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मंडियों में पहुंचा हजारों मीट्रिक टन धान, पहले दिन हो पाई नाममात्र खरीद
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Thousands of metric tons of paddy reached the mandis, there was a nominal purchase on the first day
- फोटो : Kaithal
जिले की मंडियों में रविवार को धान की खरीद का कार्य शुरू तो हो गया, लेकिन नाममात्र खरीद ही पहले दिन हो पाई। मंडियों में पड़ी हजारों मीट्रिक टन पीआर धान में से ती अक्तूबर को मात्र 258 एमटी के करीब धान की खरीद कार्य हो पाई। खरीद की मांग को लेकर किसानों ने मंडी में जमकर हंगामा किया।
किसान सुबह ही खरीद को देखते हुए मंडी में पहुंचे थे, लेकिन जब खरीद के लिए अधिकारी नहीं पहुंचे तो किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसान और आढ़तियों ने मार्केट कमेटी कार्यालय में पहुंच अधिकारियों को चेताया कि अगर धान की खरीद शुरू नहीं की गई तो वे मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला लगा देंगे। दोपहर को डीएफएससी के अधिकारी मंडी में पहुंचे और 12 बजे के बाद धान की खरीद से संबंधित कार्य शुरू किया।
किसान सतपाल दिल्लोवाली, धर्म सिंह, रामनिवास, नरेश, रवि, सुभाष व रामकला ने बताया कि पहले तो किसानों को धान की खरीद का समय आगे बढ़ाकर परेशान किया गया। बाद में जब किसानों ने अपनी मांग के आगे सरकार को झुकाया तो मिलर्स ने धान की खरीद करने से मना कर दिया है। अब सरकार ने तीन अक्टूबर से धान एजेंसियों के माध्यम से खरीद करने की बात तो कह दी, लेकिन कभी नमी तो कभी शेड्यूल के अनुसार फसल नहीं लाने का बहाना बनाकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
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पांच दिनों से मंडी में बैठे किसानों की फसल नहीं खरीदी जा रही। आज भी दोपहर को 12 बजे से खरीद शुरू करने के लिए कहा गया, लेकिन मंडी में सैकड़ों ढेरियों की पड़ताल करने के बावजूद एक भी ढेरी नहीं खरीदी गई। गुस्साए किसानों ने अधिकारियों के सामने ही कहा कि फसल की इतनी बेकद्री से अच्छा तो ये रहता कि वे अपनी फसल गोशाला में ही दान कर देते।
डीएफएससी प्रमोद कुमार ने बताया कि रविवार को हैफेड ने चीका में 228 एमटी और कैथल में डीएफएससी ने 30 एमटी धान की खरीद की। कैथल शहर की अनाज मंडी में केवल 200 क्विंटल धान ही पहले दिन बिक पाई।
गांव बाबा लदाना से फसल लेकर पहुंचे किसान धर्म सिंह ने बताया कि 30 सितंबर से वह मंडी में आया हुआ है और फसल बिकने का इंतजार कर रहा है। आज तक कोई फसल को देखने के लिए भी नहीं आया। जो फसल खेतों में खड़ी है, उसकी देखभाल भी जरूरी है। यहां बैठने के कारण उनका खेतों का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
सीवन से पीआर धान लेकर मंडी में पहुंचे किसान अमरजीत ने बताया कि वह चार दिन पहले धान लेकर मंडी में आया था। अब तक फसल नहीं बिकी है। सीजन में किसान के लिए मंडी में चार-चार दिन तक रहना बड़ा मुश्किल होता है।
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किसान सुबह ही खरीद को देखते हुए मंडी में पहुंचे थे, लेकिन जब खरीद के लिए अधिकारी नहीं पहुंचे तो किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसान और आढ़तियों ने मार्केट कमेटी कार्यालय में पहुंच अधिकारियों को चेताया कि अगर धान की खरीद शुरू नहीं की गई तो वे मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला लगा देंगे। दोपहर को डीएफएससी के अधिकारी मंडी में पहुंचे और 12 बजे के बाद धान की खरीद से संबंधित कार्य शुरू किया।
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किसान सतपाल दिल्लोवाली, धर्म सिंह, रामनिवास, नरेश, रवि, सुभाष व रामकला ने बताया कि पहले तो किसानों को धान की खरीद का समय आगे बढ़ाकर परेशान किया गया। बाद में जब किसानों ने अपनी मांग के आगे सरकार को झुकाया तो मिलर्स ने धान की खरीद करने से मना कर दिया है। अब सरकार ने तीन अक्टूबर से धान एजेंसियों के माध्यम से खरीद करने की बात तो कह दी, लेकिन कभी नमी तो कभी शेड्यूल के अनुसार फसल नहीं लाने का बहाना बनाकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
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पांच दिनों से मंडी में बैठे किसानों की फसल नहीं खरीदी जा रही। आज भी दोपहर को 12 बजे से खरीद शुरू करने के लिए कहा गया, लेकिन मंडी में सैकड़ों ढेरियों की पड़ताल करने के बावजूद एक भी ढेरी नहीं खरीदी गई। गुस्साए किसानों ने अधिकारियों के सामने ही कहा कि फसल की इतनी बेकद्री से अच्छा तो ये रहता कि वे अपनी फसल गोशाला में ही दान कर देते।
डीएफएससी प्रमोद कुमार ने बताया कि रविवार को हैफेड ने चीका में 228 एमटी और कैथल में डीएफएससी ने 30 एमटी धान की खरीद की। कैथल शहर की अनाज मंडी में केवल 200 क्विंटल धान ही पहले दिन बिक पाई।
गांव बाबा लदाना से फसल लेकर पहुंचे किसान धर्म सिंह ने बताया कि 30 सितंबर से वह मंडी में आया हुआ है और फसल बिकने का इंतजार कर रहा है। आज तक कोई फसल को देखने के लिए भी नहीं आया। जो फसल खेतों में खड़ी है, उसकी देखभाल भी जरूरी है। यहां बैठने के कारण उनका खेतों का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
सीवन से पीआर धान लेकर मंडी में पहुंचे किसान अमरजीत ने बताया कि वह चार दिन पहले धान लेकर मंडी में आया था। अब तक फसल नहीं बिकी है। सीजन में किसान के लिए मंडी में चार-चार दिन तक रहना बड़ा मुश्किल होता है।