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Kaithal News: कुरांड़ गांव में पुलवामा के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
Sun, 15 Feb 2026 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 15 Feb 2026 12:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। जननायक सेवा दल द्वारा गांव कुराड़ स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों की पावन स्मृति को समर्पित रहा।
संस्था के प्रधान मंजीत बूरा ने बताया कि रक्तदान के लिए 90 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 15 युवा चिकित्सकीय कारणों से रक्तदान नहीं कर सके। शिविर में कुल 75 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। मुख्य अतिथि राजेश अंबरसर ने रक्तदाताओं को बैज लगाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान का महत्व तब समझ में आता है, जब हमारा कोई अपना जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है।
जिला पार्षद विजेंद्र सहारण ने रक्तदान को महादान बताया। शिविर के समापन पर रक्तदाताओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया गया।
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रक्तदान की प्रेरणा छात्र जीवन में मिली थी, जब वे आर्य स्कूल नरवाना में अध्ययनरत थे। उस दौरान डबवाली में एक शादी समारोह के दौरान हुए भीषण अग्निकांड में अनेक लोगों की मृत्यु हो गई थी। नरवाना में एक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने पहली बार रक्तदान किया और तभी से इसे नियमित रूप से जीवन का हिस्सा बना लिया। अब तक वे 62 बार रक्तदान कर चुके हैं। -मंजीत बूरा
बड़े रक्तदाता
राजेंद्र – 34 बार
महावीर जांगड़ा – 31 बार
राकेश काला – 30 बार
सत्यवान बूरा – 30 बार
महिपाल चहल – 30 बार
जसविंद्र कैंदल – 40 बार
महावीर जांगड़ा – 35 बार
अनिल गिल – 35 बार
दिलबाग चहल – 45
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कलायत। जननायक सेवा दल द्वारा गांव कुराड़ स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों की पावन स्मृति को समर्पित रहा।
संस्था के प्रधान मंजीत बूरा ने बताया कि रक्तदान के लिए 90 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 15 युवा चिकित्सकीय कारणों से रक्तदान नहीं कर सके। शिविर में कुल 75 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। मुख्य अतिथि राजेश अंबरसर ने रक्तदाताओं को बैज लगाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान का महत्व तब समझ में आता है, जब हमारा कोई अपना जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है।
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जिला पार्षद विजेंद्र सहारण ने रक्तदान को महादान बताया। शिविर के समापन पर रक्तदाताओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया गया।
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रक्तदान की प्रेरणा छात्र जीवन में मिली थी, जब वे आर्य स्कूल नरवाना में अध्ययनरत थे। उस दौरान डबवाली में एक शादी समारोह के दौरान हुए भीषण अग्निकांड में अनेक लोगों की मृत्यु हो गई थी। नरवाना में एक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने पहली बार रक्तदान किया और तभी से इसे नियमित रूप से जीवन का हिस्सा बना लिया। अब तक वे 62 बार रक्तदान कर चुके हैं। -मंजीत बूरा
बड़े रक्तदाता
राजेंद्र – 34 बार
महावीर जांगड़ा – 31 बार
राकेश काला – 30 बार
सत्यवान बूरा – 30 बार
महिपाल चहल – 30 बार
जसविंद्र कैंदल – 40 बार
महावीर जांगड़ा – 35 बार
अनिल गिल – 35 बार
दिलबाग चहल – 45