{"_id":"67410f128220c4a59f07dd84","slug":"true-happiness-lies-in-making-others-happy-shastri-kaithal-news-c-245-1-kht1001-124212-2024-11-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"सच्चा सुख दूसरों को सुखी करने में : शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सच्चा सुख दूसरों को सुखी करने में : शास्त्री
विज्ञापन
सीवन। समाजसेवी भीषू चौधरी के निवास पर शुक्रवार को एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में महंत राम स्वरूप शास्त्री ने एक धार्मिक चर्चा की। इस मौके पर महंत राम स्वरूप शास्त्री ने कहा कि सच्चा सुख दूसरों को सुखी करने में है।
जब हम दूसरों की मदद करते हैं और उनके दुख को कम करने का प्रयास करते हैं, तब हमें आत्मिक शांति और सच्चा आनंद मिलता है। दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना हमारी आत्मा को संतोष देता है। यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि स्वार्थ से परे होकर परोपकार और सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दूसरों को सुखी करने का अर्थ केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि यह उनकी भावनाओं, जरूरतों और समस्याओं को समझने से जुड़ा है। ऐसे कार्य न केवल दूसरों को खुश करते हैं बल्कि करने वाले को भी आंतरिक खुशी और संतुष्टि प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
परोपकार का यह गुण सभी धर्मों और संस्कृतियों में सराहा गया है। उन्होंने कहा कि दूसरों को सुखी करना केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी सहायक होता है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो समाज में एक सकारात्मक वातावरण बनता है।
इससे आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यह हमारे आसपास के लोगों को प्रेरित करता है और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि जब हम स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीने का प्रयास करते हैं, तो हमारा जीवन भी सार्थक बनता है। दूसरों की खुशी में ही हमारी खुशी छिपी है। यही मानवता की सच्ची पहचान है। इस अवसर पर सुभाष, सुरेंद्र, सुरेश, ऊषा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जब हम दूसरों की मदद करते हैं और उनके दुख को कम करने का प्रयास करते हैं, तब हमें आत्मिक शांति और सच्चा आनंद मिलता है। दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना हमारी आत्मा को संतोष देता है। यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि स्वार्थ से परे होकर परोपकार और सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि दूसरों को सुखी करने का अर्थ केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि यह उनकी भावनाओं, जरूरतों और समस्याओं को समझने से जुड़ा है। ऐसे कार्य न केवल दूसरों को खुश करते हैं बल्कि करने वाले को भी आंतरिक खुशी और संतुष्टि प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
परोपकार का यह गुण सभी धर्मों और संस्कृतियों में सराहा गया है। उन्होंने कहा कि दूसरों को सुखी करना केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी सहायक होता है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो समाज में एक सकारात्मक वातावरण बनता है।
इससे आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यह हमारे आसपास के लोगों को प्रेरित करता है और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि जब हम स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीने का प्रयास करते हैं, तो हमारा जीवन भी सार्थक बनता है। दूसरों की खुशी में ही हमारी खुशी छिपी है। यही मानवता की सच्ची पहचान है। इस अवसर पर सुभाष, सुरेंद्र, सुरेश, ऊषा आदि मौजूद रहे।