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ये कैसा मिशन- मनमानी और धांधली से चला रहे संगठन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jan 2021 11:47 PM IST
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What kind of mission
ग्रामीण महिलाओं के जीवनस्तर को ऊपर उठाने के लिए चलाए जा रहे नेशनल रूरल लाइलीहुड मिशन के क्रियान्वयन पर संगठन की महिला ने ही सवाल उठाए हैं। आरोप है कि इसमें मनमानी और धांधली बरती जा रही है। एसडीसी कार्यालय में शिकायत देकर महिला ने बताया कि संगठन के एक ग्रुप में समूह सेविका के लिए नाम किसी और का है, जबकि मानदेय किसी और को दिया जा रहा है। यही नहीं एक नौंवी फेल महिला को मानदेय दिया जा रहा है, जबकि निर्धारित योग्यता के अनुसार महिला का दसवीं पास होना अनिवार्य है। मामले की जांच के लिए एडीसी ने सीईओ जिला परिषद को भेज दिया है।
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प्रबोध गांव निवासी खुर्शीदा ने शिकायती पत्र में बताया कि वह वर्ष 2013 से इस मिशन से जुड़ी हुई हैं। पूरे जिले से करीब 27000 महिलाएं मिशन से जुड़ी हुई हैं और 2639 समूह बने हुए हैं। आरोप है कि एचएसआरएलएम स्टाफ अपनी मनमानी और धांधली कर रहा है। बताया कि एक ग्रुप में समूह सेविका के लिए नाम किसी और का है, लेकिन मानदेय किसी और महिला को दिया जा रहा है। वो भी उस दूसरी महिला के नाम से समूह के खाते से चेक के माध्यम से दिया जा रहा है। इसी प्रकार से एक नौंवी फेल महिला को मानदेय दिया जा रहा है, जबकि इसमें कम से कम दसवीं पास महिला का होना अनिवार्य है। यही नहीं गांव नरड़ में कहने या फिर दिखाने भर के लिए सीएलएफ का कार्यालय बनाया गया है, लेकिन स्टाफ सदस्य बैठक अपने कार्यालय में करते हैं। महिलाओं को वहीं पर बुलाया जाता है। रजिस्टर भी खुद लिखते हैं। स्टाफ सदस्य महिलाओं के द्वारा चलाए जाने वाले खातों को बिना किसी नियम के पत्र भेजकर बंद करवा देते हैं और फिर मनमर्जी से चलवा देते हैं, जबकि इस खाते का संचालन महिलाओं को करना है। एक कैंटीन खोली गई, जिसके लिए ट्रेनिंग तो कैथल सीएलएफ सदस्यों को दी गई और कैंटीन सीवन सीएलएफ सदस्यों की खुलवा दी गई और दिए जाने वाले मानदेय में भी गड़बड़ी की गई। इस संबंध में एडीसी सतबीर कुंडू ने कहा कि उनके पास शिकायत आई थी, जिसे जांच के लिए सीईओ जिला परिषद को भेज दिया गया है। मिशन के डीपीएम रजत भास्कर का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई शिकायत नहीं है। जब शिकायत सामने आएगी, तभी कुछ बता पाएंगे कि क्या मामला है। उन्होंने बताया कि मिशन के संचालन के दौरान स्टॉफ या उनका खुद का संगठनों के वित्तीय लेन-देन से कोई लेना-देना नहीं है। इतना जरूर है कि संगठनों को जो ग्रांट मिलती है। उसका प्रयोग नियमानुसार हो और दुरुपयोग न हो।
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