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सेवा और संकल्प से ही पूर्ण होती है सच्ची भक्ति : संत छवि
Fri, 13 Jun 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 13 Jun 2025 01:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। युवा समाजसेवी नित्यम के निवास स्थान पर वीरवार को एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें संत छवि रामदास ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। महंत ने कहा कि सच्ची भक्ति सेवा, संकल्प और समर्पण से ही पूर्ण होती है।
मनुष्य जब अपने कर्मों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है, तब जीवन साधना बन जाता है। उन्होंने कहा कि सेवा और नम्रता ही भक्ति की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने प्रवचनों में श्रीराम चरित मानस से उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे शबरी, निषादराज और हनुमान जैसे पात्रों ने अपने समर्पण से प्रभु श्रीराम का हृदय जीता।
संत छवि रामदास ने कहा कि जिस हृदय में ईश्वर का वास होता है, वहां अहंकार, घृणा और स्वार्थ नहीं टिक सकते। उन्होंने उपस्थित लोगों को आह्वान किया कि वे अपने जीवन को धर्म के मार्ग पर चलाकर सेवा, दया और प्रेम को अपनाएं। अंत में संत ने कहा कि सत्संग और सच्चे संतों की संगति से ही आत्मा का कल्याण संभव है। इस अवसर पर शालिनी, शिल्पा, सोनिया, अदिति, सुमन, दीपिका, ममता व प्रवेश उपस्थित रहे।
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सीवन। युवा समाजसेवी नित्यम के निवास स्थान पर वीरवार को एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें संत छवि रामदास ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। महंत ने कहा कि सच्ची भक्ति सेवा, संकल्प और समर्पण से ही पूर्ण होती है।
मनुष्य जब अपने कर्मों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है, तब जीवन साधना बन जाता है। उन्होंने कहा कि सेवा और नम्रता ही भक्ति की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने प्रवचनों में श्रीराम चरित मानस से उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे शबरी, निषादराज और हनुमान जैसे पात्रों ने अपने समर्पण से प्रभु श्रीराम का हृदय जीता।
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संत छवि रामदास ने कहा कि जिस हृदय में ईश्वर का वास होता है, वहां अहंकार, घृणा और स्वार्थ नहीं टिक सकते। उन्होंने उपस्थित लोगों को आह्वान किया कि वे अपने जीवन को धर्म के मार्ग पर चलाकर सेवा, दया और प्रेम को अपनाएं। अंत में संत ने कहा कि सत्संग और सच्चे संतों की संगति से ही आत्मा का कल्याण संभव है। इस अवसर पर शालिनी, शिल्पा, सोनिया, अदिति, सुमन, दीपिका, ममता व प्रवेश उपस्थित रहे।
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