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Kaithal News: नए वर्ष में सोमवती अमावस्या का संयोग नहीं
Sun, 29 Dec 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 29 Dec 2024 01:28 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत/कैथल। नए वर्ष 2025 में सोमवती अमावस्या का संयोग नहीं है इसलिए वर्ष 2024 में पौष मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का अपना अलग महत्व है। इस दिन स्नान और दान के साथ पितृ पूजा भी की जाती है।
मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा ग्रह दोष और पितृ दोष आदि से भी छुटकारा मिलता है।
गौरतलब है कि हमारे ग्रंथों में सोमवती अमावस्या का सभी अमावस्या में से ज्यादा महत्व बताया गया है। इस दिन विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान करने उपरांत दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी इस दिन उनकी पूजा-अर्चना और पिंडदान किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी इस दिन पितरों की पूजा-अर्चना करते हैं उनको ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है।
उन्होंने बताया कि इस अमावस्या के बाद अगली सोमवती अमावस्या 2026 में आएगी इसलिए इसका और भी ज्यादा महत्व बढ़ जाता है। शांडिल्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 04: 01 से होगा और समापन 31 दिसंबर को सुबह 03: 56 पर होगा। इसलिए सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर के दिन मनाई जाएगी।
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सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने उपरांत दान करने का शुभ मुहूर्त का समय सुबह 05:24 से शुरू होकर 06:19 तक रहेगा जो सबसे शुभ समय है। सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग भी बनेगा, जो सुबह 08: 32 तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि कहा जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन गंगा या पवित्र तीर्थ नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख समृद्धि आती है। इस दिन विशेष तौर पर गर्म कपड़े, गुड़, तिल का दान करना काफी सही माना जाता है और दान करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है तो उसके लिए सफेद रंग की चीज दान करें। उससे चंद्र दोष दूर होगा। पितृ दोष दूर करने के लिए पितरों के लिए पूजा-पाठ और पिंडदान करें। इस दिन चना, मसूर दाल, सरसों का साग और मूली खाना वर्जित माना जाता है और किसी का अनादर न करें।
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कलायत/कैथल। नए वर्ष 2025 में सोमवती अमावस्या का संयोग नहीं है इसलिए वर्ष 2024 में पौष मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का अपना अलग महत्व है। इस दिन स्नान और दान के साथ पितृ पूजा भी की जाती है।
मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा ग्रह दोष और पितृ दोष आदि से भी छुटकारा मिलता है।
गौरतलब है कि हमारे ग्रंथों में सोमवती अमावस्या का सभी अमावस्या में से ज्यादा महत्व बताया गया है। इस दिन विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान करने उपरांत दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी इस दिन उनकी पूजा-अर्चना और पिंडदान किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी इस दिन पितरों की पूजा-अर्चना करते हैं उनको ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है।
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उन्होंने बताया कि इस अमावस्या के बाद अगली सोमवती अमावस्या 2026 में आएगी इसलिए इसका और भी ज्यादा महत्व बढ़ जाता है। शांडिल्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 04: 01 से होगा और समापन 31 दिसंबर को सुबह 03: 56 पर होगा। इसलिए सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर के दिन मनाई जाएगी।
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सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने उपरांत दान करने का शुभ मुहूर्त का समय सुबह 05:24 से शुरू होकर 06:19 तक रहेगा जो सबसे शुभ समय है। सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग भी बनेगा, जो सुबह 08: 32 तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि कहा जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन गंगा या पवित्र तीर्थ नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख समृद्धि आती है। इस दिन विशेष तौर पर गर्म कपड़े, गुड़, तिल का दान करना काफी सही माना जाता है और दान करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है तो उसके लिए सफेद रंग की चीज दान करें। उससे चंद्र दोष दूर होगा। पितृ दोष दूर करने के लिए पितरों के लिए पूजा-पाठ और पिंडदान करें। इस दिन चना, मसूर दाल, सरसों का साग और मूली खाना वर्जित माना जाता है और किसी का अनादर न करें।