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टोकन तो मिल जाता है, रजिस्टरी नहीं होती
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10-कैथल। रजिस्ट्री न होने पर लघु सचिवालय में रोष प्रकट करते हुए लोग।
- फोटो : Kaithal
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कैथल। जिला मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय में रजिस्टरी न होने पर मंगलवार को सायं पांच बजे के बाद लोगों ने रोष जताया। उन्होंने अधिकारियों पर जानबूझकर परेशान करने के आरोप जड़ते हुए कहा कि उन्हें टोकन तो मिल जाता है लेकिन रजिस्टरी नहीं की जाती। बाद में उन्होंने डीसी से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की।
नाराजगी जतातने वाले गांव बरोट निवासी संजय कुमार ने बताया कि वह चार मई से हर रोज टोकन लगवाने के लिए आता है। टोकन लग जाता है लेकिन रजिस्टरी नहीं हो पा रही। आरोप लगाया कि पांच बजे के बाद तहसीलदार चले जाते हैं। उसने कहा कि उसके टोकन का समय सुबह का हो या दोपहर बाद का, उनका नंबर नहीं आ रहा। वे हर रोज महिलाओं को, नंबरदार को लेकर आते हैं। पूरा-पूरा दिन इंतजार करना पड़ता है। काम धंधे भी खराब हो रहे हैं पर रजिस्टरी नहीं हो पा रही। उसने बताया कि उसके बयाने की आखिरी तिथि 11 मई है, यदि यह समय अवधि निकल गई तो कौन जिम्मेवार होगा?
इसी प्रकार से सेगा निवासी कर्मबीर ने कहा कि एक तहसीलदार पर तीन से चार जगहों की रजिस्टरी का काम है। इससे लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। उनका दोपहर 12 बजे का टोकन था। इसके बावजूद उनकी रजिस्टरी नहीं हुई। तहसीलदार कहते हैं कि उन्हें पांच बजे के बाद रजिस्टरी की अनुमति नहीं है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यहां केवल सिफारिश वालों की रजिस्टरी हो रही है। बाकी लोग धक्के खाने के लिए मजबूर हैं।
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इस संबंध में नायब तहसीलदार आशीष कुमार ने कहा कि उनके पास कैथल व कलायत का प्रभार है। मंगलवार दोपहर बाद तकनीकी दिक्कत आ गई। इस कारण रजिस्टरी का काम लंबित है। प्रयास किया जा रहा है कि लोगों की नियमानुसार रजिस्टरी हो।
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नाराजगी जतातने वाले गांव बरोट निवासी संजय कुमार ने बताया कि वह चार मई से हर रोज टोकन लगवाने के लिए आता है। टोकन लग जाता है लेकिन रजिस्टरी नहीं हो पा रही। आरोप लगाया कि पांच बजे के बाद तहसीलदार चले जाते हैं। उसने कहा कि उसके टोकन का समय सुबह का हो या दोपहर बाद का, उनका नंबर नहीं आ रहा। वे हर रोज महिलाओं को, नंबरदार को लेकर आते हैं। पूरा-पूरा दिन इंतजार करना पड़ता है। काम धंधे भी खराब हो रहे हैं पर रजिस्टरी नहीं हो पा रही। उसने बताया कि उसके बयाने की आखिरी तिथि 11 मई है, यदि यह समय अवधि निकल गई तो कौन जिम्मेवार होगा?
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इसी प्रकार से सेगा निवासी कर्मबीर ने कहा कि एक तहसीलदार पर तीन से चार जगहों की रजिस्टरी का काम है। इससे लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। उनका दोपहर 12 बजे का टोकन था। इसके बावजूद उनकी रजिस्टरी नहीं हुई। तहसीलदार कहते हैं कि उन्हें पांच बजे के बाद रजिस्टरी की अनुमति नहीं है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यहां केवल सिफारिश वालों की रजिस्टरी हो रही है। बाकी लोग धक्के खाने के लिए मजबूर हैं।
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इस संबंध में नायब तहसीलदार आशीष कुमार ने कहा कि उनके पास कैथल व कलायत का प्रभार है। मंगलवार दोपहर बाद तकनीकी दिक्कत आ गई। इस कारण रजिस्टरी का काम लंबित है। प्रयास किया जा रहा है कि लोगों की नियमानुसार रजिस्टरी हो।