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Kaithal News: बिना पूर्ण गुरु की शरण में गए सब विफल है - भारती
Mon, 08 Dec 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आरकेएसडी कॉलेज के समीप प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आश्रम में साप्ताहिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साध्वी देवा भारती ने अध्यात्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि अध्यात्म का संबंध उस चेतन ब्रह्म शक्ति से है, जो सर्वत्र व्याप्त है और मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म के पथ का वास्तविक आरंभ पूर्ण सद्गुरु की शरण में जाने से ही होता है। जो लोग यह मानते हैं कि केवल जप, तप, व्रत, उपवास और पूजन विधियों से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है, वे एक प्रकार के भ्रम में रहते हैं। समस्त शास्त्र, ग्रंथ और महापुरुष यही संदेश देते हैं कि बिना पूर्ण गुरु की शरण के ये साधन अधूरे और विफल सिद्ध होते हैं।
साध्वी ने पूर्ण गुरु की पहचान के विषय में बताया कि पूर्ण सद्गुरु वही होता है, जो दीक्षा के समय साधक को तत्काल ईश्वर के ज्योति स्वरूप के दर्शन करवा सके। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार व्यक्ति को उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं, जबकि नकारात्मक विचार उसे पतन की ओर ले जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि जब कोई साधक पूर्ण गुरु की कृपा से अपने भीतर स्थित ब्रह्म शक्ति को पहचान लेता है, तो उसके नकारात्मक विचार स्वतः ही सकारात्मक विचारों में परिवर्तित होने लगते हैं। उसकी भावनाएं निःस्वार्थ हो जाती हैं और वह समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने लगता है।
साध्वी देवा भारती ने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही व्यक्ति स्वयं का और समाज का वास्तविक उत्थान कर सकता है। वर्तमान समय में जीवन को संयमित, तनावमुक्त और संतुलित रखने के लिए अध्यात्म का जीवन में समावेश अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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कैथल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आरकेएसडी कॉलेज के समीप प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आश्रम में साप्ताहिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साध्वी देवा भारती ने अध्यात्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि अध्यात्म का संबंध उस चेतन ब्रह्म शक्ति से है, जो सर्वत्र व्याप्त है और मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म के पथ का वास्तविक आरंभ पूर्ण सद्गुरु की शरण में जाने से ही होता है। जो लोग यह मानते हैं कि केवल जप, तप, व्रत, उपवास और पूजन विधियों से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है, वे एक प्रकार के भ्रम में रहते हैं। समस्त शास्त्र, ग्रंथ और महापुरुष यही संदेश देते हैं कि बिना पूर्ण गुरु की शरण के ये साधन अधूरे और विफल सिद्ध होते हैं।
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साध्वी ने पूर्ण गुरु की पहचान के विषय में बताया कि पूर्ण सद्गुरु वही होता है, जो दीक्षा के समय साधक को तत्काल ईश्वर के ज्योति स्वरूप के दर्शन करवा सके। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार व्यक्ति को उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं, जबकि नकारात्मक विचार उसे पतन की ओर ले जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि जब कोई साधक पूर्ण गुरु की कृपा से अपने भीतर स्थित ब्रह्म शक्ति को पहचान लेता है, तो उसके नकारात्मक विचार स्वतः ही सकारात्मक विचारों में परिवर्तित होने लगते हैं। उसकी भावनाएं निःस्वार्थ हो जाती हैं और वह समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने लगता है।
साध्वी देवा भारती ने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही व्यक्ति स्वयं का और समाज का वास्तविक उत्थान कर सकता है। वर्तमान समय में जीवन को संयमित, तनावमुक्त और संतुलित रखने के लिए अध्यात्म का जीवन में समावेश अत्यंत आवश्यक हो गया है।