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Kaithal News: हवाओं में जहर हम भर रहे हैं। नहीं जानते... से किया कटाक्ष

Mon, 09 Dec 2024 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 09 Dec 2024 02:17 AM IST
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We are filling the air with poison. Don't know... sarcastically
06-कैथल। आरकेएसडी कॉलेज परिसर में साहित्य सभा द्वारा आयोजित मासिक काव्य.गोष्ठी भ्ज्ञाग लेते साह
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक कक्ष में रविवार को साहित्य सभा की मासिक काव्य-गोष्ठी साहित्य सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान के सानिध्य में हुई। इसकी अध्यक्षता डाॅ. हरीश चंद्र झंडई ने की।
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काव्य-गोष्ठी का संचालन हरियाणवी कवि रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी में दिनेश बंसल दानिश ने शेयर प्रस्तुत कर कहा कि, महफ़िल में दिल का दीप जलाकर ग़ज़ल कहें। आलम है तीरगी का मिटाकर ग़ज़ल कहें। प्रदूषण पर डाॅ. अशोक कुमार ने कहा, हवाओं में ज़हर हम भर रहे हैं। नहीं हम जानते क्या कर रहे हैं। नारी की व्यथा को मधु गोयल मधुलके कहा, मैं कहा हारी, मुझे तो हराया गया। कदम-क़दम पर अबला कह सताया गया।
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सर्दियों में गांवों में आने वाले प्रवासी पक्षियों को लेकर सुरेश कुमार कल्याण ने कहा, पंछी पाहुन दूर के रंग-बिरंगा वेश। करके कलरव दे रहे, सर्दी का संदेश। ऊपर वाले की व्यापकता-क्षमता को देखकर दिलबाग अकेला ने कहा, चप्पे-चप्पे पर नजर रखता है। वो दो जहां की खबर रखता है। रजनीश शर्मा ने कहा, तुम बातों के धागे लाओ, मैं चुप्पी से सीलती जाऊं। मैं सारी यादों को समेटकर, एक दरी बना सो जाऊ।
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घर को जंजाल बताते हुए रामफल गौड़ ने कहा, मकड़ी सा घर बासा जाला। आवै क्यूकर सांस सुखाला। रविंद्र रवि ने शार्ट कट लेने के कारण आ रही परेशानी को लेकर कहा, जबसे छोटा रास्ता होने लगा। हर कदम पर हादसा होने लगा। समय की परिवर्तन शीलता को लेकर डाॅ. तेजिंद्र ने कहा जनवरी ने दिसंबर को धकियाया और कहा तू चल मैं आया। गोष्ठी में प्रो. अमृत लाल मदान ने उपस्थित रचनाकारों से निरंतर सृजन करते रहने का आह्वान किया।

डाॅ. हरीश चंद्र झंडई की प्रकृति मूलक कविता-पाठ और अध्यक्षीय टिप्पणी के साथ काव्य-गोष्ठी का समापन हुआ। काव्य-गोष्ठी में सतीश कुमार शर्मा, डाॅ. चतरभुज बंसल सौथा, श्याम सुंदर गौड़, बलवान सिंह कुंडू सावी, डाॅ. विकास आनंद और रिसाल जांगड़ा ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से उपस्थित रचनाकारों को आनंदित किया।
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