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प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है वसंत पंचमी का पर्व : शास्त्री
Tue, 04 Feb 2025 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 04 Feb 2025 01:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। वसंत पंचमी का पर्व क्षेत्र में बड़ी धूमधाम व धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाया। पूंडरी के माता मोहल्ला स्थित शिव मंदिर में हवन कर भंडारे का आयोजन किया गया। हवन पंडित रविदत्त शास्त्री ने करवाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वसंत पंचमी का पर्व हमको प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है।
मुख्य यजमान के रूप में अनिल अग्रवाल परिवार ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वसंत को ऋतुओं का राजा माना जाता है। माघ शुल्क पंचमी से इसका आगमन माना जाता है। वर्ष के आरंभ में वसंत प्रकृति को मानो पूरी तरह नया और ताजा कर देता है। वैसे हर पर्व हमें प्रेम और शांति की शिक्षा देता है। बसंत पंचमी का पर्व हमें प्रकृति से प्रेम और मां सरस्वती की साधना कर अपने जीवन को प्रगति के पथ पर जाने के लिए संकल्पित करने का पर्व है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी वर्ग मां शारदा की वंदना कर सफलता प्रदान करने के लिए विनय करते है। केवल लक्ष्मी की कृपा से ही जीवन सफल नहीं होता। लक्ष्मी के साथ साथ जब सरस्वती की कृपा होती है तब मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है। होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही होती है। सर्वप्रथम इसी दिन गुलाल उड़ाया जाता है। ब्रज में तो इस दिन से ही होली का उत्सव आरंभ हो जाता है।
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पुराणों के अनुसार इस दिन लक्ष्मी ने विष्णु जी से विवाह किया था। मुख्य यजमान के रूप में अनिल अग्रवाल परिवार की आरे से स्व. रामकिशन अग्रवाल व माता जगरानी अग्रवाल की याद में इस भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर रमेश शर्मा, पं. रविदत्त शास्त्री श्रीकृष्ण शर्मा, संजय सिंगला, अन्नु अग्रवाल, तन्नु अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, निधि अग्रवाल, रिद्धि आदि उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि पर्व 26 को
राजौंद। महाशिवरात्रि पर्व इस बार 26 फरवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा। क्षेत्र के कुछ मंदिरों में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की ओर से जल चढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। आचार्य बृज भूषण ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर शिव मंदिर में स्थित शिव लिंग पर जल चढ़ाने से 16 सोमवार जल चढ़ाने के समान पुण्य लगता है।
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार पर व्रत कर सकते हैं। आचार्य ने बताया कि महाशिवरात्रि महा पर्व आदि-अनादि देव महादेव का पर्व है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। प्रथम फाल्गुन माह में तथा दूसरा श्रावण माह में। विधि के विधान के अनुसार सृष्टि निर्माण का दायित्व श्रीब्रह्मा को, पालन पोषण का दायित्व श्री विष्णु जी को तथा सृष्टि संहार का भार श्री महादेव जी को सौंपा गया, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो महादेव का स्वरूप व प्रकृति विनाश से कही ज्यादा कल्याणकारी रहा है। भोले नाथ तो इतने सरल स्वभाव के हैं कि स्वयं विष पीकर दूसरों को जीवन देते हैं। कितनी ही दुष्ट प्रवृति का मानव या दानव हो, उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर मन वांछित वरदान दे देते हैं। संवाद
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पूंडरी। वसंत पंचमी का पर्व क्षेत्र में बड़ी धूमधाम व धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाया। पूंडरी के माता मोहल्ला स्थित शिव मंदिर में हवन कर भंडारे का आयोजन किया गया। हवन पंडित रविदत्त शास्त्री ने करवाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वसंत पंचमी का पर्व हमको प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है।
मुख्य यजमान के रूप में अनिल अग्रवाल परिवार ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वसंत को ऋतुओं का राजा माना जाता है। माघ शुल्क पंचमी से इसका आगमन माना जाता है। वर्ष के आरंभ में वसंत प्रकृति को मानो पूरी तरह नया और ताजा कर देता है। वैसे हर पर्व हमें प्रेम और शांति की शिक्षा देता है। बसंत पंचमी का पर्व हमें प्रकृति से प्रेम और मां सरस्वती की साधना कर अपने जीवन को प्रगति के पथ पर जाने के लिए संकल्पित करने का पर्व है।
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी वर्ग मां शारदा की वंदना कर सफलता प्रदान करने के लिए विनय करते है। केवल लक्ष्मी की कृपा से ही जीवन सफल नहीं होता। लक्ष्मी के साथ साथ जब सरस्वती की कृपा होती है तब मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है। होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही होती है। सर्वप्रथम इसी दिन गुलाल उड़ाया जाता है। ब्रज में तो इस दिन से ही होली का उत्सव आरंभ हो जाता है।
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पुराणों के अनुसार इस दिन लक्ष्मी ने विष्णु जी से विवाह किया था। मुख्य यजमान के रूप में अनिल अग्रवाल परिवार की आरे से स्व. रामकिशन अग्रवाल व माता जगरानी अग्रवाल की याद में इस भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर रमेश शर्मा, पं. रविदत्त शास्त्री श्रीकृष्ण शर्मा, संजय सिंगला, अन्नु अग्रवाल, तन्नु अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, निधि अग्रवाल, रिद्धि आदि उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि पर्व 26 को
राजौंद। महाशिवरात्रि पर्व इस बार 26 फरवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा। क्षेत्र के कुछ मंदिरों में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की ओर से जल चढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। आचार्य बृज भूषण ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर शिव मंदिर में स्थित शिव लिंग पर जल चढ़ाने से 16 सोमवार जल चढ़ाने के समान पुण्य लगता है।
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार पर व्रत कर सकते हैं। आचार्य ने बताया कि महाशिवरात्रि महा पर्व आदि-अनादि देव महादेव का पर्व है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। प्रथम फाल्गुन माह में तथा दूसरा श्रावण माह में। विधि के विधान के अनुसार सृष्टि निर्माण का दायित्व श्रीब्रह्मा को, पालन पोषण का दायित्व श्री विष्णु जी को तथा सृष्टि संहार का भार श्री महादेव जी को सौंपा गया, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो महादेव का स्वरूप व प्रकृति विनाश से कही ज्यादा कल्याणकारी रहा है। भोले नाथ तो इतने सरल स्वभाव के हैं कि स्वयं विष पीकर दूसरों को जीवन देते हैं। कितनी ही दुष्ट प्रवृति का मानव या दानव हो, उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर मन वांछित वरदान दे देते हैं। संवाद