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Kaithal News: जलभराव वाले स्थान किए चिह्नित, दवा का छिड़काव शुरू

Sun, 19 Apr 2026 02:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 19 Apr 2026 02:50 AM IST
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Waterlogged areas were marked and spraying of medicine began.
मच्छरों से बचाव के लिए तालाब में दवाई डालते कर्मचारी। - फोटो : Archive
कैथल। मलेरिया के बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग की ओर से जिले में जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां दवा के छिड़काव का कार्य शुरू कर दिया गया है। विभाग ने जिले के सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों में 942 टीमों को तैनात किया है। ये टीमें घर-घर जाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक करेंगी।
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साथ ही मच्छरों के पनपने वाले स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बीमारी के फैलाव को रोका जा सके। जहां-जहां पानी जमा है, वहां नियमित रूप से दवा का छिड़काव किया जा रहा है। ताकि मच्छरों के पनपने की संभावना को खत्म किया जा सके।
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अधिकारियों के अनुसार मच्छर साफ और स्थिर पानी में तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता में रखा गया है। अभियान को सफल बनाने के लिए आशा वर्कर, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के उपाय बता रहे हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें और नियमित साफ-सफाई बनाए रखें। नालियों, गड्ढों, तालाबों, खाली प्लॉटों में पानी सबसे ज्यादा समय तक खड़ा रहता है। विदित रहे कि अप्रैल से जुलाई तक मच्छरों का प्रकोप रहता है। मलेरिया बीमारी फैलने की संभावना रहती है।
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कूलर व टंकियों का रखें विशेष ध्यान : स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कूलर, गमले, छतों और पानी की टंकियों में जमा पानी मच्छरों के लिए सबसे अनुकूल स्थान होता है। इसलिए इन्हें सप्ताह में कम से कम एक बार खाली कर अच्छी तरह साफ और सुखाना जरूरी है।

क्या है मलेरिया : मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर आमतौर पर रात के समय सक्रिय रहता है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद जब यह किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो संक्रमण फैल जाता है। यह मच्छर गहरे भूरे रंग का होता है और स्थिर पानी में पनपता है। संवाद
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