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सरकारी मुलाजिमों के नाम से चर्चित गांव कौलेखां में चल रहा सहमति का दौर
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कैथल। सरकारी मुलाजिमों के नाम से चर्चित गांव कौलेखां में पिछले चार प्लान से पंचायत चुनाव के दौरान सर्वसम्मति अपना सरपंच चुना जा रहा है। इस बार भी सर्वसम्मति से सरपंच चुनने के लिए गांव में पंचायतों का दौर चल रहा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गांव में आपसी भाईचारा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में विजय नंबरदार को सर्वसम्मति से सरपंच का ताज सौंप था। इसके बाद चार योजनाओं से गांव में पंचायत कर सर्वसम्मति से सरपंच चुन रहे हैं। इस बार भी सहमति से आपसी भाईचारा निभाने की तैयारी है।
गौरतलब है कि गांव में लगभग 2600 वोट हैं। लगभग हर घर में सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति है। गांव में सत्र न्यायालय न्यायाधीश से लेकर चपरासी तक के कर्मचारी विभिन्न विभागों में गांव ने दिए हैं। गांव से जिला सत्र न्यायालय न्यायाधीश दीवान सिंह सहारण, एडीसी सुरेंद्र, जेल अधीक्षक सत्यवान, नहरी विभाग, पुलिस विभाग में 10 इंस्पेक्टर, 20 से 40 के करीब मुख्याध्यापक, पुलिस कर्मचारी, रेलवे में 20 के करीब, एक्सईएन मार्केट कमेटी, बैंक मैनेजर, चालक, परिचालक, अध्यापक आदि के पदों पर गांव से लगभग हर घर में नौकरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सामुदायिक केंद्र, शादी विवाह के लिए पैलेस, पीने के पानी का प्रबंध सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। आज तक गांव से महज पुलिस के पास केवल पांच केस ही गए हैं। अन्य लड़ाई झगड़ा सहित केस गांव ने अपने स्तर पर ही सुलझा लिए जाते हैं। गांव में नशा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। नशा बेचने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है।
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गांव में स्टेडियम का प्रबंध हो
ग्रामीण विक्रम ने बताया कि गांव में स्टेडियम का प्रबंध नहीं है। गांव के बच्चों को खेलने के लिए इधर- उधर भटकना पड़ता है। गांव में खेल स्टेडियम का प्रबंध होना चाहिए ताकि गांव से अच्छे खिलाड़ी निकल सकें। खेल मैदान न होने के कारण खिलाड़ी परेशान है। सड़कों पर दौड़ लगवाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
गांव में उखड़ी हैं गलियां
गांव कोलेखां के सतीश ने कहा कि गांव में फिलहाल कई गलियां उखड़ी हुई है। उखड़ी गलियों में बारिश के समय कीचड़ जमा हो जाता है। इससे आवागमन में दिक्कत होती है। अब नए सरपंच से यही उम्मीद रहेगी कि वह गांव की लगभग गलियों को दोबारा से पक्का करवाएं। पानी निकासी भी गांव की मुख्य समस्या है इस तरफ भी ध्यान देने की गांव में जरूरत है।
गांव का साझा काम करने वाला सरपंच
गांव कोलेखां निवासी एडवोकेट मनोज सहारण ने कहा कि गांव का साझा काम करने वाला सरपंच को सर्वसम्मति से चुनेंगे। जो सरपंच गांव में भाईचारा बनाए रखे। पुलिस तक गांव के किसी को जाने की जरूरत न पड़े। गांव की मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान दे। गांव में ज्यादा से ज्यादा विकास करवाएं। सभी के सुख-दुख में साथ खड़ा रहे।
शिक्षित और समझदार को चुनेंगे सरपंच
कोलेखंा गांव निवासी देवेंद्र सहारण ने कहा कि गांव में पिछली चार योजनाओं से पढ़ा-लिखा सरंपच सर्वसम्मति से चुन रहे है। इस कारण ही गांव में विकास कार्य अच्छे हो रहे है। इस बार भी सर्व समिति से पढ़ा लिखा सरपंच को चुनने की कोशिश की जा रही है, ताकि गांव में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य हो सकें। शिक्षित और समझदार को ही सरपंच चुनेंगे।
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गौरतलब है कि गांव में लगभग 2600 वोट हैं। लगभग हर घर में सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति है। गांव में सत्र न्यायालय न्यायाधीश से लेकर चपरासी तक के कर्मचारी विभिन्न विभागों में गांव ने दिए हैं। गांव से जिला सत्र न्यायालय न्यायाधीश दीवान सिंह सहारण, एडीसी सुरेंद्र, जेल अधीक्षक सत्यवान, नहरी विभाग, पुलिस विभाग में 10 इंस्पेक्टर, 20 से 40 के करीब मुख्याध्यापक, पुलिस कर्मचारी, रेलवे में 20 के करीब, एक्सईएन मार्केट कमेटी, बैंक मैनेजर, चालक, परिचालक, अध्यापक आदि के पदों पर गांव से लगभग हर घर में नौकरी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सामुदायिक केंद्र, शादी विवाह के लिए पैलेस, पीने के पानी का प्रबंध सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। आज तक गांव से महज पुलिस के पास केवल पांच केस ही गए हैं। अन्य लड़ाई झगड़ा सहित केस गांव ने अपने स्तर पर ही सुलझा लिए जाते हैं। गांव में नशा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। नशा बेचने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है।
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गांव में स्टेडियम का प्रबंध हो
ग्रामीण विक्रम ने बताया कि गांव में स्टेडियम का प्रबंध नहीं है। गांव के बच्चों को खेलने के लिए इधर- उधर भटकना पड़ता है। गांव में खेल स्टेडियम का प्रबंध होना चाहिए ताकि गांव से अच्छे खिलाड़ी निकल सकें। खेल मैदान न होने के कारण खिलाड़ी परेशान है। सड़कों पर दौड़ लगवाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
गांव में उखड़ी हैं गलियां
गांव कोलेखां के सतीश ने कहा कि गांव में फिलहाल कई गलियां उखड़ी हुई है। उखड़ी गलियों में बारिश के समय कीचड़ जमा हो जाता है। इससे आवागमन में दिक्कत होती है। अब नए सरपंच से यही उम्मीद रहेगी कि वह गांव की लगभग गलियों को दोबारा से पक्का करवाएं। पानी निकासी भी गांव की मुख्य समस्या है इस तरफ भी ध्यान देने की गांव में जरूरत है।
गांव का साझा काम करने वाला सरपंच
गांव कोलेखां निवासी एडवोकेट मनोज सहारण ने कहा कि गांव का साझा काम करने वाला सरपंच को सर्वसम्मति से चुनेंगे। जो सरपंच गांव में भाईचारा बनाए रखे। पुलिस तक गांव के किसी को जाने की जरूरत न पड़े। गांव की मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान दे। गांव में ज्यादा से ज्यादा विकास करवाएं। सभी के सुख-दुख में साथ खड़ा रहे।
शिक्षित और समझदार को चुनेंगे सरपंच
कोलेखंा गांव निवासी देवेंद्र सहारण ने कहा कि गांव में पिछली चार योजनाओं से पढ़ा-लिखा सरंपच सर्वसम्मति से चुन रहे है। इस कारण ही गांव में विकास कार्य अच्छे हो रहे है। इस बार भी सर्व समिति से पढ़ा लिखा सरपंच को चुनने की कोशिश की जा रही है, ताकि गांव में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य हो सकें। शिक्षित और समझदार को ही सरपंच चुनेंगे।