फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   The prescription is made here... the medicine will be available from outside.

Kaithal News: यहां पर्ची कटती है... दवा बाहर से मिलेगी

Sun, 15 Feb 2026 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 15 Feb 2026 12:04 AM IST
विज्ञापन
The prescription is made here... the medicine will be available from outside.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। शहर का नागरिक अस्पताल इन दिनों स्वयं ही बीमार नजर आ रहा है। यहां उपचार के लिए पांच रुपये की पर्ची तो अवश्य कटती है, लेकिन अधिकांश मरीजों को दवाएं अस्पताल से नहीं मिल पा रहीं। परिणामस्वरूप उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अस्पताल के दवा वितरण केंद्र पर इस समय पेट के संक्रमण, श्वास संबंधी बीमारियों, एंटीबायोटिक और आंखों के रोगों से जुड़ी कई दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

ऐसे में दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को निराशा हाथ लगती है। दवा का पर्चा लेकर जब मरीज काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें दवा उपलब्ध नहीं है कहकर लौटा दिया जाता है।जानकारी मिली है कि अस्पताल प्रशासन पर लोकल परचेज के तहत खरीदी गई दवाओं का करीब 30 लाख रुपये बकाया है। भुगतान लंबित रहने के कारण दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। अस्पताल में सामान्य बीमारियों से लेकर जीवन रक्षक दवाओं तक का अभाव मरीजों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
विज्ञापन


हालांकि अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र पर कुछ दवाएं सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं, लेकिन निशुल्क दवा वितरण के दावों के बीच मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विभाग के स्टॉक में हर प्रकार की दवा उपलब्ध है। यदि किसी दवा की कमी होती है तो लोकल परचेज के माध्यम से मंगवा ली जाती है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और यदि किसी दवा की कमी पाई गई तो तुरंत व्यवस्था की जाएगी, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। -डॉ. रेनू चावला सिविल सर्जन
आंखों की दवा लेने अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर से परामर्श के बाद दवा लिखी गई, लेकिन काउंटर पर बताया गया कि दवा उपलब्ध नहीं है। इसके बाद उन्हें सामने स्थित प्रधानमंत्री औषधालय से दवा लेने की सलाह दी गई।

-लखपत (गांव संगरौली)
उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चे को पेट संबंधी समस्या के कारण अस्पताल लाए थे। जांच के बाद डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन काउंटर पर दवा नहीं मिली। अंततः उन्हें पैसे देकर सामने स्थित औषधालय से दवा खरीदनी पड़ी।


- सुखदेव (कलायत)
निजी केमिस्टों की चांदी

अस्पताल में दवाओं की कमी का सीधा लाभ निजी मेडिकल स्टोर संचालकों को मिल रहा है। जो दवाएं अस्पताल में मुफ्त मिलनी चाहिए, उन्हें खरीदने के लिए मरीजों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है—एक ओर बीमारी और दूसरी ओर इलाज का अतिरिक्त खर्च। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल अब केवल पर्ची काटने तक सीमित रह गया है, दवाएं बाजार से ही खरीदनी पड़ती हैं। अस्पताल पर दवा सप्लायरों का लगभग 30 लाख रुपये बकाया होने से लोकल परचेज की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed