से राय लेना शुरू कर दिया है।
गांव के युवा सुनील, कुलदीप, सुशील कुमार, राकेश, अर्जुन, जगीर राम, अनिल व अन्य ने भी पुरजोर विरोध जताया है। उनका कहना है कि वे इसी गांव में पले-बढ़े हैं, गांव की गलियों में उनकी यादें हैं। वे अपने आशियाने छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। यदि सरकार ने हमें हटाया तो हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लेंगे और समाधान निकालेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि संविधान ने उन्हें जीने का अधिकार दिया है। इसलिए वे पोलड़ गांव को नहीं छोड़ेंगे। वे इस समय अपने संघर्ष की राह पर हैं। वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी ज़मीन, अपना घर और अपना गांव बचाने की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
महिलाओं की जुबानी, उनकी परेशानी
यह गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य है। ऐसे में ग्रामीणों की गुहार है कि उनका भी जीने का अधिकार है। गांव की अधिकतर आबादी जो दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती है, घर छिनने पर उनका भविष्य क्या होगा, यह सरकार को सोचना चाहिए। -लच्छो रानी, गांव निवासी
प्रदेश सरकार को उनके हालात को समझना चाहिए। प्राचीन अवशेषों के नाम पर उन्हें घरों से उजाड़ना न केवल अन्याय है, बल्कि संविधान के मूल अधिकारों का भी हनन है। नोटिस मिलने बाद ग्रामीणों की नींद हराम हो गई है। -वीजरा रानी, गांव निवासी