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शुरू नहीं हो पाई अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन
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Ultrasound machine could not be started in the hospital
- फोटो : Kaithal
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पिछले पांच वर्ष से जिला नागरिक अस्पताल में धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन 12 अगस्त से शुरू की जानी थी, लेकिन तैयारियां पूरी न होने के कारण वीरवार को भी मशीन नहीं चल पाई। जिस कमरे में मशीन रखी हुई है, सुबह अधिकारियों की देखरेख में उसका गेट खोला गया। अस्पताल में पहुंचे मैकेनिक मशीन को साफ करने, शुरू करने और बिजली सप्लाई सहित अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने में लगे दिखाई दिए। विशेषज्ञ डॉ. मनप्रीत कौर भी मैकेनिकों के साथ मिलकर मशीन चलाने के प्रयास में लगी दिखाई दी।
जिस कमरे में मशीन रखी है, उसमें मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने के लिए स्थान पर्याप्त नहीं-जिस कमरे में इस समय अल्ट्रासाउंड मशीन रखी हुई है, उस कमरे में विशेषज्ञों के खड़े होने और मरीजों के अल्ट्रासाउंड के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा मशीन को किसी दूसरे बड़े कमरे में इंस्टॉल करवाने पर विचार किया गया। अधिकारियों ने निर्णय लिया कि दूसरा कमरा अलॉट करने बारे विभाग के उच्चाधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जैसे ही कमरा मिलेगा, उसके साथ ही मशीन को वहां इंस्टॉल करवाकर इसे शुरू कर दिया जाएगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अगला एक-दो दिन और मशीन शुरू करने में लग जाएगा।
अस्पताल में स्थापित इस मशीन को विभाग द्वारा करीब 37 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया है। खरीद के बाद से ही चलाने वाला विशेषज्ञ न होने के कारण यह मशीन बंद पड़ी थी और कमरे पर ताला जड़ा हुआ था। ऐसे में मरीजों को निजी केंद्रों में 700-800 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा। अब मरीजों को समय के साथ-साथ धन की बचत की भी आस जगी है।
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रोजाना 50 से ज्यादा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगा अस्पताल और निजी केंद्रों के चक्कर काटने से छुटकारा-अस्पताल में रोजाना 50 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। रोजाना 30 से ज्यादा महिलाएं और 20 के करीब अन्य मरीजों का अल्ट्रासाउंड नागरिक अस्पताल से परामर्श लेने के बाद होता है। मशीन शुरू होते ही इन मरीजों को निजी केंद्रों पर नहीं जाना पड़ेगा।
पीएमओ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि मशीन को स्थापित करने के लिए उच्चाधिकारियों से बड़ा कमरा उपलब्ध करवाने के लिए अनुमति मांगी गई है। जल्द ही इसे दूसरे कमरे में इंस्टॉल करवाया जाएगा। उसके बाद मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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जिस कमरे में मशीन रखी है, उसमें मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने के लिए स्थान पर्याप्त नहीं-जिस कमरे में इस समय अल्ट्रासाउंड मशीन रखी हुई है, उस कमरे में विशेषज्ञों के खड़े होने और मरीजों के अल्ट्रासाउंड के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा मशीन को किसी दूसरे बड़े कमरे में इंस्टॉल करवाने पर विचार किया गया। अधिकारियों ने निर्णय लिया कि दूसरा कमरा अलॉट करने बारे विभाग के उच्चाधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जैसे ही कमरा मिलेगा, उसके साथ ही मशीन को वहां इंस्टॉल करवाकर इसे शुरू कर दिया जाएगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अगला एक-दो दिन और मशीन शुरू करने में लग जाएगा।
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अस्पताल में स्थापित इस मशीन को विभाग द्वारा करीब 37 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया है। खरीद के बाद से ही चलाने वाला विशेषज्ञ न होने के कारण यह मशीन बंद पड़ी थी और कमरे पर ताला जड़ा हुआ था। ऐसे में मरीजों को निजी केंद्रों में 700-800 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा। अब मरीजों को समय के साथ-साथ धन की बचत की भी आस जगी है।
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रोजाना 50 से ज्यादा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगा अस्पताल और निजी केंद्रों के चक्कर काटने से छुटकारा-अस्पताल में रोजाना 50 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। रोजाना 30 से ज्यादा महिलाएं और 20 के करीब अन्य मरीजों का अल्ट्रासाउंड नागरिक अस्पताल से परामर्श लेने के बाद होता है। मशीन शुरू होते ही इन मरीजों को निजी केंद्रों पर नहीं जाना पड़ेगा।
पीएमओ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि मशीन को स्थापित करने के लिए उच्चाधिकारियों से बड़ा कमरा उपलब्ध करवाने के लिए अनुमति मांगी गई है। जल्द ही इसे दूसरे कमरे में इंस्टॉल करवाया जाएगा। उसके बाद मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।