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Kaithal News: बेटियों की संख्या आधे से भी कम, कैथल के 10 गांवों में विभाग सख्त
Fri, 09 Jan 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:39 AM IST
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नरेंद्र पंडित
कैथल। जिले में घटते लिंगानुपात पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय अधिकारियों ने ऐसे 10 गांवों की सूची तैयार की है, जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 50 प्रतिशत या उससे भी कम पाई गई है। इन गांवों में अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डेरा डालकर लिंगानुपात गिरने के कारणों की गहन जांच करेंगे। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच हजार से अधिक आबादी वाले और कम से कम 30 डिलीवरी वाले गांवों को चिह्नित किया गया है। सूची में गांव बरसाना, मानस, पीडल, भूना, दयोरा, गुहला, डीग, चंदाना, पाडला और सांच शामिल हैं। पूरे जिले में इन 10 गांवों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक मानी जा रही है। ़
कुछ गांवों में तो लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आधे से भी कम दर्ज की गई है। यही वजह है कि विभागीय अधिकारी गंभीर मंथन में जुट गए हैं। अधिकारियों द्वारा आशा वर्करों और ग्राम पंचायतों के साथ बैठक कर यह जांच की जाएगी कि गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण संबंधी निर्देशों का कितना पालन हुआ है। प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण किया गया या नहीं, इसकी भी गहन समीक्षा होगी।
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जिले का लिंगानुपात वर्ष 2024 में 908 था, जो वर्ष 2025 में 16 पायदान की छलांग लगाते हुए 924 तक पहुंच गया है। इसके बावजूद इन 10 गांवों के आंकड़ों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
गांव बरसाना के सरपंच विजय ने बताया कि पंचायत की ओर से ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। यदि इस बार लिंगानुपात में गिरावट आई है तो भविष्य में जागरूकता अभियान को और तेज किया जाएगा।
गांवों में सिमटता दिख रहा ‘बेटी बचाओ’ अभियान ः एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर अपेक्षित जागरूकता देखने को नहीं मिल रही। कई बार विभागीय स्तर पर भी ढिलाई सामने आती है। यही कारण है कि कुछ गांवों में लिंगानुपात बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। लिंगानुपात के आंकड़े खुद इस सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। संवाद
गांव
लड़के
लड़कियां
बरसाना
42
28
मानस
39
26
पीडल
40
26
भूना
32
20
दयोरा
34
21
गुहला
48
28
डीग
55
31
चंदाना
52
28
पाडला
56
30
सांच
26
13
नोट: आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त।
सख्ती जरूरी है...
वर्ष भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 7900 लड़कों के मुकाबले 7302 लड़कियों का जन्म हुआ। लिंगानुपात में इस सुधार के पीछे स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी और एमटीपी अधिनियम के तहत की गई सख्त कार्रवाई के साथ-साथ समाज में बेटियों के प्रति बदलती सोच को भी अहम माना जा रहा है। अब लोग बेटी के जन्म पर लड्डू बांट रहे हैं। ढोल बजाकर खुशी मना रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि एक सुशिक्षित स्त्री विवाह से पहले मातृकुल और विवाह के बाद पतिकुल दोनों का उत्थान करती है।
सूचना पर मिलता है एक लाख रुपये का इनाम
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिंग जांच और अवैध गर्भपात केंद्रों पर सूचना या संदेह के आधार पर नियमित रूप से छापेमारी की जाती है। वर्ष 2025 में विभाग की टीमों ने सात सफल रेड की हैं, जिनमें प्रतिबंधित दवाइयां भी बरामद की गईं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किए गए हैं। गर्भपात केंद्रों की सूचना देने और उसके पुष्ट पाए जाने पर विभाग की ओर से एक लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।
वर्ष 2025 में जिले के लिंगानुपात में 2024 की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन 10 गांवों की स्थिति अब भी चिंताजनक है। इन गांवों में घटते लिंगानुपात के कारणों की पहचान कर जागरूकता और सख्ती के जरिए हालात सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. सचिन, डिप्टी सिविल सर्जन
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कैथल। जिले में घटते लिंगानुपात पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय अधिकारियों ने ऐसे 10 गांवों की सूची तैयार की है, जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 50 प्रतिशत या उससे भी कम पाई गई है। इन गांवों में अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डेरा डालकर लिंगानुपात गिरने के कारणों की गहन जांच करेंगे। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच हजार से अधिक आबादी वाले और कम से कम 30 डिलीवरी वाले गांवों को चिह्नित किया गया है। सूची में गांव बरसाना, मानस, पीडल, भूना, दयोरा, गुहला, डीग, चंदाना, पाडला और सांच शामिल हैं। पूरे जिले में इन 10 गांवों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक मानी जा रही है। ़
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कुछ गांवों में तो लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आधे से भी कम दर्ज की गई है। यही वजह है कि विभागीय अधिकारी गंभीर मंथन में जुट गए हैं। अधिकारियों द्वारा आशा वर्करों और ग्राम पंचायतों के साथ बैठक कर यह जांच की जाएगी कि गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण संबंधी निर्देशों का कितना पालन हुआ है। प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण किया गया या नहीं, इसकी भी गहन समीक्षा होगी।
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जिले का लिंगानुपात वर्ष 2024 में 908 था, जो वर्ष 2025 में 16 पायदान की छलांग लगाते हुए 924 तक पहुंच गया है। इसके बावजूद इन 10 गांवों के आंकड़ों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
गांव बरसाना के सरपंच विजय ने बताया कि पंचायत की ओर से ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। यदि इस बार लिंगानुपात में गिरावट आई है तो भविष्य में जागरूकता अभियान को और तेज किया जाएगा।
गांवों में सिमटता दिख रहा ‘बेटी बचाओ’ अभियान ः एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर अपेक्षित जागरूकता देखने को नहीं मिल रही। कई बार विभागीय स्तर पर भी ढिलाई सामने आती है। यही कारण है कि कुछ गांवों में लिंगानुपात बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। लिंगानुपात के आंकड़े खुद इस सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। संवाद
गांव
लड़के
लड़कियां
बरसाना
42
28
मानस
39
26
पीडल
40
26
भूना
32
20
दयोरा
34
21
गुहला
48
28
डीग
55
31
चंदाना
52
28
पाडला
56
30
सांच
26
13
नोट: आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त।
सख्ती जरूरी है...
वर्ष भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 7900 लड़कों के मुकाबले 7302 लड़कियों का जन्म हुआ। लिंगानुपात में इस सुधार के पीछे स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी और एमटीपी अधिनियम के तहत की गई सख्त कार्रवाई के साथ-साथ समाज में बेटियों के प्रति बदलती सोच को भी अहम माना जा रहा है। अब लोग बेटी के जन्म पर लड्डू बांट रहे हैं। ढोल बजाकर खुशी मना रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि एक सुशिक्षित स्त्री विवाह से पहले मातृकुल और विवाह के बाद पतिकुल दोनों का उत्थान करती है।
सूचना पर मिलता है एक लाख रुपये का इनाम
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिंग जांच और अवैध गर्भपात केंद्रों पर सूचना या संदेह के आधार पर नियमित रूप से छापेमारी की जाती है। वर्ष 2025 में विभाग की टीमों ने सात सफल रेड की हैं, जिनमें प्रतिबंधित दवाइयां भी बरामद की गईं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किए गए हैं। गर्भपात केंद्रों की सूचना देने और उसके पुष्ट पाए जाने पर विभाग की ओर से एक लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।
वर्ष 2025 में जिले के लिंगानुपात में 2024 की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन 10 गांवों की स्थिति अब भी चिंताजनक है। इन गांवों में घटते लिंगानुपात के कारणों की पहचान कर जागरूकता और सख्ती के जरिए हालात सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. सचिन, डिप्टी सिविल सर्जन