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दूसरे प्रदेशों से विवाहिताओं की जाति पता करने में छूट रहे हैं पसीने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 10:51 PM IST
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There is a sweat in knowing the caste of married women from other states.
जिले में परिवार पहचान पत्र में दर्ज की गई जाति की वेरिफिकेशन का काम इस समय पटवारियों के माध्यम से किया जा रहा है। जिसमें पटवारी गांव दर गांव जाकर लोगों के प्रमाण पत्र में बताई गई जाति के बारे में पड़ताल कर रहे हैं। इस कार्य में प्रदेश के लोगों की जाति पता करने में परेशानी नहीं है।
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जिले में बनाए गए परिवार पहचान पत्र की वेरिफिकेशन की जानी है। क्योंकि एक बार इसकी वेरिफिकेशन हो गई तो संबंधित व्यक्ति को अलग से जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं रहेगी। उसके परिवार पहचान पत्र में जो जाति दर्ज होगी, उसे ही हर काम में स्वीकृत माना जाएगा।
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सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की वेरिफिकेशन का काम पटवारियों के माध्यम से किया जा रहा है। जिसमें पटवारी गांव के पंच, सरपंच, नंबरदार व चौकीदार तक की सलाह ले रहे हैं। इस जांच के कार्य में स्थानीय लोगों व प्रदेश में ही विवाहित लशेगों की जाति के बारे में तस्दीक में परेशानी नहीं हैं। समस्या उन केसों में आ रही है, जिसमें व्यक्ति हरियाणा के बाहर यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ व अन्य प्रदेशों में विवाहित है। उन्होंने जिन भी परिस्थितियों में विवाह किया है, चाहे वे खरीद कर लाए हैं या फिर केवल विवाह ही दूर किया है, वहां से विवाहिताओं की जाति की तस्दीक करना मुश्किल हो रहा है।
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एक पटवारी ने बताया कि सामाजिक तौर पर भी कई परिवार ऐसी जानकारी नहीं दे रहे। यदि कोई व्यक्ति सामान्य जाति से है और वह दूसरे प्रदेश से अनुसूचित जाति की महिला से विवाहित है तो वह सामाजिक तौर पर उसकी जाति का खुलासा नहीं करना चाहता। इसी प्रकार से यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति से है और वह सामान्य जाति से महिला के साथ विवाहत है तो वह भी अपने समाज में इस तथ्य को छुपाने के लिए महिला की जाति का खुलासा नहीं कर रहा है। दोनों ही स्थितियों में पटवारी के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
एक पटवारी ने यह भी कहा कि वे पहले संबंधित परिवार से ही पूछते हैं। यदि वे सही बताते हैं तो ठीक है, यदि संदेह होता है तो बाद में पंच, सरपंच व अन्य जिम्मेवार लोगों की मदद ली जाती है। इसके बाद भी कुछ संदेह रहता है तो परिवार को समझाना पड़ता है कि असली जाति बताने पर भविष्य में उन्हें कई तरह की योजनाओं के लिए पात्रता या अपात्रता फाइनल होगी, तभी जाकर लोग जाति बता रहे हैं। जबकि सभी को अपनी असली जाति बतानी जरूरी है। तभी यह रिकार्ड अपडेट हो पाएगा।

एडीसी सतबीर कुंडू ने कहा कि कुछ पटवारियों के सामने यह समस्या आई है। उनके संज्ञान में भी बात आई है। लेकिन परिवार को संबंधित महिला की जाति सही बतानी पड़ेगी। उसे दूसरे प्रदेश में जाकर थोड़ा ही वेरिफाई किया जाएगा। जो गलत बताएगा, उसकी जिम्मेदारी उस परिवार की ही होगी। क्योंकि जाति के आधार पर भविष्य में कई तरह की योजनाओं के लिए पात्रता या अपात्रता निर्धारित होनी है। इसीलिए लोगों से अपील है कि वे सर्वे में पटवारी को अपने परिवार के सभी सदस्यों की सही जाति की जानकारी दें।
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