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बेटियों की रक्षा के लिए सरकार है संकल्पबद्ध : डॉ. रेनू
Fri, 25 Jul 2025 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सिविल सर्जन कार्यालय में वीरवार को सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला की अध्यक्षता में नीमा संगठन के साथ पीएनडीटी अधिनियम को लेकर एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के विरुद्ध सख्त कदम उठाने और जनजागरूकता अभियान तेज करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में जिले के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी, पीएनडीटी नोडल अधिकारी और नीमा संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। डॉ. रेनू चावला ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव कन्या भ्रूण हत्या को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के मूल्यों के भी खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के निर्देशानुसार सभी जिलों में पीसीपीएनडीटी अधिनियम की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। गर्भपात में सहायक औषधियों की अवैध बिक्री और दुरुपयोग पर स्वास्थ्य विभाग कड़ी निगरानी रखेगा।
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नीमा जिला इकाई के सचेतक डॉ. राजिंदर छाबड़ा ने कहा कि संगठन सदैव जनहित में कार्य करता आया है और भविष्य में भी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर ऐसे अवैध कार्यों के विरुद्ध सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम की अवहेलना करने वाले चिकित्सकों को उजागर करना हमारा नैतिक दायित्व है।
बीएएमएस चिकित्सक डॉ. बलविंद्र ने कहा कि चिकित्सा समुदाय को भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। बैठक में पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, जिला औषधि नियंत्रक चेतन वर्मा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, नीमा इकाई अध्यक्ष डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. बाबू राम यादव, डॉ. राजिंदर ठकराल तथा पूंडरी व गुहला-चीका से आए वरिष्ठ चिकित्सक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले में पीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत चिकित्सा इकाइयों की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही, भ्रूण लिंग जांच व अवैध गर्भपात के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गैर-पंजीकृत केंद्र में गर्भपात, अस्पताल पर केस
कैथल। स्वास्थ्य विभाग की रिवर्स ट्रैकिंग जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। कैथल स्थित बालाजी मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में एक महिला का गर्भपात किया गया, जबकि यह केंद्र मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं है। यह स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है। स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिले में सभी गर्भपात मामलों की गहन जांच की जा रही है। रिवर्स ट्रैकिंग के जरिए यह पता लगाया जाता है कि महिला ने अल्ट्रासाउंड कहां करवाया और गर्भपात किस केंद्र में हुआ। यदि केंद्र एमटीपी के लिए पंजीकृत नहीं है, तो कानूनी कार्रवाई की जाती है। संवाद
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कैथल। सिविल सर्जन कार्यालय में वीरवार को सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला की अध्यक्षता में नीमा संगठन के साथ पीएनडीटी अधिनियम को लेकर एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के विरुद्ध सख्त कदम उठाने और जनजागरूकता अभियान तेज करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में जिले के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी, पीएनडीटी नोडल अधिकारी और नीमा संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। डॉ. रेनू चावला ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव कन्या भ्रूण हत्या को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के मूल्यों के भी खिलाफ है।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के निर्देशानुसार सभी जिलों में पीसीपीएनडीटी अधिनियम की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। गर्भपात में सहायक औषधियों की अवैध बिक्री और दुरुपयोग पर स्वास्थ्य विभाग कड़ी निगरानी रखेगा।
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नीमा जिला इकाई के सचेतक डॉ. राजिंदर छाबड़ा ने कहा कि संगठन सदैव जनहित में कार्य करता आया है और भविष्य में भी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर ऐसे अवैध कार्यों के विरुद्ध सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम की अवहेलना करने वाले चिकित्सकों को उजागर करना हमारा नैतिक दायित्व है।
बीएएमएस चिकित्सक डॉ. बलविंद्र ने कहा कि चिकित्सा समुदाय को भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। बैठक में पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, जिला औषधि नियंत्रक चेतन वर्मा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, नीमा इकाई अध्यक्ष डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. बाबू राम यादव, डॉ. राजिंदर ठकराल तथा पूंडरी व गुहला-चीका से आए वरिष्ठ चिकित्सक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले में पीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत चिकित्सा इकाइयों की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही, भ्रूण लिंग जांच व अवैध गर्भपात के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गैर-पंजीकृत केंद्र में गर्भपात, अस्पताल पर केस
कैथल। स्वास्थ्य विभाग की रिवर्स ट्रैकिंग जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। कैथल स्थित बालाजी मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में एक महिला का गर्भपात किया गया, जबकि यह केंद्र मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं है। यह स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है। स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिले में सभी गर्भपात मामलों की गहन जांच की जा रही है। रिवर्स ट्रैकिंग के जरिए यह पता लगाया जाता है कि महिला ने अल्ट्रासाउंड कहां करवाया और गर्भपात किस केंद्र में हुआ। यदि केंद्र एमटीपी के लिए पंजीकृत नहीं है, तो कानूनी कार्रवाई की जाती है। संवाद