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धर्म की स्थापना के लिए प्रभु लेते हैं विभिन्न रूपों में अवतार : कृष्णानंद
Thu, 19 Jun 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:04 AM IST
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कलायत। श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे और पूरे पंडाल में भक्ति का माहौल बना रहा।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर कथा पंडाल को फूलों और गुब्बारों से सुंदरता से सजाया गया था। कथा व्यास आचार्य कृष्णानंद जी महाराज ने भगवान की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब प्रभु ने धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लिया है। मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के समय धरती की पुकार पर भगवान विष्णु ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार लिया। इसी प्रकार त्रेता युग में रावण के आतंक से पीड़ित धरा को उद्धार देने हेतु भगवान राम ने अवतार धारण किया।
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आचार्य कृष्णानंद ने कहा कि श्रीकृष्ण की माखन चोरी केवल लीला नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि जीवन का सार आत्मा रूपी माखन में है। उन्होंने बताया कि प्रभु हमें यह सिखाते हैं कि संसार के असार भोगों में समय और ऊर्जा लगाने के बजाय अपने भीतर स्थित परमात्मा की प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। यही जीवन का कल्याण है। श्रीमद्भागवत को जीवन का सार और सृष्टि का आधार बताते हुए उन्होंने आग्रह किया कि माता-पिता बच्चों को धार्मिक आयोजनों से अवश्य जोड़ें। आयोजक मंडल ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। संवाद
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर कथा पंडाल को फूलों और गुब्बारों से सुंदरता से सजाया गया था। कथा व्यास आचार्य कृष्णानंद जी महाराज ने भगवान की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब प्रभु ने धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लिया है। मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के समय धरती की पुकार पर भगवान विष्णु ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार लिया। इसी प्रकार त्रेता युग में रावण के आतंक से पीड़ित धरा को उद्धार देने हेतु भगवान राम ने अवतार धारण किया।
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आचार्य कृष्णानंद ने कहा कि श्रीकृष्ण की माखन चोरी केवल लीला नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि जीवन का सार आत्मा रूपी माखन में है। उन्होंने बताया कि प्रभु हमें यह सिखाते हैं कि संसार के असार भोगों में समय और ऊर्जा लगाने के बजाय अपने भीतर स्थित परमात्मा की प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। यही जीवन का कल्याण है। श्रीमद्भागवत को जीवन का सार और सृष्टि का आधार बताते हुए उन्होंने आग्रह किया कि माता-पिता बच्चों को धार्मिक आयोजनों से अवश्य जोड़ें। आयोजक मंडल ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। संवाद