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Kaithal News: प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत बनाने का प्रशिक्षण
Sat, 08 Feb 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 08 Feb 2025 01:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। डोहर व देवबन गांव में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसान गोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर सतबीर सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए जीवामृत तैयार करने का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने किसानों को बताया कि जीवामृत तैयार करने के लिए 10 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, पांच किलो गाय का पेशाब, 2.5 किलो गुड़, एक किलो बेसन और 500 ग्राम पुराने बढ़ या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी लेकर, इन सब को 200 लीटर पानी के ड्रम में घोल बनाकर छाया में ढककर रखना है। 10 दिन तक सुबह शाम लकड़ी की छड़ी के साथ घड़ी की सुई की तरह ड्रम में घोल को हिलाना है।
इस प्रकार 10 दिन बाद ये 200 लीटर जीवामृत का घोल एक एकड़ के लिए तैयार हो जाता है। इसको खेत में छिड़काव विधि से भी डाल सकते हैं। खंड कृषि अधिकारी डॉ. जगबीर सिंह लांबा ने किसानों को बताया कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय पर 25 हजार रुपये और घोल बनाने के लिए ड्रम के लिए तीन हजार रुपये अलग से अनुदान दे रही है।
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कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बारे में किसानों को अवगत कराया। उनको बताया गया कि ईकेवाईसी, भूमि सत्यापन और बैंक की ओर से डीबीटी अनिवार्य कर दिया गया है। अगर यह नहीं करवाया है तो अगली किस्त नहीं आएगी। यदि किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा का पंजीकरण नहीं करवाया है तो वह कृषि से संबंधित स्कीम से वंचित रह जाएगा।
इसके अलावा बायोगैस प्लांट के बारे में किसानों को बताया। उन्होंने बताया कि अगर बायोगैस की खाद का इस्तेमाल करते हैं तो खेत में खरपतवार तथा दीमक की समस्या नहीं आती है। इस मौके पर डॉ अनिल गिरधर वस्तु विशेषज्ञ, डॉ रवींद्र रेडू, विनय कुमार एटीएम, अनूप कुमार एटीएम, संदीप कृषि पर्यवेक्षक व किसान जसवीर सिंह, नरेश आदि मौजूद रहे।
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सीवन। डोहर व देवबन गांव में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसान गोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर सतबीर सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए जीवामृत तैयार करने का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने किसानों को बताया कि जीवामृत तैयार करने के लिए 10 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, पांच किलो गाय का पेशाब, 2.5 किलो गुड़, एक किलो बेसन और 500 ग्राम पुराने बढ़ या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी लेकर, इन सब को 200 लीटर पानी के ड्रम में घोल बनाकर छाया में ढककर रखना है। 10 दिन तक सुबह शाम लकड़ी की छड़ी के साथ घड़ी की सुई की तरह ड्रम में घोल को हिलाना है।
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इस प्रकार 10 दिन बाद ये 200 लीटर जीवामृत का घोल एक एकड़ के लिए तैयार हो जाता है। इसको खेत में छिड़काव विधि से भी डाल सकते हैं। खंड कृषि अधिकारी डॉ. जगबीर सिंह लांबा ने किसानों को बताया कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय पर 25 हजार रुपये और घोल बनाने के लिए ड्रम के लिए तीन हजार रुपये अलग से अनुदान दे रही है।
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कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बारे में किसानों को अवगत कराया। उनको बताया गया कि ईकेवाईसी, भूमि सत्यापन और बैंक की ओर से डीबीटी अनिवार्य कर दिया गया है। अगर यह नहीं करवाया है तो अगली किस्त नहीं आएगी। यदि किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा का पंजीकरण नहीं करवाया है तो वह कृषि से संबंधित स्कीम से वंचित रह जाएगा।
इसके अलावा बायोगैस प्लांट के बारे में किसानों को बताया। उन्होंने बताया कि अगर बायोगैस की खाद का इस्तेमाल करते हैं तो खेत में खरपतवार तथा दीमक की समस्या नहीं आती है। इस मौके पर डॉ अनिल गिरधर वस्तु विशेषज्ञ, डॉ रवींद्र रेडू, विनय कुमार एटीएम, अनूप कुमार एटीएम, संदीप कृषि पर्यवेक्षक व किसान जसवीर सिंह, नरेश आदि मौजूद रहे।