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Kaithal News: नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की...
Sun, 17 Aug 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 17 Aug 2025 01:44 AM IST
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कैथल श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में सजाया गया अर्जुन रथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिलेभर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। देर रात जैसे ही भगवान कृष्ण के जन्म का समय हुआ, पूरा वातावरण नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के जयकारों से गूंज उठा और माहौल भक्तिमय हो गया। इसके बाद प्रसाद वितरित किया गया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना और कान्हा को झूला झुलाते हुए व्रत रखा। शुभ मुहूर्त पर व्रत खोले गए। सुबह प्रभात फेरी भी निकाली गई, जिसमें राधे-राधे और हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की नारों से पूरा शहर कृष्णमय हो गया।
प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, गीता भवन, हनुमान वाटिका, शिव शक्ति धाम, नीलकंठ मंदिर समेत सभी राधा-कृष्ण मंदिरों को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। मंदिरों में दिनभर भक्तों की भीड़ उमड़ी। घर-घर में भी महिलाओं ने लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर झूला झुलाया। शाम को मंदिरों में सजीव झांकियां और रास-लीला आकर्षण का केंद्र रहीं। देर रात बारह बजे जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं ने उपवास खोला और पूजा-अर्चना की। रातभर मंदिरों में भजन-कीर्तन चलते रहे।
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कैथल। जिलेभर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। देर रात जैसे ही भगवान कृष्ण के जन्म का समय हुआ, पूरा वातावरण नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के जयकारों से गूंज उठा और माहौल भक्तिमय हो गया। इसके बाद प्रसाद वितरित किया गया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना और कान्हा को झूला झुलाते हुए व्रत रखा। शुभ मुहूर्त पर व्रत खोले गए। सुबह प्रभात फेरी भी निकाली गई, जिसमें राधे-राधे और हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की नारों से पूरा शहर कृष्णमय हो गया।
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प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, गीता भवन, हनुमान वाटिका, शिव शक्ति धाम, नीलकंठ मंदिर समेत सभी राधा-कृष्ण मंदिरों को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। मंदिरों में दिनभर भक्तों की भीड़ उमड़ी। घर-घर में भी महिलाओं ने लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर झूला झुलाया। शाम को मंदिरों में सजीव झांकियां और रास-लीला आकर्षण का केंद्र रहीं। देर रात बारह बजे जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं ने उपवास खोला और पूजा-अर्चना की। रातभर मंदिरों में भजन-कीर्तन चलते रहे।
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