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Kaithal News: महिला वित्त मंत्री ओम प्रभा जैन को निर्दलीय प्रत्याशी ने दी थी मात
Wed, 11 Sep 2024 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 11 Sep 2024 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा के गठन के बाद जहां प्रदेश की पहली वित्त मंत्री बनने का नाम कैथल की तत्कालीन विधायक ओम प्रभा जैन के नाम रहा है। वहीं, उन्हें वित्त मंत्री रहते हुए लाला चरण दास शोरेवाला ने 1972 में पहली बार मात दी थी। इससे पहले वे लगातार चार बार कैथल सीट से विधानसभा चुनाव जीती थी।
शोरेवाला ने रोका था ओम प्रभा का विजयी रथ ः दिल्ली से आकर कैथल विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ चार बार लगातार विधायक बनने वाली ओम प्रभा का विजयी रथ लाला चरण दास शोरेवाला ने रोका था।
वर्ष 1972 में शोरवाला ने ओम प्रभा जैन को 3444 मतों से हराया था। ओमप्रभा जैन के चुनाव हारने के बाद इस सीट का महत्व कुछ कम हुआ, लेकिन वर्ष 2005 में पूर्व सिंचाई मंत्री शमशेर सिंह सुरजेवाला, 2009 व 2014 में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां से चुनाव लड़ते हुए इस सीट को हॉटसीट बना दिया।
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इसके बाद शोरवाला वर्ष 1987 में फिर कांग्रेस की टिकट से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन उस समय वे लोकदल के सुरेंद्र मदान से करीब पांच हजार वोटों से हार गए। वर्ष 1991 में वे हरियाणा विकास पार्टी से उम्मीदवार बने और फिर सुरेंद्र मदान को महज 400 वोटों से हराया था।
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कैथल। हरियाणा के गठन के बाद जहां प्रदेश की पहली वित्त मंत्री बनने का नाम कैथल की तत्कालीन विधायक ओम प्रभा जैन के नाम रहा है। वहीं, उन्हें वित्त मंत्री रहते हुए लाला चरण दास शोरेवाला ने 1972 में पहली बार मात दी थी। इससे पहले वे लगातार चार बार कैथल सीट से विधानसभा चुनाव जीती थी।
शोरेवाला ने रोका था ओम प्रभा का विजयी रथ ः दिल्ली से आकर कैथल विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ चार बार लगातार विधायक बनने वाली ओम प्रभा का विजयी रथ लाला चरण दास शोरेवाला ने रोका था।
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वर्ष 1972 में शोरवाला ने ओम प्रभा जैन को 3444 मतों से हराया था। ओमप्रभा जैन के चुनाव हारने के बाद इस सीट का महत्व कुछ कम हुआ, लेकिन वर्ष 2005 में पूर्व सिंचाई मंत्री शमशेर सिंह सुरजेवाला, 2009 व 2014 में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां से चुनाव लड़ते हुए इस सीट को हॉटसीट बना दिया।
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इसके बाद शोरवाला वर्ष 1987 में फिर कांग्रेस की टिकट से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन उस समय वे लोकदल के सुरेंद्र मदान से करीब पांच हजार वोटों से हार गए। वर्ष 1991 में वे हरियाणा विकास पार्टी से उम्मीदवार बने और फिर सुरेंद्र मदान को महज 400 वोटों से हराया था।