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वीर हनुमान की कृपा से कट जाते हैं संकट : शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। भगवान हनुमान भारतीय उपासना में सर्वविदित उपास्य है। जीवन की समस्त समस्याएं, जिनकी कृपा से समाप्त हो जाती है, जीवन के समस्त संकट जिनकी कृपा से नष्ट हो जाते हैं। अष्ट सिद्धियां नव निधियां जिनकी कृपा से प्राप्त हो जाती हैं, जिनके पावन स्मरण से कायिक, वाचिक ,मानसिक ताप एवं आधि दैविक आधि भौतिक तथा आध्यात्मिक त्रिविध दुखों की निवृत्ति हो जाती है।
वीर हनुमान जी की महिमा बताते हुए पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि श्री हनुमान महाराज समस्त साधकों के परम उपाध्याय है। हनुमान जी समस्त दैवीय शक्तियों के शक्तिपुंज हैं, इसीलिए हनुमान जी की आराधना से सब कुछ सुलभ है। हनुमान जी चिरंजीवी व अमर देवता है। भगवान श्रीराम का जहां जहां पावन नाम संकीर्तन होता है। वहां हनुमान जी अवश्य विद्यमान रहते हैं। भक्ति के इतिहास में प्रभु श्रीराम की जैसी भक्ति हनुमान जी ने की है, वैसे किसी ने नहीं की है। इसलिए हनुमान जी भक्ति शिरोमणि है। आज संपूर्ण विश्व में हनुमान जी की सर्वाधिक पूजा-अर्चना की जाती है।
जिस प्रकार राम का अवतार लोक शिक्षा एवं राक्षसों के विनाश के लिए हुआ था। उसी प्रकार हनुमान जी का अवतार राम की लीला में सहायता के लिए तथा सेवा भाव की शिक्षा के लिए हुआ था। आधुनिक समाज में भोग वादी प्रवृतियां ज्यादा प्रबल हो गई हैं, चरित्र निर्माण और सात्विक दृष्टिकोण हास की ओर अग्रसर है। इस विषम परिस्थिति में हनुमान जी की पूजा और उनके आचरण के अनुकरण का विशेष महत्व है। हनुमान सर्वगुण संपन्न है। उनमें अनन्य भगवत भक्ति, अखंड ब्रह्मचर्य, विवेक, विद्वान बुद्धिमता ,चतुरता, बल, पौरूष साहस और सदाचार है। वे श्रीराम के परम भक्त तथा अतुलनीय है। हनुमान जी रूद्र शंकर के अवतार हैं।
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पंडित जी ने कहा कि शंकर जी ने वानर रूप क्यों धारण किया, एक वृत्तांत में कहा गया है कि भगवान श्रीराम बाल्यकाल से ही सदा शिव की आराधना करते थे और भगवान शिव भी श्री राम को अपना परम उपास्य इष्ट देवता मानते हैं। साक्षात नारायण ने जब नर रूप धारण कर श्री राम के नाम से अवतार ग्रहण किया और शंकर जी शिव रूप में नर रूप की कैसे आराधना कर सकते थे। इसीलिए उन्होंने नर अवतार भगवान श्रीराम की उपासना की तीव्र लालसा को फलीभूत करने के लिए वानर अवतार धारण कर लिया और प्रेम में सेवक का रूप धारण कर उनकी सेवा करने के लिए अंजना मां के गर्भ से प्रकट हो गए। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में हनुमत उपासना कल्याणकारी मार्ग है।
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पूंडरी। भगवान हनुमान भारतीय उपासना में सर्वविदित उपास्य है। जीवन की समस्त समस्याएं, जिनकी कृपा से समाप्त हो जाती है, जीवन के समस्त संकट जिनकी कृपा से नष्ट हो जाते हैं। अष्ट सिद्धियां नव निधियां जिनकी कृपा से प्राप्त हो जाती हैं, जिनके पावन स्मरण से कायिक, वाचिक ,मानसिक ताप एवं आधि दैविक आधि भौतिक तथा आध्यात्मिक त्रिविध दुखों की निवृत्ति हो जाती है।
वीर हनुमान जी की महिमा बताते हुए पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि श्री हनुमान महाराज समस्त साधकों के परम उपाध्याय है। हनुमान जी समस्त दैवीय शक्तियों के शक्तिपुंज हैं, इसीलिए हनुमान जी की आराधना से सब कुछ सुलभ है। हनुमान जी चिरंजीवी व अमर देवता है। भगवान श्रीराम का जहां जहां पावन नाम संकीर्तन होता है। वहां हनुमान जी अवश्य विद्यमान रहते हैं। भक्ति के इतिहास में प्रभु श्रीराम की जैसी भक्ति हनुमान जी ने की है, वैसे किसी ने नहीं की है। इसलिए हनुमान जी भक्ति शिरोमणि है। आज संपूर्ण विश्व में हनुमान जी की सर्वाधिक पूजा-अर्चना की जाती है।
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जिस प्रकार राम का अवतार लोक शिक्षा एवं राक्षसों के विनाश के लिए हुआ था। उसी प्रकार हनुमान जी का अवतार राम की लीला में सहायता के लिए तथा सेवा भाव की शिक्षा के लिए हुआ था। आधुनिक समाज में भोग वादी प्रवृतियां ज्यादा प्रबल हो गई हैं, चरित्र निर्माण और सात्विक दृष्टिकोण हास की ओर अग्रसर है। इस विषम परिस्थिति में हनुमान जी की पूजा और उनके आचरण के अनुकरण का विशेष महत्व है। हनुमान सर्वगुण संपन्न है। उनमें अनन्य भगवत भक्ति, अखंड ब्रह्मचर्य, विवेक, विद्वान बुद्धिमता ,चतुरता, बल, पौरूष साहस और सदाचार है। वे श्रीराम के परम भक्त तथा अतुलनीय है। हनुमान जी रूद्र शंकर के अवतार हैं।
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पंडित जी ने कहा कि शंकर जी ने वानर रूप क्यों धारण किया, एक वृत्तांत में कहा गया है कि भगवान श्रीराम बाल्यकाल से ही सदा शिव की आराधना करते थे और भगवान शिव भी श्री राम को अपना परम उपास्य इष्ट देवता मानते हैं। साक्षात नारायण ने जब नर रूप धारण कर श्री राम के नाम से अवतार ग्रहण किया और शंकर जी शिव रूप में नर रूप की कैसे आराधना कर सकते थे। इसीलिए उन्होंने नर अवतार भगवान श्रीराम की उपासना की तीव्र लालसा को फलीभूत करने के लिए वानर अवतार धारण कर लिया और प्रेम में सेवक का रूप धारण कर उनकी सेवा करने के लिए अंजना मां के गर्भ से प्रकट हो गए। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में हनुमत उपासना कल्याणकारी मार्ग है।