फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   There was devastation caused by the collapse of ring dam and tow wall but there was no recovery for a year.

Kaithal News: रिंग बांध व टो वॉल ध्वस्त होने से मची थी तबाही पर साल भर सुध नहीं आई

Fri, 28 Jun 2024 04:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 28 Jun 2024 04:25 AM IST
विज्ञापन
There was devastation caused by the collapse of ring dam and tow wall but there was no recovery for a year.
गुरमीत सीड़ा
विज्ञापन

गुहला-चीका। पिछले वर्ष जुलाई माह में घग्गर नदी में आई बाढ़ के कारण जहां कई जगहों से रिंग बांध टूट गया था। वहीं, इस पानी ने गुहला क्षेत्र के बचाव के लिए बनाई गई टो वॉल को भी ध्वस्त कर दिया था। टो वॉल टूटने के बाद लाखों क्यूसेक पानी तेजी से गुहला क्षेत्र में फैल गया था। इससे क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। टो वॉल को टूटे एक साल का समय बीत चुका है।

अब मानसून दोबारा आने को है, लेकिन सरस्वती डिविजन पिछले एक साल में टूटी हुई टो वॉल को पक्का करने की बजाए सिर्फ योजनाएं बनाने में ही उलझा रहा, जबकि इसके लिए तीन करोड़ का बजट भी पास हो चुका है। अब जबकि मानसून करीब है तो विभाग मिट्टी के थैले लगा पानी से बचाव के प्रबंध कर रहा है, लेकिन ये प्रयास कितने कारगर हो पाएंगे, यह तो समय ही बताएगा।
विज्ञापन


यदि इस बार भी घग्गर नदी में पिछले वर्ष की तरह भारी मात्रा में पानी आया तो मिट्टी के थैलों से पाटे गए टो वॉल के हिस्से शायद ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में एकबार फिर क्षेत्रवासियों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


घग्गर नदी के पास बसे और पिछले साल बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रकोप झेलने वाले गांव टटियाना निवासी गुरजंट सिंह, विक्रम सिंह, हरजिंद्र सिंह, बिंद्र टटियाना, जसपाल पाली, केवल सदरेहड़ी ने बताया कि गुहला क्षेत्र में बाढ़ के पानी ने न केवल लाखों एकड़ फसल बर्बाद की थी, बल्कि चार लोगों की जान लेने के साथ दर्जनों पशु भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। लोगों ने कहा कि नहरी विभाग व सरस्वती डिविजन हर साल सिर्फ कागजों में ही बाढ़ बचाव के काम करते हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है।

ग्रामीणों ने बताया कि टो वॉल को टूटे एक साल गुजर चुका है, लेकिन विभाग इसे पक्का नहीं कर सका और अब बरसात का मौसम सिर पर आया तो मिट्टी के थैलों से कटाव को मजबूत करने की खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस बार भी पिछले साल की तरह ही घग्गर नदी में पानी आया तो तबाही कहीं ज्यादा होगी और इसके लिए विभाग और सरकार जिम्मेदार होगी। संवाद


पहले जो टो वॉल बनाई गई थी, उसके ऊपरी हिस्सों में सरिया नहीं डाला गया था। इसके चलते वह पानी का दबाव नहीं झेल पाई। घग्गर नदी में सवा लाख क्यूसेक पानी आने के बाद भी टो वॉल न टूटे। इसको लेकर विभाग सरकारी इंस्टीट्यूट से वॉल का डिजाइन बनवा रहा है। टो वॉल के निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये का बजट आ चुका है और अलग एक दो सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यदि जुलाई माह में ज्यादा बरसात नहीं हुई तो टो वॉल का निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले वॉल को मजबूत करने के लिए कार्य कराए जा रहे हैं। -दिग्विजय शर्मा, एक्सईएन सरस्वती डिविजन नंबर-3 कुरुक्षेत्र।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed