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गांव पोलड़ में 60 परिवारों को पुरातत्व विभाग ने जारी किए नोटिस, लोगों में हड़कंप
ब्यूरो कैथल
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:09 AM IST
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नोटिस में पूछा- क्यों न आपको पुरातत्व विभाग की जगह से हटा दिया जाए
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एक बार फिर ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के गांव पोलड़ में लोग दहशत में है। गांव के 60 परिवारों को पुरातत्व विभाग ने नोटिस जारी किया है कि क्यों ना उन्हें विभाग की जमीन से हटा दिया जाए। 16 सितंबर को विभाग के एस्टेट ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत होने के इस नोटिस में कहा गया है कि यदि विभाग के समक्ष लोग नहीं पहुंचते हैं तो उन्हें एक्स पार्टी मानते हुए फैसला सुना दिया जाएगा। लोगों में इस नोटिस से डर व्याप्त है कि क्या पता इस बार उन्हें उनके घरों से निकाल दिया जाए और उनका आशियाना उजाड़ दिया जाए। इससे पूर्व भी कई बार विभाग की ओर से ग्रामीणों को नोटिस दिए गए हैं और गांव में खुदाई भी करवाई गई है। पिछली बार भी जब गांव में खुदाई करवाई गई थी तो उन्हें खुदाई में कुछ भी नहीं मिला था जिससे की खुदाई को आगे जारी रखा जा सके। इसके कुछ समय बाद फिर से विभाग की ओर से इस प्रकार के नोटिस भेजे गए हैं।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व का गांव है पोलड़
कैथल-पटियाला मार्ग पर ऐतिहासिक सरस्वती नदी के किनारे स्थित गांव पोलड़ में पुरातत्व विभाग की जमीन है। यहां वर्ष 1925 में जमीन अधिग्रहण की गई थी। उस समय यहां रामायणकालीन अवशेष मिलने की बातें बताई जाती रही हैं। कई बार पुरातत्व विभाग यहां जमीन खाली करवाने का प्रयास कर चुका है।
60 परिवारों को मिला नोटिस
गांव के सरपंच प्रतिनिधि जगदीप सिंह ने बताया कि गांव में करीब साठ लोगों को पुरातत्व विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस मिले हैं जिसमें लोगों को विभाग के अधिकारियों से मिलने और अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इस गांव में जरूरतमंद लोग रहते हैं। गांव के लोगों के पास इतने साधन नहीं हैं कि वह अपने घरों को छोड़ कर दूसरे स्थान पर जा कर बस जाएं। बहुत से नेताओं से भी गांव के लोग मिल चुके हैं और उनसे गुहार लगा चुके हैं कि उन्हें उनके घरों से न उजाड़ा जाए। लेकिन हर बार उन्हें इस बारे में आश्वासन ही मिला है।
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परिवारों पर संकट
गांव के लोग सुरजीत सिंह, सुखविंद्र कौर, गुरमीत कौर, पलविन्द्र कौर, पूर्ण सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें इस सरकार से आशा थी कि वह उन्हें घरों से बेघर नहीं होने देगी परंतु इस बार फिर से विभाग की ओर आए नोटिसों ने उनकी नींद उड़ा दी है। वह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से मिलेंगे और उन्हें अपनी व्यथा भी सुनाएंगे और अपना पक्ष भी रखेंगे। यदि अब भी कुछ नहीं हुआ तो वह कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
अभी मेरी जानकारी में ऐसी सूचना नहीं है कि गांव पोलड़ में किसी विभाग ने नोटिस जारी किया है। पूरे मामले की जानकारी जुटाई जाएगी। नियमानुसार जो भी राहत हो सकेगी, लोगों को दिलवाई जाएगी। स्वयं इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और सरकार में आला नेताओं से ग्रामीणों के हक में वकालत करूंगा।
कुलवंत बाजीगर, विधायक गुहला-चीका।
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ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व का गांव है पोलड़
कैथल-पटियाला मार्ग पर ऐतिहासिक सरस्वती नदी के किनारे स्थित गांव पोलड़ में पुरातत्व विभाग की जमीन है। यहां वर्ष 1925 में जमीन अधिग्रहण की गई थी। उस समय यहां रामायणकालीन अवशेष मिलने की बातें बताई जाती रही हैं। कई बार पुरातत्व विभाग यहां जमीन खाली करवाने का प्रयास कर चुका है।
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60 परिवारों को मिला नोटिस
गांव के सरपंच प्रतिनिधि जगदीप सिंह ने बताया कि गांव में करीब साठ लोगों को पुरातत्व विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस मिले हैं जिसमें लोगों को विभाग के अधिकारियों से मिलने और अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इस गांव में जरूरतमंद लोग रहते हैं। गांव के लोगों के पास इतने साधन नहीं हैं कि वह अपने घरों को छोड़ कर दूसरे स्थान पर जा कर बस जाएं। बहुत से नेताओं से भी गांव के लोग मिल चुके हैं और उनसे गुहार लगा चुके हैं कि उन्हें उनके घरों से न उजाड़ा जाए। लेकिन हर बार उन्हें इस बारे में आश्वासन ही मिला है।
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परिवारों पर संकट
गांव के लोग सुरजीत सिंह, सुखविंद्र कौर, गुरमीत कौर, पलविन्द्र कौर, पूर्ण सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें इस सरकार से आशा थी कि वह उन्हें घरों से बेघर नहीं होने देगी परंतु इस बार फिर से विभाग की ओर आए नोटिसों ने उनकी नींद उड़ा दी है। वह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से मिलेंगे और उन्हें अपनी व्यथा भी सुनाएंगे और अपना पक्ष भी रखेंगे। यदि अब भी कुछ नहीं हुआ तो वह कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
अभी मेरी जानकारी में ऐसी सूचना नहीं है कि गांव पोलड़ में किसी विभाग ने नोटिस जारी किया है। पूरे मामले की जानकारी जुटाई जाएगी। नियमानुसार जो भी राहत हो सकेगी, लोगों को दिलवाई जाएगी। स्वयं इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और सरकार में आला नेताओं से ग्रामीणों के हक में वकालत करूंगा।
कुलवंत बाजीगर, विधायक गुहला-चीका।