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Kaithal News: इलाज के लिए पर्ची 5 की, पार्किंग के लिए 20 रुपये
Wed, 03 Dec 2025 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 03 Dec 2025 12:56 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के नागरिक अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज इन दिनों बीमारी से ज्यादा पार्किंग शुल्क को लेकर परेशान दिखाई दे रहे हैं। अस्पताल में जहां इलाज की पर्ची मात्र 5 रुपये में बन जाती है, वहीं वाहन खड़ा करने के लिए 20 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल के मुख्य गेट पर बनाए गए पार्किंग बूथ पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले लोग मोटरसाइकिल, ऑटो या कार से अस्पताल पहुंचते हैं और उनके लिए पार्किंग की सुरक्षित सुविधा जरूरी होती है लेकिन बढ़े हुए शुल्क के चलते वे परेशानी झेल रहे हैं। कई लोग शुल्क बचाने के लिए अस्पताल परिसर से बाहर ही वाहन खड़ा कर देते हैं, जिससे सड़क किनारे वाहनों की भीड़ बढ़ने पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी पैदा होने लगी है।
अस्पताल में रोजाना बढ़ रही मरीजों की भीड़ के बीच पार्किंग की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। ऐसे में अधिक शुल्क वसूला जाना लोगों की नाराजगी का कारण बन रहा है। मरीजों का स्पष्ट कहना है कि अस्पताल सेवा का स्थान है, न कि कमाई का साधन।
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रेडक्रॉस के सेक्रेटरी रामजी लाल ने बताया कि अस्पताल की पार्किंग में 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपये तक के वाहन खड़े होते हैं। बाहर वाहन चोरी का खतरा रहता है। अस्पताल की पार्किंग में वाहन सुरक्षित रहता है, और यदि किसी का वाहन गुम होता है तो उसकी जिम्मेदारी रेड क्रॉस की होती है। ऐसे मामले में हम वाहन की कीमत या वैकल्पिक वाहन उपलब्ध करवाते हैं।
अस्पताल का मुख्य उद्देश्य इलाज देना है, न कि पार्किंग से कमाई करना। अगर शुल्क कम कर दिया जाए या खत्म कर दिया जाए तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी। -कृष्ण कुमार, निवासी चंदाना
इलाज की पर्ची 5 रुपये में कट गई, पर गाड़ी खड़ी करने में 20 रुपये लग गए। अगर मरीज भर्ती है तो दो बार पार्किंग बदलनी पड़ती है और हर बार पूरा पैसा देना पड़ता है। गरीब आदमी पहले ही इलाज के खर्च से परेशान रहता है। -सौरभ कुमार, निवासी कलायत
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कैथल। जिले के नागरिक अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज इन दिनों बीमारी से ज्यादा पार्किंग शुल्क को लेकर परेशान दिखाई दे रहे हैं। अस्पताल में जहां इलाज की पर्ची मात्र 5 रुपये में बन जाती है, वहीं वाहन खड़ा करने के लिए 20 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल के मुख्य गेट पर बनाए गए पार्किंग बूथ पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले लोग मोटरसाइकिल, ऑटो या कार से अस्पताल पहुंचते हैं और उनके लिए पार्किंग की सुरक्षित सुविधा जरूरी होती है लेकिन बढ़े हुए शुल्क के चलते वे परेशानी झेल रहे हैं। कई लोग शुल्क बचाने के लिए अस्पताल परिसर से बाहर ही वाहन खड़ा कर देते हैं, जिससे सड़क किनारे वाहनों की भीड़ बढ़ने पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी पैदा होने लगी है।
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अस्पताल में रोजाना बढ़ रही मरीजों की भीड़ के बीच पार्किंग की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। ऐसे में अधिक शुल्क वसूला जाना लोगों की नाराजगी का कारण बन रहा है। मरीजों का स्पष्ट कहना है कि अस्पताल सेवा का स्थान है, न कि कमाई का साधन।
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रेडक्रॉस के सेक्रेटरी रामजी लाल ने बताया कि अस्पताल की पार्किंग में 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपये तक के वाहन खड़े होते हैं। बाहर वाहन चोरी का खतरा रहता है। अस्पताल की पार्किंग में वाहन सुरक्षित रहता है, और यदि किसी का वाहन गुम होता है तो उसकी जिम्मेदारी रेड क्रॉस की होती है। ऐसे मामले में हम वाहन की कीमत या वैकल्पिक वाहन उपलब्ध करवाते हैं।
अस्पताल का मुख्य उद्देश्य इलाज देना है, न कि पार्किंग से कमाई करना। अगर शुल्क कम कर दिया जाए या खत्म कर दिया जाए तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी। -कृष्ण कुमार, निवासी चंदाना
इलाज की पर्ची 5 रुपये में कट गई, पर गाड़ी खड़ी करने में 20 रुपये लग गए। अगर मरीज भर्ती है तो दो बार पार्किंग बदलनी पड़ती है और हर बार पूरा पैसा देना पड़ता है। गरीब आदमी पहले ही इलाज के खर्च से परेशान रहता है। -सौरभ कुमार, निवासी कलायत