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भक्ति के लिए कोई भी उम्र नहीं होती बाधा : कृष्णानंद

Wed, 18 Jun 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 18 Jun 2025 01:10 AM IST
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There is no age barrier for devotion: Krishnananda
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में दो दिनों से चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ने मंगलवार को अपने तीसरे दिन में प्रवेश किया। कथा व्यास आचार्य कृष्णानंद ने श्रद्धालुओं को भागवत ज्ञान गंगा में डुबकी लगवाते हुए कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाएं तो पहले सोच-समझ लें। यह सुनिश्चित करें कि जहां आप जा रहे हैं, वहां आपके इष्ट या गुरु का अपमान न हो।

कथा के दौरान आचार्य कृष्णानंद ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की बात न मानने और

सती के पिता के घर पर अपमानित होने के कारण सती ने स्वयं को अग्नि में स्वाहा कर लिया था।

भागवत कथा में उत्तानपाद वंश के ध्रुव चरित्र को बताते हुए आचार्य ने कहा कि ध्रुव को सौतेली मां सुरुचि द्वारा अपमानित किया गया, लेकिन उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे परिवार एक बड़े संकट से बचा। उन्होंने कहा कि परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य और संयम आवश्यक हैं।
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ध्रुव की तपस्या और भगवान श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा सुनाते हुए आचार्य ने बताया कि भक्ति की प्रेरणा बचपन में देना आवश्यक है, क्योंकि बचपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है जिसे जैसा चाहे वैसा ढाला जा सकता है। ध्रुव की साधना, सत्कर्म और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा के फलस्वरूप ही उन्हें वैकुंठ लोक प्राप्त हुआ।
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आचार्य ने कहा कि संसार में जब-जब पाप बढ़ता है, भगवान धरती पर किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं। उन्होंने बताया कि कलयुग में भी मनुष्य को भगवान कृष्ण द्वारा सिखाए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए ताकि जीवन सफल हो सके।


प्रह्लाद चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान नृसिंह रूप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रकट हुए

क्योंकि प्रह्लाद का विश्वास था कि मेरे भगवान उस लोहे के खंभे में भी विद्यमान हैं। भगवान ने इसी विश्वास को पूर्ण किया और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की।

कथा के दौरान राधे रानी को समर्पित भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और नाचे। तीसरे दिन की कथा समाप्ति पर आयोजक मंडल ने श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया।
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