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Kaithal News: श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन को बताया भगवान का धाम
Sat, 27 Jun 2026 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 27 Jun 2026 01:36 AM IST
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पांचवेें दिन की कथा में मुख्यातिथि को सम्मानित करते हुए कथा वाचक रक्षा सरस्वती।
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। भवानी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक देवी रक्षा सरस्वती ने तीर्थों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृंदावन केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान का दिव्य धाम है, जहां तीर्थों के राजा प्रयाग को भी अपने पापों के नाश के लिए जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वृंदावन में भक्ति महारानी अपने पुत्र ज्ञान और वैराग्य के साथ नृत्य करती हैं। उन्होंने बताया कि वृंदावन वह पवित्र भूमि है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने कंस द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों का संहार कर उनका उद्धार किया था। यहां गोपियों के साथ महारास, माखन चोरी और ऊखल बंधन जैसी लीलाएं भी संपन्न हुई थीं। इससे पूर्व कथा का शुभारंभ महावीर वर्मा, राजू बावा, दीपक सिंगला व हरबंस सीड़ा ने परिवार सहित किया और व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा में प्रसाद सेवा अजय भार्गव ने की। कथा में प्रधान बलबीर सैनी, राजीव शर्मा, कुलदीप माजरा, डॉ. रामकुमार शर्मा, मोती राम गर्ग, कृष्ण धीमान, गुरबख्श सिंह उपस्थित रहे।
माया के प्रभाव में आने पर बंधनों में जकड़ जाता है व्यक्ति
कथा के दौरान देवी रक्षा सरस्वती ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान के जन्म लेते ही कारागार में पहरेदार सो गए, वासुदेव और देवकी की बेड़ियां खुल गईं और कारागार के दरवाजे स्वतः खुल गए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर वासुदेव गोकुल पहुंचे और वहां से योगमाया कन्या को लेकर लौट आए। इसके बाद बेड़ियां पुनः बंध गईं और दरवाजे बंद हो गए तथा द्वारपाल जाग गए। कथा वाचक ने कहा कि जब व्यक्ति भगवान के निकट होता है तो उसके सारे बंधन स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जबकि माया के प्रभाव में आने पर वह बंधनों में जकड़ जाता है।
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गुहला चीका। भवानी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक देवी रक्षा सरस्वती ने तीर्थों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृंदावन केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान का दिव्य धाम है, जहां तीर्थों के राजा प्रयाग को भी अपने पापों के नाश के लिए जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वृंदावन में भक्ति महारानी अपने पुत्र ज्ञान और वैराग्य के साथ नृत्य करती हैं। उन्होंने बताया कि वृंदावन वह पवित्र भूमि है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने कंस द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों का संहार कर उनका उद्धार किया था। यहां गोपियों के साथ महारास, माखन चोरी और ऊखल बंधन जैसी लीलाएं भी संपन्न हुई थीं। इससे पूर्व कथा का शुभारंभ महावीर वर्मा, राजू बावा, दीपक सिंगला व हरबंस सीड़ा ने परिवार सहित किया और व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा में प्रसाद सेवा अजय भार्गव ने की। कथा में प्रधान बलबीर सैनी, राजीव शर्मा, कुलदीप माजरा, डॉ. रामकुमार शर्मा, मोती राम गर्ग, कृष्ण धीमान, गुरबख्श सिंह उपस्थित रहे।
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माया के प्रभाव में आने पर बंधनों में जकड़ जाता है व्यक्ति
कथा के दौरान देवी रक्षा सरस्वती ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान के जन्म लेते ही कारागार में पहरेदार सो गए, वासुदेव और देवकी की बेड़ियां खुल गईं और कारागार के दरवाजे स्वतः खुल गए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर वासुदेव गोकुल पहुंचे और वहां से योगमाया कन्या को लेकर लौट आए। इसके बाद बेड़ियां पुनः बंध गईं और दरवाजे बंद हो गए तथा द्वारपाल जाग गए। कथा वाचक ने कहा कि जब व्यक्ति भगवान के निकट होता है तो उसके सारे बंधन स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जबकि माया के प्रभाव में आने पर वह बंधनों में जकड़ जाता है।
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