फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   third, eye, wating, fot, oppration

तीसरी आंख को है ऑपरेशन की दरकार

Tue, 03 Jan 2017 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कैथ्ाल
अमर उजाला ब्यूरो, कैथ्ाल Updated Tue, 03 Jan 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
third, eye, wating, fot, oppration
cctv - फोटो : कैथ्‍ाल
नसीब सैनी
विज्ञापन

कैथल। शहर को तीसरी आंख की सुरक्षा देने की व्यवस्था करीब दस साल बाद भी अधूरी है। दो सांसद दस सालों में दस-दस लाख रुपये की राशि देने का एलान कर चुके हैं। शहर में कहने को 70 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लेकिन ये किसी काम के नहीं। पुलिस को इन कैमरों से कोई मदद नहीं मिल रही। जिसका लाभ अपराधी उठा रहे हैं। पुलिस कई बार जिला प्रशासन को इस बारे में लिख चुकी है। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

दस साल से चल रही है कवायद
शहर में प्रमुख चौक चौराहों पर सीसीटीवी लगाए जाने की कवायद पिछले दस साल से चल रही है। पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने कैमरों के लिए 10 लाख रुपये की ग्रांट दी थी। इसके बाद शहर में कैमरे लगे। लेकिन खाली नाम के। आढ़ती मनीष की हत्या के बाद सांसद राजकुमार सैनी ने भी दस लाख रुपये की ग्रांट देने का एलान किया। लेकिन हालात जस के तस हैं।
विज्ञापन


शहर में 70 कैमरे लगे हैं, लेकिन सिर्फ नाम के
शहर में 34 प्वाइंट्स पर 70 कैमरे लगे हैं लेकिन यह बस नाम भर के हैं। खुद नगर परिषद अधिकारी 60 प्रतिशत कैमरे ठीक होने की बात स्वीकार रहे हैं। लेकिन असल में ये लगभग सभी कैमरे पुलिस के किसी काम के नहीं। पुलिस सूत्रों की मानें तो आज तक किसी कैमरे से पुलिस को मदद नहीं मिली। अधिकतर कैमरों में डीवीआर ही नहीं है। कई जगह केवल कैमरे लटके हैं, उनकी रिकॉर्डिंग संबंधी व्यवस्था नहीं है। कई लोकेशन ऐसी हैं, जहां ये कैमरे भी नहीं लगे। इनमें से 13 चौक-चौराहों पर 52 तो पार्कों में 19 जगहों पर कैमरे लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस द्वारा कई बार लिखा जा चुका है प्रशासन को
पुलिस जांच में जिस तरह से पुलिस को सीसीटीवी फुटेज की जरूरत होती है, उस हिसाब से कई बार जिला प्रशासन को लिखा जा चुका है। लेकिन करीब 10 से ज्यादा बार डीसी का तबादला हो चुका है। नगर परिषद का नए सिरे से गठन हो चुका है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं है। कई बड़ी वारदातों के बाद ही इन सीसीटीवी कैमरों की याद आती है। मनीष मित्तल हत्याकांड, सुरेंद्र ग्योंग द्वारा हाल ही में डॉक्टर से फिरौती वसूली का मामला हो या फिर कोई अन्य बड़ी वारदात। चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त हों तो अपराधी को आसानी से पकड़ा जा सकता है।

सिविल प्रशासन को लिखा जा चुका है पत्र
एसपी सुरमे प्रताप सिंह ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे अपराधिक घटनाओं पर अंकुश के लिए बहुत जरूरी हैं। वे खुद सिविल प्रशासन को इस बारे में लिख चुके हैं। ये दुरुस्त हों तो कई घटनाएं जल्दी सुलझ सकती हैं।


सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के रुलदू राम ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज शहर के लिए बहुत जरूरी हैं। इन्हें दुरुस्त रखा जाना चाहिए। ताकि अपराध पर अंकुश लग सके।

अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं है कि शहर में सीसीटीवी फुटेज के लिए सभी कैमरों के लिए एक जगह रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की जानी थी। यह गंभीर मसला है। इस बारे में अभी अधिकारियों से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार 60 प्रतिशत कैमरे ठीक हैं। फिर भी पता लगाया जाएगा। रिकॉर्डिंग, कंट्रोल रूम हो या फिर कोई अन्य कमी, उसे दूर कर शहर की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया जाएगा।
यशपाल प्रजापति, चेयरमैन नगर परिषद, कैथल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed